अगर किसी के प्यार की गहराई समझनी हो तो आम तौर पर आप क्या करते हैं ? आपको अपने पार्टनर से प्यार तो है लेकिन कितना है इसका पैमाना सबका अलग-अलग, ज्यादा, कम हो सकता है।लेकिन वो एक बात क्या है जो अगर प्यार के साथ-साथ मिले तो प्यार और बढ़ता जाता है। मैं बताऊं ? वो है केयर यानि एक-दूसरे का ख्याल!-->!-->!-->…
Read More...
Trending
- सैयामी खेर ने इंडस्ट्री में पूरे किए 10 साल: “शूटिंग के पहले दिन जैसा जुनून और उत्साह आज भी”
- Drishyam The Conclusion का बॉक्स ऑफिस पर तूफान जारी, 4 दिन में ₹300 करोड़ पार
- Optimystix Entertainment का Game Changer दांव
- Lata Mangeshkar कैसे बनीं गायिका?
- क्या The Vvaan बन सकती है सिद्धार्थ मल्होत्रा की बड़ी Comeback Film?
- ‘ये प्रेम मोल लिया’ शादी और प्रेम के रंग में रंगी सूरज बड़जात्या की दुनिया
- Movie Review Mrs : इतनी ज़रूरी फ़िल्म है कि इसे जितनी भाषाओं में बनाया जाय कम है
- Abhishek Banerjee reveals that real reason to do a special cameo in Rajkummar Rao’s debut production, Toaster; reveals he didn’t even give a second thought before saying yes
- Singer & Actress Lisa Mishra to perform with Global Icon Ed Sheeran in Delhi on February 15
- A STAR STUDDED WORLD PREMIERE FOR MARVEL STUDIOS’ “DEADPOOL & WOLVERINE” IN NEW YORK
Browsing Category
Classic Tales
हालीवुड ने शख्सियतों एवं जीवनियों पर अनेक फिल्में बनाई हैं । महात्मा गांधी से लेकर नेपोलियन और फिर महारानी एलिजाबेथ के जीवन को परदे पर लाने का दुर्लभ साहस किया । इतिहास से प्रेरित होकर अनुकरणीय कहानियों को याद करने की ख्याति उनके पास है । हिन्दी सिनेमा ने भी ऐतिहासिक कहानियों पर बहुत सी फिल्म!-->…
Read More...
आमिर खान की पीके हमारी मान्यताओ को लेकर एक एलियन किस हिसाब से सोंचेगा. जवाब की तलाश में बनी लाजवाब हांस्य व्यंग्य फ़िल्म थी. महाकरोड़ क्लब की हालिया फिल्मो की तुलना में आमिर की फ़िल्म आपको निराशा नहीं करेगी..हालांकि वो भी इसी क्लब की बन गई. अजीबोगरीब एलियन वाली यह फ़िल्म इंसानों की दुनिया की बात कर!-->…
Read More...
गुरुदत्त की 1957 में आई फिल्म प्यासा मानवीय रिश्तों और उनकी निरर्थकता की बात करने वाली दुनिया की सबसे सशक्त फिल्मों में से एक है। बाजी, जाल, आर-पार और सीआईडी जैसी थ्रिलर और मिस्टर एंड मिसेज 55 जैसी हास्य फिल्म के बाद आई यह फिल्म गुरुदत्त के कैरियर ग्राफ को पूरी तरह से बदल देती है और उन्हें भारत के!-->…
Read More...
छलिया तीन मुख्य व दो सहायक किरदारों वाली एक त्रिकोणीय कहानी थी। मनमोहन देसाई की लोकप्रिय फिल्मों की तुलना में उनकी यह पहली फिल्म सीमित किरदारों की कहानी थी। छलिया में समकालीन दशक की आत्मा थी। इसमें कथा व कथन को सर्वाधिक महत्व मिला। फिल्म में अति नाटकीयता को जगह नहीं मिली व हास्य प्रसंग भी हवा की!-->…
Read More...
शेक्सपियर की रचनाओं पर फिल्में बनाने में विशाल भारद्वाज के अग्रसर गुलजार थे। आपने बार्ड की कृति ‘comedy of Errors’ पर ‘अंगूर’ जैसी फिल्म बनाई । समरूपी पहचान के शिकार दो जुडवाओं की कहानी के साथ मूल रचना को शानदार तरीके से अपनाया गया। परिस्थिति से उपजी जबरदस्त कामेडी । पटकथा की गतिशीलता अदाकारी में!-->…
Read More...
13 फरवरी 1975 को गुलज़ार निर्देशित आंधी भारतीय सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई…प्रदर्शन से पहले ही उस वक्त ये गहरे विवाद से गुजरी …हल्ला उठा कि ये फिल्म उस वक्त भारत की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित थी…दक्षिण भारत में लगे फिलम के पोस्टर में तो ये तक लिखा था “See your Prime Minister!-->…
Read More...
"वफाओं के बदले जफा कर रिया है, मैं क्या कर रिया हूँ तू क्या कर रिया है", ताँगेवाले के सुनाए गए इसी शेर में एम.एस. सथ्यु की कालजयी फिल्म 'गर्म हवा' का पूरा सार है। यह कहानी है सलीम मिर्ज़ा की जो चमड़े के जूते का एक कारखाना चलाते हैं और अभी हाल ही में भारत पाकिस्तान के हुए बँटवारे के बाद एक-एक करके!-->…
Read More...