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सिनेमा की सोच और उसका सच
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Classic Tales

फिल्म Shattered Glasses की ये लाइन फिल्म की शुरूआत में है और सच में यही हक़ीक़त भी है जर्नलिज्म यानि पत्रकारिता के पेशे की..वो जो लोग इस बेहद संवेदनशील करियर में दिनरात मेहनत कर रहे हैं, कोई पुलित्ज़र पा रहा है तो कोई छोटे पुरस्कार, किसी का दबदबा है तो किसी का मोल कौड़ियों में.उन सबकी प्रतिनिधि…
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जब हम चलें तो साया भी अपना ना साथ दे..जब तुम चलो बहार चले चांदनी चले..जब हम रुकें तो साथ रुके शामे बेकसी..जब तुम रुके बहार रूके चांदनी रुके.... गुरूदत्त...जिन्हे ज्यादातर लोग एक निर्देशक या कलाकार के तौर पर जानते हैं..उनसे ताल्लुक उन सभी का है जो अक्सर जुनून और व्यवयासिकता के युद्ध में खुद को घिरा…
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