FilmCity World
सिनेमा की सोच और उसका सच

WORLD CINEMA में ‘मैप ऑफ द ह्यूमन हार्ट’ : अद्भुत संयोगों से भरी अद्भुत प्रेम कहानी :

World Cinema - बचपन में अपनी पाठ्य पुस्तक में एस्किमो बालक नाम का एक चैप्टर पढ़ा था जिसमें पहली और आखिरी बार सील और वौलरस नाम के जीवों की तसवीरें देखीं थीं और इग्लू के बारे में जाना था। कुछ तस्वीरों में कई एस्किमो बालक स्लेज की सवारी कर रहे…

सलीम को दया और सुहानुभूति नहीं, रोशनी का पता बताने वाला कोई चाहिए : सलीम (SALIM) लंगड़े पे मत रो

सलीम लंगड़े पे मत रो Salim Langde Pe Mat Ro - हिंदी के चर्चित और बेहतरीन साहित्यकार राजेंद्र यादव ने एक बार अपने एक साक्षात्कार में इस सवाल के जवाब में कि ‘वे युवा पीढ़ी द्वारा किस रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे’ कहा था कि उन्हें युवा…

जनता की असली सच्चाई बयान करती Akira Kurosawa की ‘द सेवन समुराई’

महान फिल्म निर्देशक अकिरा कुरोसावा (Akira Kurosawa) का लोहा पूरी दुनिया इसलिए नहीं मानती कि इनकी फिल्में अलग अलग विषयों पर हैं बल्कि उनकी फिल्मों की खासियत ये है कि वे बिलकुल अलग-अलग विषयों पर होने के बावजूद इनसान के उन गुणों और दोषों को…

WORLD CINEMA : बारिश की बूँदों सी कोमल ‘BARAN’

ईरान के संवेदनशील फिल्मकार माजिद मजीदी की फिल्मों पर बात बगैर बरान (BARAN) के पूरी नहीं हो सकती...ये एक ऐसी फिल्म है जिसमें उस कोमल भावना की बात की गई है जिसकी वजह से इस दुनिया में जीने की वजह बची हुई है। 2001 में रिलीज माजिद मजीदी की इस…

CLASSIC TALE : सबसे अच्छे आदमी की तलाश करती ‘परख’

वैसे तो बिमल रॉय को 'दो बीघा जमीन' और 'बंदिनी' जैसी फिल्मों के लिए अधिक माना और जाना जाता है लेकिन 1960 में आई 'परख' उनकी सबसे अलग स्वाद वाली फिल्म है जिसमें आजादी के बाद के मोहभंग का उन्होंने इतने व्यंग्यपूर्ण ढंग से चित्रण किया है कि दिल…

Clssic Tale “BOOT POLISH : मुट्ठी में तकदीर और आँखों में उम्मीदों की दिवाली

देश के 1947 में आजाद होने से पहले माहौल कुछ इस तरह का बन गया था कि आजादी मिलते ही देश का कायाकल्प हो जाएगा। भुखमरी, सूखा, बाढ़ और बेरोजगारी हर समस्या का एक ही इलाज नजर आता था आजादी। उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं और उनमें से ज्यादातर झूठी थीं।

CLASSIC TALE “कानून” :कोई भी सच अंतिम नहीं होता

बॉलीवुड में थ्रिलर फिल्मों की समृद्ध परंपरा नहीं रही है, कुछ फिल्में बीच-बीच में बनी जरूर हैं लेकिन ये सिलसिला लगातार नहीं रहा है। कारण वही रहा है जो हिंदी साहित्य में सिनेमा पर गंभीर लेखन की कमी का रहा है, अच्छे माने जाने वाले निर्देशकों

टूटते सपने का एक बीज और गौरैयों का गीत : द साँग ऑफ द स्पैरोज

'द कलर ऑफ पैराडाईज', 'बरान', 'द चिल्ड्रेन ऑफ हैवेन' और 'फादर' जैसी अर्थपूर्ण और संवेदनशील फिल्में होते हुए भी ईरान के नामचीन निर्देशक माजिद मजीदी की फिल्म 'द साँग ऑफ द स्पैरोज' (आवाज-ए-गोंजेश्क-हा) इस मायने में उनकी सबसे खूबसूरत फिल्म