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सिनेमा की सोच और उसका सच

‘The Color of Paradise’ और ‘Father’ : पिता-पुत्र संबंधों की दो इबारतें

The Color of Paradise और Father पर ये लेख लिखा है विमल चंद्र पाण्डेय ने.. वैसे तो माजिद मजीदी की हर फिल्म पर बहुत लिखा गया है और लिखा जाना चाहिए लेकिन इन दो फिल्मों पर एक साथ बात करने को मन इसलिए करता है क्योंकि इनमें काफी कुछ कॉमन

Classic Tale “गर्म हवा” : बड़ी गर्म हवा है मियाँ, जो उखड़ा नहीं सूख जावेगा – विमल…

"वफाओं के बदले जफा कर रिया है, मैं क्या कर रिया हूँ तू क्या कर रिया है", ताँगेवाले के सुनाए गए इसी शेर में एम.एस. सथ्यु की कालजयी फिल्म 'गर्म हवा' का पूरा सार है। यह कहानी है सलीम मिर्ज़ा की जो चमड़े के जूते का एक कारखाना चलाते हैं और अभी

एक कमरा, कुछ पूर्वाग्रह भरे लोग और एक हत्या : एक रुका हुआ फैसला – विमल चंद्र पांडेय

बारह लोग, एक कमरा, एक बड़ी सी सेंटर टेबल और बारह कुर्सियाँ, सिर्फ इतने कलाकारों से एक शानदार और बांधने वाली फिल्म बन सकती है, ये सोचना भी असहज कर देता है लेकिन बासु चटर्जी की 'एक रुका हुआ फैसला' कुछ ऐसा ही करती है और एक संदेश यह भी देती है

तूने किसान का बेटा होकर चोरी की? : दो बीघा जमीन के 66 साल- विमल चंद्र पांडेय

बिमल रॉय की दो बीघा जमीन में एक ही जैसा एक दृश्य या परिस्थितियाँ दो बार आती हैं जब किसान शंभू महतो का बेटा कन्हैया एक साथ ढेर सारे पैसे पाता है। पहली बार वह अपने एक पाकेटमार दोस्त की मदद से एक साथ पचास रुपये पाता है और दौड़ता हुआ अपने पिता

बंदिनी के 56 साल : अबकी बार, ले चल पार, ले चल पार…

1 जनवरी 1963 को रिलीज़ हुई बंदिनी पर ये लेख जाने माने लेखक-फिल्म निर्देशक विमल चंद्र पाण्डेय ने लिखा है.. कुछ ही फिल्में ऐसी होती हैं जिनके अंत में आप अंत का अंदाजा लगा चुकने के बावजूद सहमे से बैठे उस पल का इंतजार करते रहते हैं जब फिल्म

Quick Movie Review : अंधाधुन देखने के बाद फिल्मकार विमल की ये टिप्पणी नहीं पढ़ी तो क्या पढ़ा

फ़िल्म तो शानदार है, ये शाम तक हर किसी को हर किसी से पता चल ही जायेगा। और हाँ, आयुष्मान खुराना की उम्दा एक्टिंग के बावजूद ये फ़िल्म पर्दे पर तब्बू की है। लव यू राघवन, लव यू तब्बू, लव यू अंधाधुन