FilmCity World
सिनेमा की सोच और उसका सच

Clssic Tale “BOOT POLISH : मुट्ठी में तकदीर और आँखों में उम्मीदों की दिवाली

देश के 1947 में आजाद होने से पहले माहौल कुछ इस तरह का बन गया था कि आजादी मिलते ही देश का कायाकल्प हो जाएगा। भुखमरी, सूखा, बाढ़ और बेरोजगारी हर समस्या का एक ही इलाज नजर आता था आजादी। उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं और उनमें से ज्यादातर झूठी थीं।

CLASSIC TALE “कानून” :कोई भी सच अंतिम नहीं होता

बॉलीवुड में थ्रिलर फिल्मों की समृद्ध परंपरा नहीं रही है, कुछ फिल्में बीच-बीच में बनी जरूर हैं लेकिन ये सिलसिला लगातार नहीं रहा है। कारण वही रहा है जो हिंदी साहित्य में सिनेमा पर गंभीर लेखन की कमी का रहा है, अच्छे माने जाने वाले निर्देशकों

टूटते सपने का एक बीज और गौरैयों का गीत : द साँग ऑफ द स्पैरोज

'द कलर ऑफ पैराडाईज', 'बरान', 'द चिल्ड्रेन ऑफ हैवेन' और 'फादर' जैसी अर्थपूर्ण और संवेदनशील फिल्में होते हुए भी ईरान के नामचीन निर्देशक माजिद मजीदी की फिल्म 'द साँग ऑफ द स्पैरोज' (आवाज-ए-गोंजेश्क-हा) इस मायने में उनकी सबसे खूबसूरत फिल्म

प्यासा के 62 साल:जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया…

गुरुदत्त की 1957 में आई फिल्म प्यासा मानवीय रिश्तों और उनकी निरर्थकता की बात करने वाली दुनिया की सबसे सशक्त फिल्मों में से एक है। बाजी, जाल, आर-पार और सीआईडी जैसी थ्रिलर और मिस्टर एंड मिसेज 55 जैसी हास्य फिल्म के बाद आई यह फिल्म गुरुदत्त

‘The Color of Paradise’ और ‘Father’ : पिता-पुत्र संबंधों की दो इबारतें

The Color of Paradise और Father पर ये लेख लिखा है विमल चंद्र पाण्डेय ने.. वैसे तो माजिद मजीदी की हर फिल्म पर बहुत लिखा गया है और लिखा जाना चाहिए लेकिन इन दो फिल्मों पर एक साथ बात करने को मन इसलिए करता है क्योंकि इनमें काफी कुछ कॉमन

Classic Tale “गर्म हवा” : बड़ी गर्म हवा है मियाँ, जो उखड़ा नहीं सूख जावेगा – विमल…

"वफाओं के बदले जफा कर रिया है, मैं क्या कर रिया हूँ तू क्या कर रिया है", ताँगेवाले के सुनाए गए इसी शेर में एम.एस. सथ्यु की कालजयी फिल्म 'गर्म हवा' का पूरा सार है। यह कहानी है सलीम मिर्ज़ा की जो चमड़े के जूते का एक कारखाना चलाते हैं और अभी

एक कमरा, कुछ पूर्वाग्रह भरे लोग और एक हत्या : एक रुका हुआ फैसला – विमल चंद्र पांडेय

बारह लोग, एक कमरा, एक बड़ी सी सेंटर टेबल और बारह कुर्सियाँ, सिर्फ इतने कलाकारों से एक शानदार और बांधने वाली फिल्म बन सकती है, ये सोचना भी असहज कर देता है लेकिन बासु चटर्जी की 'एक रुका हुआ फैसला' कुछ ऐसा ही करती है और एक संदेश यह भी देती है

तूने किसान का बेटा होकर चोरी की? : दो बीघा जमीन के 66 साल- विमल चंद्र पांडेय

बिमल रॉय की दो बीघा जमीन में एक ही जैसा एक दृश्य या परिस्थितियाँ दो बार आती हैं जब किसान शंभू महतो का बेटा कन्हैया एक साथ ढेर सारे पैसे पाता है। पहली बार वह अपने एक पाकेटमार दोस्त की मदद से एक साथ पचास रुपये पाता है और दौड़ता हुआ अपने पिता