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सिनेमा की सोच और उसका सच
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Classic Tales

फ़िल्म "परिंदा" की रिलीज के 30 साल पूरे होने में अभी महज 2 दिन बचे है और ऐसे में लेखक-निर्देशक 30 साल पहले रिलीज हुई अपनी प्रतिष्ठित हिट परिंदा के संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए वीडियो साझा कर रहे हैं। निर्देशक ने एक बार फिर अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया एक वीडियो जारी किया है…
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1996 की ये फिल्म कहानी है दो लोगों की जिनको जीने के लिए अपने अस्तित्व से समझौता करना पड़ता है। अपनी पहचान को बदलना पड़ता है। एक अपनी इच्छा से तो दूसरा अपनी मजबूरी में अपनी असल पहचान को नकार देता है। इस में एक ट्रांसवेस्टाइट यानी समलैंगिक है जिसे हम बोलचाल में बड़े आराम से हिजड़ा कह देते है (बिना ये…
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1974 में एक फिल्म आई ’27 DOWN’, जिसने उस साल का बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड जीता...इस फिल्म को बनानेवाले थे अवतार कृष्ण कौल, जिन्होने अपने पूरे फिल्मी करियर में केवल ये ही एक फिल्म बनाई....इस फिल्म के बाद एक हादसे में वो इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनकी ये एक फिल्म उनके अंदर बसे एक…
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बनने दीजिए सौ करोड़िया क्लब और दो सौ और उसके आगे के भी क्लब बनने दें क्योंकि ऐसी सस्ती फिल्मों के करोड़ों क्लब भी बनकर हिंदी सिनेमा को वो हैसियत या सम्मान नहीं दे सकते जैसा रितेश बत्रा आपकी एक प्राइसलेस लंचबॉक्स (The Lunchbox ) दे गयी।
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कमरुद्दीन आसिफ़ की मुग़ल-ए-आज़म भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर है । सन 1953 में शुरू हुई फिल्म सात वर्षों में बनकर पूरी हुई । फ़िल्म की शूटिंग दौरान परदे के पीछे का एक किस्सा
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काशीनाथ सिंह की कृति ‘काशी का अस्सी’ पर आधारित’ मोहल्ला अस्सी’ को लेकर शुरू से ही उत्सुकता रही थी। ऐसे हालात में जहां पे मुख्यधारा साहित्यिक रचानाओं पर फिल्में बनाने में न के बराबर दिलचस्पी लेती है। वहां पर मोहल्ला अस्सी का बन कर रिलीज़ हो पाना महत्व रखता है।
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गुरुदेव की बहुत मशहूर कहानी है  'काबुलीवाला। '  यह बांग्ला में लिखी गयी थी। लेकिन जब  बिमल राय ने 1961 में इस कहानी को परदे पर उतारा, तो इसकी शोहरत ने भाषा और क्षेत्र सभी की सीमाएं लांघ दी। काबुलीवाले के पात्र से परिचित होना एक नवीन अनुभव विकसित करता है।
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हिन्दी एवं बांग्ला फ़िल्मो के सुपरिचित निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत का जन्म वर्धमान (पश्चिम बंगाल) मे हुआ था। परिवार ने प्रारंभिक शिक्षा हेतु उन्हे देहरादून भेजा | पढाई पूरी कर वापस कलकत्ता (कोलकाता) लौटे और कलकत्ता विश्वविद्यालय के ‘कला संकाय’ मे दाखिला लिया, शक्ति दा मे अपनी मातृभाषा ‘बांग्ला’ के…
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