बारह लोग, एक कमरा, एक बड़ी सी सेंटर टेबल और बारह कुर्सियाँ, सिर्फ इतने कलाकारों से एक शानदार और बांधने वाली फिल्म बन सकती है, ये सोचना भी असहज कर देता है लेकिन बासु चटर्जी की 'एक रुका हुआ फैसला' कुछ ऐसा ही करती है और एक संदेश यह भी देती है की रीमेक बनने औए उसका देसीकरण करने का भी एक शास्त्रीय अंदाज!-->…
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Classic Tales
बिमल रॉय की दो बीघा जमीन में एक ही जैसा एक दृश्य या परिस्थितियाँ दो बार आती हैं जब किसान शंभू महतो का बेटा कन्हैया एक साथ ढेर सारे पैसे पाता है। पहली बार वह अपने एक पाकेटमार दोस्त की मदद से एक साथ पचास रुपये पाता है और दौड़ता हुआ अपने पिता के पास आता है जो अपनी दो बीघा जमीन बचाने के लिए जमीन आसमान!-->…
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हिंदी सिनेमा में ऐसी कई प्रतिभाएं आई जिन्होंने अपने काम के दम पर नाम को रोशन किया बल्कि दर्शको की यादों में बस गए। कहना होगा कि जाने माने निर्देशक विजय आनंद भी एक ऐसी ही शख्सियत थे। फ़िल्मी गलियारों में विजय 'गोल्डी' नाम से मशहूर थे। विजय आनंद को हिंदी सिनेमा का महान फ़िल्म निर्देशक का गौरव प्राप्त!-->…
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1 जनवरी 1963 को रिलीज़ हुई बंदिनी पर ये लेख जाने माने लेखक-फिल्म निर्देशक विमल चंद्र पाण्डेय ने लिखा है.. कुछ ही फिल्में ऐसी होती हैं जिनके अंत में आप अंत का अंदाजा लगा चुकने के बावजूद सहमे से बैठे उस पल का इंतजार करते रहते हैं जब फिल्म अपने सबसे तनावयुक्त मोड़ पर होती है और किसी भी पल आपकी आह!-->…
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भारतीय सिनेमा संदर्भ में हिन्दी सिनेमा का बडा हिस्सा आता है । फिल्मों की संख्या एवं राष्ट्रीय फिल्म बाजार आधार पर ऐसा कहा जा सकता है। सितारों में नायक-नायिका ही नहीं और लोग भी मिलेंगे। सितारों में उन सबकी बात की जानी चाहिए जिनका सामर्थ्य फिल्म विधा को जीवित रखता है। कह सकते हैं कि फिल्म-मेकिंग!-->…
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2 जनवरी 1959 में रिलीज हुई फिल्म KAAGAZ KE PHOOL को आज यानी 2 जनवरी 2019 को 60 साल पूरे हो गए....रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी ये फिल्म बाद में कल्ट सिनेमा साबित हुई और इसे all time greatest film की कैटेगरी में शामिल किया गया.... निर्माता-निर्देशक गुरू दत्त अपनी फिल्म के शुरूआती 8 मिनट!-->…
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फ़िल्म इंडस्ट्री मे टीम के नाम से विख्यात और एक से अधिक बार मंच से साथ काम करने का सफ़ल संजोग देखा गया है| सफ़लता और संजोग का ग्राफ़ इनके एक साथ आ जाने से टिकट खिडकी और लोकप्रियता का ग्राफ़ बना। फ़िल्म निर्माण टीम प्रबंधन, एकजुटता के अभाव मे संभव नही । फ़िल्म को पेशा और व्यवसाय बनाने मे कई श्रेणी और!-->…
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PIKU केवल एक बुजुर्ग को हुए कब्ज की कहानी भर नहीं। इससे उपजा हास्य- आनंद इस फिल्म का एक अहम पहलू रहा जो साथ आपके घर तक आ जाता है।
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