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सिनेमा की सोच और उसका सच
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Classic Tales

हिन्दी एवं बांग्ला फ़िल्मो के सुपरिचित निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत का जन्म वर्धमान (पश्चिम बंगाल) मे हुआ था। परिवार ने प्रारंभिक शिक्षा हेतु उन्हे देहरादून भेजा | पढाई पूरी कर वापस कलकत्ता (कोलकाता) लौटे और कलकत्ता विश्वविद्यालय के ‘कला संकाय’ मे दाखिला लिया, शक्ति दा मे अपनी मातृभाषा ‘बांग्ला’ के…
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   साल 1964 की बात है एक फिल्म रिलीज हुई ‘यादें’....फिल्म के पोस्टर में केवल सुनील दत्त का ही चेहरा नजर आ रहा था....हालांकि उस पोस्टर में उनके कई तरह से एक्सप्रेशन थे लेकिन उसके अलावा फिल्म की किसी भी और तरह की कोई जानकारी उस पोस्टर पर नहीं थी....      सबसे खास बात ये थी कि उस वक्त से कामयाब…
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वैसे तो बिमल रॉय को 'दो बीघा जमीन' और 'बंदिनी' जैसी फिल्मों के लिए अधिक माना और जाना जाता है लेकिन 1960 में आई 'परख' उनकी सबसे अलग स्वाद वाली फिल्म है जिसमें आजादी के बाद के मोहभंग का उन्होंने इतने व्यंग्यपूर्ण ढंग से चित्रण किया है कि दिल कह उठता है, वाह ये है असली डायरेक्टर जिसकी फिल्में एक दूसरे…
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देश के 1947 में आजाद होने से पहले माहौल कुछ इस तरह का बन गया था कि आजादी मिलते ही देश का कायाकल्प हो जाएगा। भुखमरी, सूखा, बाढ़ और बेरोजगारी हर समस्या का एक ही इलाज नजर आता था आजादी। उम्मीदें बहुत बढ़ गई थीं और उनमें से ज्यादातर झूठी थीं। बेसब्री से आजादी का इंतजार करते लोग जब तक ये समझ पाते कि
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बॉलीवुड में थ्रिलर फिल्मों की समृद्ध परंपरा नहीं रही है, कुछ फिल्में बीच-बीच में बनी जरूर हैं लेकिन ये सिलसिला लगातार नहीं रहा है। कारण वही रहा है जो हिंदी साहित्य में सिनेमा पर गंभीर लेखन की कमी का रहा है, अच्छे माने जाने वाले निर्देशकों ने प्रायः थ्रिलर और हॉरर फिल्मों को दोयम दर्जे का काम माना
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गुलज़ार की लिखी राकेश ओमप्रकाश मेहरा जैसे बड़े नामों से जुड़ी 'मिर्जिया' दो कहानियां दिखाती है। एक छोर पर पंजाब की लोककथा मिर्जा-साहिबा का युग है। दूसरी कहानी आज के राजस्‍थान के आदिल-सुचि की है। दोनों कहानियों की तक़दीर एक सी है। अफ़सोस सदियों बाद भी मुहब्बत को लेकर परिवार और समाज का रवैया नहीं
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अगर किसी के प्यार की गहराई समझनी हो तो आम तौर पर आप क्या करते हैं ? आपको अपने पार्टनर से प्यार तो है लेकिन कितना है इसका पैमाना सबका अलग-अलग, ज्यादा, कम हो सकता है।लेकिन वो एक बात क्या है जो अगर प्यार के साथ-साथ मिले तो प्यार और बढ़ता जाता है। मैं बताऊं ? वो है केयर यानि एक-दूसरे का ख्याल
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