परदे पर डराने का दौर लाने वाले तुलसी रामसे नहीं रहे मगर उनके बारे में ये बातें नहीं होंगी आपको मालूम.
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Classic Tales
जानिए दिलीप कुमार साहब की जिन्दगी का एक अनोखा मगर प्यारा सा किस्सा...
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10 जनवरी 1930 को अजमेर में पैदा हुए बासु दा की फिल्में क्लासिकल फिल्मों के एहसास वाली लोकप्रिय फिल्में रहीं।
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उत्तम कुमार, शशि कपूर और किशोर कुमार तक को रोल किया गया ऑफर मगर नहीं बनी बात।
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( फ़िल्मसिटी वर्ल्ड के लिए ये विशेष लेख डॉ. श्रीश पाठक ने लिखा है )
दो-दो भयानक महायुद्धों वाली शताब्दी अपने छठे दशक में पहुँच रही थी। शीत युद्ध की लू चल रही थी जरूर, पर लगता था कि विश्व अब वैश्विक विनाश की ओर फिर नहीं बढ़ेगा। दुनिया के कई देश आज़ादी की हवा का स्वाद चख रहे थे और स्वयं को इस दुविधा…
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मैने जिनको भी सुना है या पढ़ा है अपनी सिनेमाई ज़मीन तलाशने की संघर्ष के दिनों के बारे में बताते हुए..उनमें से ज्यादातर इस एक फिल्म का ज़िक्र ज़रूर करते हैं। द बायसिकल थीव्स को सत्यजीत रे से लेकर आज तक के फिल्मकारों ने अपनी फिल्ममेकिंग का स्कूल कहा है। मेरे पास ये फिल्म लगभग 6 महीने से थी..मैने बहुत…
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सुचित्रा सेन की आज चौथी बरसी है..1978 से उन्होने फिल्मों से मुंह मोड़ लिया था..और उनकी यादगार फिल्में रहीं आंधी, देवदास, ममता और बंबई का बाबू..उनकी जोड़ी ज्यादातर उत्तम कुमार के साथ जमी..बंगाल में ये जोड़ी उसी तरह अमर है जैसे दिलीप कुमार मधुबाला, राज- नरगिस और देवआनंद सुरैया..तस्वीरों में फिल्मसिटी…
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बिमल रॉय वो नाम है जिसने भारतीय फिल्म उद्योग में प्रोग्रेसिव सिनेमा का नज़रिया सबसे पहले पेश किया,,,कहते हैं कि सिनेमा समाज का आईना होता है मगर ये बात कहने से ज्यादा समझने और समझाने की है..और बिमल रॉय की फिल्मे अपने इसी अंदाज़ की वजह से खास हो जाती हैं..रॉय ने सामाजिक संवेदना और उसकी उदासीनता..दोनो…
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