FilmCity World
सिनेमा की सोच और उसका सच

क्रांतिकारी भगत सिंह के प्रेरक चरित्र पर बनी फिल्म ‘शहीद’

हालीवुड ने शख्सियतों एवं जीवनियों पर अनेक फिल्में बनाई हैं । महात्मा गांधी से लेकर नेपोलियन और फिर महारानी एलिजाबेथ के जीवन को परदे पर लाने का दुर्लभ साहस किया । इतिहास से प्रेरित होकर अनुकरणीय कहानियों को याद करने की ख्याति उनके पास

हर राजनीतिक होली की याद दिलाती फ़िल्म

राजनीति के प्रति समझ विकसित करने वाली फिल्मों में ‘गुलाल’ याद आती है। अनुराग कश्यप नई पीढ़ी के प्रतिभामान फिल्मकारों में से हैं। इस पीढ़ी के फिल्मकार कहानी को अलग नज़रिए से कहने का संकल्प रखते हैं। अनुराग हर बार कुछ अलग-अनकही किस्म की

पीके की मासूम उलझनों में बंटते बिखरते समाज की चिंताएं

आमिर खान की पीके हमारी मान्यताओ को लेकर एक एलियन किस हिसाब से सोंचेगा. जवाब की तलाश में बनी लाजवाब हांस्य व्यंग्य फ़िल्म थी. महाकरोड़ क्लब की हालिया फिल्मो की तुलना में आमिर की फ़िल्म आपको निराशा नहीं करेगी..हालांकि वो भी इसी क्लब की बन गई.

चाकलेटी मेटिनी हीरो ‘जॉय मुखर्जी’

गुज़रे जमाने के मशहूर चाकलेटी अभिनेता ‘जॉय मुखर्जी’ का जन्म जाने माने शशधर मुखर्जी के परिवार में हुआ। पिता शशधर व माता सती देवी के परिवार में जय, देब तथा शोमु मुखर्जी को मिलाकर तीन संतानें थी। पिता ‘फिलमिस्तान स्टुडियो’ के मालिक व

छलिया के बहाने

छलिया तीन मुख्य व दो सहायक किरदारों वाली एक त्रिकोणीय कहानी थी। मनमोहन देसाई की लोकप्रिय फिल्मों की तुलना में उनकी यह पहली फिल्म सीमित किरदारों की कहानी थी। छलिया में समकालीन दशक की आत्मा थी। इसमें कथा व कथन को सर्वाधिक महत्व मिला। फिल्म

किस्मत के मारे काबिल सितारे …. गुमनाम फ़िल्मी सितारों पर लेख

वक्त का न्याय सबसे महान होता है। हमारी फिल्म इंडस्ट्री ने किसी को आसमान की बुलंदिया नवाज कीं तो किसी को फकीर बना दिया। सच ही कहा गया कि यह एक मायानगरी है।जब कभी हमने यह विचार किया कि यहां के सितारे बडे तकदीर वाले होते हैं, अक्सर गलत साबित

उलझन से उपजी यादगार फ़िल्म ‘अंगूर’

शेक्सपियर की रचनाओं पर फिल्में बनाने में विशाल भारद्वाज के अग्रसर गुलजार थे। आपने बार्ड की कृति ‘comedy of Errors’ पर ‘अंगूर’ जैसी फिल्म बनाई । समरूपी पहचान के शिकार दो जुडवाओं की कहानी के साथ मूल रचना को शानदार तरीके से अपनाया गया।

शोषण के हर रूप का विरोध ‘कहानी 2’

शोषण के हर रुप का विरोध ज़रूरी है. यह किसी भी रुप में मौजूद हो सकता है.सुजॉय घोष की 'कहानी 2 दुर्गा रानी सिंह' इसी बात को रेखांकित करती फ़िल्म थी. child सेक्सुअल abuse की काली हकीक़त को फ़िल्म ने बड़ी संजीदगी से लिया सेक्सुअल शोषण