FilmCity World
सिनेमा की सोच और उसका सच

छोटे शहरों के बड़े नायकों की शानदार फिल्म ‘ एम एस धोनी अंटोल्ड स्टोरी’

सुशांत और महेंद सिंह में छोटे शहरों का कॉमन कनेक्शन चीजों को दिलचस्प बना देता है। क्रिकेट के फोलो करने वालों को यह फिल्‍म को काफ़ी सराहा। क्‍योंकि इसमें धौनी के खेल एवं संघर्षयात्रा का सुंदर समागम हुआ । यह फिल्म दरअसल छोटे शहर के बड़े…

काबिलियत के दम पर कई अवार्ड्स जीतने वाली फिल्म ‘ गली बॉय’

यह कहानी अपने जूनून को पूरा करने की है। उसके पीछे तब तक भागने की है जब तक वो सच्चाई न बन जाए। हर मुश्किल का सामना करके अपनी किस्मत पलटना फ़िल्म का सार है।

नेटफ्लिक्स वेब सिरीज़ में नई मिसाल ‘ताजमहल 1989’

लव स्टोरीज को फिल्म या वेब सीरीज़ में तलाशने वाले दर्शक 'ताजमहल 1989' ज़रूर देखें। बहुत उम्दा बन पड़ी है यह सीरीज़। खासकर संवाद, पुष्पेंद्र नाथ मिश्र की कसी हुई लिखावट। अबोले प्रसंग और अधूरे वाक्यों को जगह देना कमाल कर गया है। एक दौर की…

जिंदगी की जीत में यकीं रखने वाले हर किसी के लिए जरूरी फिल्म

बड़ी बजट की फिल्मों के बीच छोटे बजट की फिल्मों का निर्माण हमेशा से एक मुश्किल भरा काम रहा है । चुनौती फिल्म बनाने तक भर होती तो फिर भी ठीक होता । लेकिन मामला रिलीज करना यानी उसे दिन का उजाला दिखाने तक जाता है। जोकि बड़े कशमकश की लड़ाई होती…

दिल का एक सितारा चला गया है।

गीतकार शैलेंद्र के निधन पर राजकपूर ने कहा था... दिल का एक सितारा चला गया है। ठीक नहीं हुआ। आपके बगिया के खूबसुरत गुलाबों में से कोई एक भी जाए,तकलीफ होती है। अजीज के लिए यह आंसु भी कम पड रहें हैं। किस कदर सादा सच्चा बेखुदगर्ज़ इंसान था। इस…

मुग़ल ए आज़म …के आसिफ़ एवं दिलीप कुमार मधुबाला

कमरुद्दीन आसिफ़ की मुग़ल-ए-आज़म भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर है । सन 1953 में शुरू हुई फिल्म सात वर्षों में बनकर पूरी हुई । फ़िल्म की शूटिंग दौरान परदे के पीछे का एक किस्सा

साहित्य के बाद सिनेमा में उतारे गए बनारस की तस्वीर

काशीनाथ सिंह की कृति ‘काशी का अस्सी’ पर आधारित’ मोहल्ला अस्सी’ को लेकर शुरू से ही उत्सुकता रही थी। ऐसे हालात में जहां पे मुख्यधारा साहित्यिक रचानाओं पर फिल्में बनाने में न के बराबर दिलचस्पी लेती है। वहां पर मोहल्ला अस्सी का बन कर रिलीज़ हो…

कमज़ोर कहे जाने वालों को मज़बूत कहती ज़रूरी फ़िल्म ‘फ़्रिज’

फिल्म बच्चों को केंद्र में रखती है। फ़्रिज में बंद कर दिए बच्चे के ज़रिए कहानी कही गई है। सबकुछ ब्लैक एंड वाईट में। बच्चों को लेकर सम्वेदनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। बच्चों के साथ आमानवीय कृत्यों की खबरें हमेशा बनीं रहती हैं। आए दिन घटती…