Quick Movie Review : अंधाधुन देखने के बाद फिल्मकार विमल की ये टिप्पणी नहीं पढ़ी तो क्या पढ़ा
राघवन का सिनेमा निडर सिनेमा है, अपने क्राफ्ट में डूबा, अपने आसपास के चलन से बेपरवाह सिनेमा।
फ़िल्म तो शानदार है, ये शाम तक हर किसी को हर किसी से पता चल ही जायेगा। और हाँ, आयुष्मान खुराना की उम्दा एक्टिंग के बावजूद ये फ़िल्म पर्दे पर तब्बू की है। लव यू राघवन, लव यू तब्बू, लव यू अंधाधुन
राघवन का सिनेमा निडर सिनेमा है, अपने क्राफ्ट में डूबा, अपने आसपास के चलन से बेपरवाह सिनेमा, तभी ‘बेस्ड ऑन ट्रू स्टोरीज़’ के बॉलीवुडीय भीड़ में ‘अंधाधुन’ फ़ख़्र से अपने वर्क ऑफ फ़िक्शन होने के डिस्क्लेमर के साथ शुरू होती है जहाँ आपका रोमांच फ़िल्मकार की कल्पना की उड़ान इतनी ऊंचाई पा सकता है। लेकिन राघवन का सिनेमा आपको चौंकाने के लिये किसी आउट ऑफ द बॉक्स या लार्जर दैन लाइफ सिचुएशन का निर्माण नहीं करता। उनके किरदार बेहद आम से होते हैं और कहने की ज़रूरत नहीं कि वो अपराध ऐसे अपराध होते हैं जो हमारे आसपास हो रहे होते हैं। राघवन का फिल्मकार हिंसा में ग्लैमर नहीं ढूंढ़ता इसलिए जॉनी गद्दार हो या अंधाधुन, क़त्ल बड़ी सहजता से होते हैं जैसे रोज़ हो रहे हैं। असली बात होती है उस घटना के आसपास का माहौल और उसमें फंसा वो किरदार जो राघवन का बेहद अपना है, जिसका गिल्ट बेहद अपना है। भारत जैसे देश में जहाँ प्रेम कहानियों के बाद हास्य और एक्शन फिल्मों को देखा जाता है और जहाँ थ्रिलर को बहुत मेनस्ट्रीम का दर्ज़ा नहीं हासिल, जहाँ छठे छमाहे कोई उम्दा बिना किसी लोड की थ्रिलर फिल्म देखने को मिलती हो वहाँ श्रीराम राघवन एक ऐसा जीनियस है जिसे जजों की तरह बंगला गाड़ी और उसके पसंदीदा औज़ार देकर शहर से दूर कहीं शांत ख़ूबसूरत वादियों में बसा देना चाहिए ताकि सिनेमा की अदालत में वो ऐसे ही कूल माइंड से हमें अंधाधुन जैसी बेदाग़ रोमांचक कहानियां देते रहें, ख़ूबसूरत किसागोई करते रहें, हमारे किशोरावस्था के रोमांच को बार बार ज़िंदा करते रहें। मैं फ़िलहाल फ़िल्म के बारे में नहीं फ़िल्मकार के बारे में सोच रहा हूँ। फ़िल्म तो शानदार है, ये शाम तक हर किसी को हर किसी से पता चल ही जायेगा। और हाँ, आयुष्मान खुराना की उम्दा एक्टिंग के बावजूद ये फ़िल्म पर्दे पर तब्बू की है। लव यू राघवन, लव यू तब्बू, लव यू अंधाधुन
