तमिल फिल्म कांचना जो साल 2011 में आयी थी उसने कमाल किया था. इसी फिल्म का रीमेक लक्ष्मी लेकर आए हैं अक्षय कुमार जिसने बुरी तरह निराश किया है. सबसे ताज्जुब की बात ये है कि दोनों ही फिल्मों के डायरेक्टर राघव लॉरेंस हैं ऐसे में कहां हो गई चूक चलिए बताते हैं. सबसे बड़ी बात ये शुरू से आखिर तक कहीं मैजिक नहीं दिखा पाती जैसा की कांचना में था. ऐसा लगता है जैसे अपनी फिल्म का हिंदी रीमेक बनाने मे राघव लॉरेन्स ट्रैक से ही भटक गए. सबसे बड़ी परेशानी है इस फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले. दोनों बिलकुल बेदम हैं.
कहानी आसिफ की है जिसने एक हिंदू लड़की रश्मि यानि कियारा आडवाणी से शादी की है. आसिफ का काम है भूत प्रेत बाबाओं के अंधविश्वास से लोगों की आंखें खोलना लेकिन कहानी में सबसे बड़ा झोल यही है कि जब यही आदमी असली भूत और आत्मा के चंगुल में फंसता है तो इसका सारा वजूद फिल्म खा जाती है. सबसे बड़ी हैरानी तब होती है जब ये आत्मा की मदद करने लगता है.यहीं से दर्शक कनफ्यूज हो जाता है कि असल में ये फिल्म कहना क्या चाहती है. फिल्म का सबसे बढ़िया पहलु है बैकस्टोरी जो कि लक्ष्मी नाम के किन्नर की है. इस भूमिका में अक्षय से ज्यादा प्रभावशाली लगे हैं शरद केलकर. वो कम समय के लिए स्क्रीन पर आते हैं लेकिन दर्शकों का दिल जीत लेते हैं. क्लाईमैक्स की इंटेसिटी फिल्म को थोड़ा सहारा देती है लेकिन पूरी फिल्म इतनी गलतियो और बेकार के प्लॉट से भरी पड़ी है कि आप फिल्न को माफ नहीं कर पाते. इन दो किरदारों के अलावा कोई भी किरदार ठीक से लिखा तक नहीं गया है. कियारा तो बिलकुल नकली और बेमन से एक्टिंग करती नजर आती हैं. हमारी सलाह यही होगी कि इस फिल्म पर ढाई घंटे बरबाद मत कीजिए.
रेटिंग – 2/5
