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खनकती कनिका कपूर की आवाज़ का सफ़र

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सवाल- आपकी आवाज़ का असर कमाल का है…ये कनकती आवाज़ का संगीत से कनेक्शन कब कैसे हुआ…

जवाब- मेरे गुरुजी लेट पंडित गणेश प्रसाद मिश्रा जी मेरे चाचा को सीखाने आते थे..मैं लखनऊ की हूं महानगर में हम रहते थे…मैं वहां बैठती थी..उस संगीत की क्लास में..दो साल तक मैं बराबर बस हर रविवार जब वो संगीत की ट्यूशन के लिए आते तो मैं बैठ के उनकी शिक्षाओं को सुनती थी..जब मैं 8 बरस की हुई तो उन्होने मुझे सीखाना शुरु किया..मेरा परिवार भी संगीत सुनना पसंद करता थाा जबकि मेरे पिता बिजनेसमैन हैं..और हम अभी भी ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं। तो वहां से शुरु हुआ….12 साल मैने अपने गुरुजी से सीखा..उन्होने मुझे बहुत मेहनत से सीखाया..स्कूल के बाद संगीत फिर पढ़ाई वाली ट्यूशन..दो दो घंटे रोज सीखती थी..मैने और कुछ किया नहीं संगीत पर फोकस हुई…मैं जो कुछ हूं उनकी वजह से हूं।

सवाल- अनूप जलोटा आपके पहले मेंटोर कैसे बने.

जवाब- अनूप जलोटा मेरे पापा के दोस्त थे..वो भी लखनऊ से हैं..13 साल के होने पर उन्होने मुझे काफी सीखाया..उनके स्टेज शोज का हिस्सा बनी तो स्टेज वाली हिचक जाती रही..उनके मार्गदर्शन में मैने उनके साथ स्टेज पर क्लासिकल 15 मिनट साझा किया जिसने मुझे काफी आत्मविश्वास दिया। धीरे धीरे ही सब कुछ हुआ…एक दिन में कामयाबी नहीं मिलती..बहुत मेहनत लगती है।

सवाल- आप 18 साल की उम्र में लंदन क्यों चलीं गयीं..

जवाब- जब मैं लखनऊ से लंदन शादी करके गयी तो मेरी उम्र 18 से थोड़ी ज्यादा थी….उस वक्त परिवार और नयी जिम्मेदारियों ने मेरा रियाज रोक दिया लेकिन एक लिहाज से ये ठीक हुआ क्योकि मेरी आवाज़ तब तैयार नहीं थी..कच्ची कच्ची सी आवाज़..पूरी खड़ी आवाज़ थी जो इस ब्रेक की वजह से मिड रेंज में आ गयी।

सवाल- लखनऊ से लंदन..खालिस क्लासिकल..उर्दू से पूरा इंगलिश कल्चर..मुश्किल हुई वहां.

जवाब- मैं आपको अब एक मजेदार बात बताती हूं..जैसा आप कह रहे हैं मेरे दिमाग में भी लंदन को लेकर वही सवाल थे…लेकिन मैं काफी हैरान रह गयी..लंदन की एक तरह से यूनिवर्सल लैंग्वेज पंजाबी ही है..सारे पाकिस्तानी..पंजाबी यहां तक की टैक्सी ड्राइवर जो इंडियन एरियाज में होते हैं वो सभी पंजाबी में बात करते हैं और मुझे पंजाबी में सिर्फ इतना आता था..अस्सी तुस्सी फस्सी (हंसते हुए)..तो सुनते सुनते मुझे पंजाबी सुननी आ गयी और मैने जो पहला गाना गाया या जिसका एलबम बनाया..वो जुगनी जी था.,,और मुझे इसका मतलब नहीं पता था मगर मैने उसका कवर वर्जन बनाया और वो काफी कामयाब हो गया..और उसके बाद आजतक मुझे ज्यादातर पंजाबी गाने ही मिलते हैं। यहां तक की जब बेबी डॉल के लिए बुलाया गया तो मैं ये दुनिया पित्तल दी की जगह पीतल दी बार बार बोलती थी..काफी प्रैक्टिस के बाद पित्तल बोल पायी..

सवाल- बेबी डॉल हो या बाकी के आपके डांस नंबर्स सभी में मीट ब्रदर्स का साथ रहा..उन्हे कैसे जानती हैं..

जवाब- वो दोनों मेरे भाई है समझ लीजिए..वो दोनों मेरे भाई के साथ ग्वालियर में सिंधिया बोर्डिंग स्कूल में पढ़े थे..वो सब आते थे और वो भी मेरे साथ गाते थे..सबसे पहले मैने उन्ही के साथ परफॉर्म किया था..हमने साथ में गज़ल गायी थी..सलोना सा सजन वो गजल गायी थी।

सवाल- जिन्दगी में आप पर जिम्मेदारियां कम नहीं रहीं लेकिन कैसे मैनेज किया क्योंकि 25 साल की उम्र से पहले आपके तीन बच्चे भी हो गये थे।

जवाब- जैसे शाहरुख खान का डायलॉग है…कि अगर आप किसी चीज को दिल से चाहते हैं तो पूरी कायनात आपको उससे मिलवाती है..मेरे साथ वैसे हुआ…उसी बीच मेरा मेरे पति से सेपरेशन भी हो गया.तो संगीत को एक ऑप्शन के तौर पर चुना फिर जुगनी जी गाया और उसे सुनकर एकता कपूर के ऑफिस से कॉल आया और सब होता चला गया। मेरे पिता और मेरे बच्चों के सपोर्ट के बिना ये सब नहीं हो पाता । पहला शो आईपीएल में किया..शाहरुख और दीपिका के लिए..सब मेहनत का फल है।

सवाल- म्यूजिक के अलावा क्या कर रही हैं

जवाब- बड़ा शानदार सवाल है(हंसते हुए)..मैं वाकई म्यूजिक के अलावा भी एक क्रियेटिव काम कर रहीं हू..अपनी मां के लखनऊ चिकनकारी में फैशन का ब्लेंड करने जा रहीं हूं…मेरी मां ने पच्चीस साल पहले कलाकृति नाम से चैरिटी शुरु की थी..100 से ज्यादा औरतों की मदद के लिए मैं भी इस चैरिटी का हिस्सा हो रहीं हूं।

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