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JABARIYA JODI REVIEW : नाम जैसी ही जबरिया पिक्चर !

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फिल्म जबरिया जोड़ी में हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिनीति चोपड़ा, संजय मिश्रा, अपारशक्ति खुराना, जावेद जाफरी, चंदन राय सान्याल और बाकी के और भी किरदार..फिल्म के निर्देशक हैं प्रशान्त सिंह और फिल्म को लिखा है संजीव के झा ने जबकि एडिशनल डायलॉग्स पर काम किया है नीरज सिंह और राज शांडिल्य ने। फिल्म के निर्माता हैं शैलेश सिंह जिन्होने एकता कपूर की बालाजी मोशन पिक्चर्स के साथ मिलकर इसे बनाया है।

जबरिया जोड़ी को लेकर मेरी पहली राय..ये अपने नाम के मुताबिक ही जबरदस्ती की बनाई फिल्म है..जहां एक वक्त के बाद कुछ भी नैचुरल नहीं लगता सब कुछ जबरिया ही नजर आता है..
फिल्म की कहानी बिहार के बाहुबली अभय सिंह यानि सिद्धार्थ मल्होत्रा और उनके कथित लव इंट्रेस्ट बबली यादव की है..अभय सिंह बढ़िया नौकरी वाले दुल्हे को किडनैप कर उन घरों की लड़कियों से शादियां कराते हैं जिनका प्रस्ताव दहेज कम मिलने के कारण ठुकरा दिया गया है..इसी दौरान उनकी मुठभेड़ होती है उनके बचपन के इश्क बबली यानि परिनीति चोपड़ा से..शुरु में दोनों एक दूसरे को चाहते हैं लेकिन बाद में अभय सिंह को बबली नहीं पसंद आतीं और जब अभय को बबली पसंद आती हैं तो बबली अभय से किनारा कर लेती है..इन सबके बीच पकड़ुआ शादी का बिजनेस चलता रहता है जिसमें बाहुबली अभय सिंह पिता हुकुम देव सिंह यानी जावेद जाफरी के हिसाब से काम करता है। तो कुल मिलाकर यही कन्फ्यूज सी कहानी है जबरिया जोड़ी की जो अपने सब्जेक्ट से ही न्याय नहीं कर पाती..फिल्म में वन लाइनर्स और पंच अच्छे हैं लेकिन सिर्फ ऐसे डायलॉग्स से तो पिक्चर नहीं चलाई जा सकती इसलिए फिल्म इंटरवल के बाद झेलना मुश्किल हो जाता है..
एक्टिंग की बात करें तो लीड पेयर को छोड़कर सभी ने बेहतरीन काम किया है..खासकर परिणीति के पिता दुनियालाल के रोल में संजय मिश्रा महफिल लूट गए हैं…साथ ही उनके दोस्त पाठक जी के किरदार में नीरज सूद की कॉमिक टाइमिंग ऐसी है कि आप उन्हे बार बार परदे पर देखना पसंद करते हैं। इसके अलावा अपारशक्ति खुराना का काम भी बढ़िया है हालांकि वो टाइपकास्ट हो गए हैं..चंदर राय सान्याल ने अच्छी एक्टिंग की है लेकिन वो कई जगह लाउड हुए हैं..मगर सिद्धार्थ मल्होत्रा की बात की जाए तो वो पूरी तरह कन्फ्यूज नजर आए..उनका किरदार इस तरह है कि उसे समझ ही नहीं आता कि वो गुस्सा हो या नरमी दिखाए..पूरी तरह आधा पका हुआ रोल है उनका । वहीं परिणीति की कॉमेडी अच्छी है और वो बिहारी टोन में बोलते हुए क्यूट भी लगेंगी लेकिन उनके कपड़े और अंदाज पूरा मिसमैच नजर आया..
डायरेक्शन की बात करें दिक्कत इस फिल्म के डायरेक्शन में ही है..फिल्म सेट है बिहार में लेकिन शूटिंग लोकेशन लखनऊ की है वो भी ऐसी जगहें जो जानी पहचानी है..देसी गानों पर विदेशी मॉडल को नचाया गया है..और फिल्म का सेटअप ही जंचता नहीं..2 घंटे 24 मिनट की फिल्म बहुत आगे जा पाएगी इसमें शक है। फिल्म का मेरी तरफ से पांच में 2 स्टार्स।

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