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Interview Taapsee Pannu : ‘अगर किसी से जम नहीं रही तो निकलों वहां से’

Taapsee Pannu अपनी आने वाली फिल्म थप्पड़ के प्रमोशन में व्यस्त हैं..हाल ही में फिल्म की कुछ स्क्रीनिंग हुईं जिसमें फिल्म का काफी वाहवाही मिली..फिल्म पर उनसे खास बातचीत की हमारी संवाददाता अदिति गुप्ता ने।

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रिपोर्टर- जब से फ़ोग का चलना बंद हुआ है तबसे आप ही चल रही है कहाँ से लाती हैं आप इतनी एनर्जी, डेडिकेशन?
तापसी पन्नू- (हसंते हुए) क्योंकि अच्छी स्क्रिप्ट्स आ रही है और मैं बहुत लालची हूँ । मेरे पास कोई भी अच्छी स्क्रिप्ट आती है तो मैं उसे रूमाल की तरह लेकर बैठ जाती हूं और फिर उसे कहीं जाने नहीं देती और मेरा मानना ऐसा है कि मैं अच्छी स्क्रिप्ट अपने हाथ से निकलने नहीं दूंगी चाहे मुझे साल में छह पिक्चरें करनी पड़े । अपना तो क्लियर है अच्छी स्क्रिप्ट अपने हाथ से निकलने नहीं देनी है …और मेरा ये जो लालच है ना उसकी वजह से काम चलता ही जा रहा है ।

रिपोर्टर- कभी किसी की स्क्रिप्ट आपने छीन कर ली है ?
तापसी पन्नू- छीन के नहीं ली, पर हां एक बार एक स्क्रिप्ट थी जिसको लेकर मुझे बोला गया ये फिल्म मुझे करनी है …और ये भी बोला की मुझे फिल्म की कहानी सुनाएंगे … पर उसके बाद हुआ क्या मुझे तो सुनायी नहीं फिल्म की कहानी पर पीछे से किसी ओर को सुना दी कहानी … पर मुझे बाद में पता लगा कि जिन लोगों को कहानी सुनायी थी उन लोगों ने ‘किसी ओर के साथ काम कर रहे है बोलकर सॉरी बोल दिया’ । मुझे लगा ठीक है भई अब इसमें क्या कर सकते है पर बाद में पता लगा किसी ने भी वो पिक्चर नहीं कि …फिर वोही लोग एंड में सबके पास घूमकर आ गए मेरे पास … मुझे लगा स्क्रिप्ट अच्छी है और मुझे करनी चाहिए तो मैंने हां बोल दी ।

रिपोर्टर- तापसी जी एक फ़िल्म से दूसरी फ़िल्म में जाना कितना अलग और तक़लीफ भरा होता है ?
तापसी पन्नू- एक हफ़्ते तक का समय लगता है भई एक फिल्म से दूसरी फिल्म में जाना … मुझे पहले बहुत प्रॉब्लम होती थी…’पिंक’ के बाद ‘नाम शबाना’ और फिर उसके बाद ‘हैंगओवर’ इतना आसान नहीं होता …बहुत मुश्किल होती है …पर मैंने इससे निकलने का एक तरीका निकाला है … एक फिल्म करो और फिर बोरिया बिस्तर बाँधों और एक हफ्ते के लिए कहीं बाहर चले जाओ । कभी अपनी बहन के साथ कभी दोस्तों के साथ और साथ में डिस्क्लेमर की इस एक हफ्ते में किसी फिल्म को लेकर बात नहीं होगी । और फिर वापस आऊँगी और अगली फिल्म पर काम शुरू …मैंने क्रैक कर लिया की एक फ़िल्म से दूसरी फ़िल्म में कैसे जाना है ।

रिपोर्टर- ‘थप्पड़’ की बात करे तो उसकी स्टोरी की ‘वन लाइन’ आपकी है?
तापसी पन्नू- ‘वन लाइन’ तो अनुभव सर की है और मैंने उनको बोला था कि मुझे डोमेस्टिक वायलेंस सब्जेक्ट पर पिच्चर करनी है तो सर ने कहा था कि उनके पास ‘एक आइडिया है मैं उसको डेवलप करता हूँ फिर मिलते हैं’ ये बातें हुई थी मुल्क के प्रमोशन के वक़्त पर उस समय वो ‘आर्टिकल 15’ शूट करके आए थे । और फिर कुछ ही दिनों में उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट पकड़ा दी और कहा ‘ये मैंने लिखी है अब तू पढ़ के देख ले’ मुझे तो फिल्म करनी ही थी …खैर कहानी की बात करें तो उन्होंने ज़्यादा ज़ोर डोमेस्टिक वायलेंस पर नहीं दिया उन्होंने डोमेस्टिक वायलेंस को ट्रिगर के तरीक़े से यूज़ किया है इसके बाद और बहुत सारा पिटारा खुलता है….सवालों का । मुझे लगता है इस तरीके की फिल्म को पहले कभी नहीं देखा गया है । फिल्म देखने के बाद लोगों के मन में बहुत सारे सवाल उठेंगे । मेरा बहुत मन था इस मुद्दे फिल्म करने का बात करने का ।

रिपोर्टर- तापसी लोग ‘थप्पड़’ को एक सीख की तरह लेते है … लोग सोचते है कि ‘थप्पड़’ एक सीख होती है …कि थप्पड़ लगने के बाद कि मैं अब ऐसा नहीं करूँगा । आप बताएं आपकी ज़िंदगी में ऐसी कोई सीख जो आपको ऐसे मिली हो ?
तापसी पन्नू- पहली बात आपको किसने बोला थप्पड़ एक सीख होती है ये बात एक दम गलत है कि थप्पड़ एक सीख होती है…हम लोगों के मन में ये बात एकदम गलत बिठाई गई है कि थप्पड़ लगने के बाद ही सीख मिलती है … बचपन से मुझे लगता था की ये एक प्रॉब्लम है । मां बाप को लगता है कि अगर बच्चा गलती करे तो एक थप्पड़ मार दो या बच्चे को पहले ही डरा दो कि अगर कोई गलती की तो एक थप्पड़ लगेगा । फिर क्या होता है बच्चों को भी लगने लगता है कि ये एक तरीका होता है बात समझाने का …मां-बाप मार रहे है कुछ सिखाने के लिए मेरा अच्छा चाहते है…तभी मुझे गलती पर मारते है … और इतने क्लोज रिलेशनशिप में मारामारी चलती और ये तरीका प्यार का तरीका होता है । फिर क्या होता है वो बच्चा बड़ा होता है ..तो वो भी सेम ऐसे ही करता है.. अगर उसके बच्चें या वाइफ कोई गलती करते हैं तो वो भी ऐसे ही करता है ..अपनी बीवी और बच्चों को थप्पड़ मारकर समझाता है क्योंकि उसको लगता है कि ये ही सही तरीका है …उसके मां बाप ने भी उसके ऐसे ही समझाया था …प्यार में ऐसे ही समझाया जाता है…तो जड़ यहीं से बन जाती है…किसी को थप्पड़ मारने चीजें सही नहीं होती ये एक वायलेंस है जो बिल्कुल गलत है ।

रिपोर्टर- आपको क्या लगता है ..सही तरीक़ा क्या है…क्या करना चाहिए इसके लिए ?
तापसी पन्नू- देखो किसी से अगर रजामंदी नहीं हो रही है किसी बात पे ग़ुस्सा आ रहा है…बैठो बात करो जैसे मर्ज़ी बात करनी है बात करो उसको समझाने की कोशिश करो…अगर नहीं हो रहा है, नहीं जम रहा है तो निकलो वहाँ से । वैसे मेरा मानना है कि अगर आपको किसी के साथ पूरी ज़िंदगी बितानी है और आपको सामने वाले इंसान के साथ अपनी जिंदगी समझ नहीं आ रही है तो आप क्या पूरी ज़िंदगी लड़ते रहोगे…एक ज़िंदगी है वो बहुत छोटी है…उस में भी आप अंदर ही अंदर रोज कूटो, मर मर के जियो, लड़ाइयां करो…ये भी सही नहीं है …अब सहन करने की ज़रूरत नहीं है या तो रिस्पेक्ट करो या तो मत रहो रिलेशनशिप में ।

रिपोर्टर- फ़िल्म की कहानी और मैसेज के बारे में
तापसी पन्नू- फ़िल्म के अंदर एक कहानी दिखाई है….ये एक लड़की की कहानी है और इस फ़िल्म के अंदर आठ औरतें हैं …अलग-अलग आयु की … 13 साल की लड़की से लेकर तन्वी मैडम की आयु के औरतें …सब आठ लड़कियाँ हैं पर सबका अलग अलग ग्राफ़ है लेकिन सबकी कहानी मेरी कहानी से जुड़ी हुई है अब मेरे साथ जो ये हादसा होता है क्योंकि ये सबके सामने होता है …. मेरे जो रीएक्शन होते हैं इस थप्पड़ के बाद तो वो उनकी ज़िंदगी में क्या होता है और ये सब मुझे क्या सीख दे रहे होते हैं मेरे रिएक्शन की वजह से क्या बदलाव आता है वो कहानी की तरह दिखाया गया है । इसमें कोई कोर्टरूम सीन या कोई भाषणबाज़ी नहीं हो रही कि ऐसा करना चाहिए या वैसे करना चाहिए । आपको अमृता की कहानी दिखेगी कि वो क्या करती है इसके बाद ।

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