Interview Chunky Pandey : ‘छोटे बच्चे जब कहते कि सुना आप हीरो थे किसी जमाने में तो बुरा लगता था”
Chunky Panday ने नब्बे के दशक में फिल्म आंखें से सफलता का स्वाद चखा लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वो बॉलीवुड में नहीं बना पाये वो मुकाम जो वो चाहते थे..उनसे खास बातचीत की हमारे संवाददाता शौनक जैन ने..बातचीत का ब्यौरा पेश कर रहीं हैं अदिति गुप्ता.
रिपोर्टर – Chunky साहो जैसी बड़ी फिल्म और आप उसमे विलेन कैसा लगा आपको ये नया अनुभव ?
चंकी – कभी सोचा नहीं था कि मैं विलेन बनूंगा लेकिन जब हमारे डायरेक्टरने मेरी एक फिल्म बेगम जान देखी जिसमें मैं विद्या बालन जी के साथ खतरनाक कैरेकटर में था , और उसमें मेरा लुक 1847 का मॉस पीरियड लुंगी,धोती, बनयान, काले बाल थे। ये सब डायरेक्टर को जंच गया..वो आए और मेरे को बोले यार एक फिल्म बना रहा हूं काफी स्टाईलाइज फिल्म है और मै आपको विलेन के तौर पर देखता हूं उसमें..उन्होंने दो सीन सुनाये मुझे एक सीन जहां वो अपने बाप का गला पकड़ लेता है और दूसरा जो प्रभास के साथ करना है..मैने बोला बस मुझे और मत सुनाओ मैं ये फिल्म कर रहा हूं तब मुझे समझ में आया कि बाकी सब कैरेक्टर जो फिल्म में है सब ग्रे कैरेक्टर है और जो फुल डार्क कैरेक्टर है यही है , यानि देवराज का कैरेक्टर है। हालांकि मै थोड़ा घबरा गया था क्योंकि प्रभास बाहुबली के साथ मै कुछ करने वाला हूं तो थोड़ा सा डर लग रहा था क्योंकि बॉडी इतनी सॉलिड है उनकी और वो 6″5 फुट का है मैं उससे बहुत छोटा हूं और यह कैसे क्रैश कैसा दिखने वाला है, डायरेक्टर ने बोला आप डरो मत मैं आपको समझा दूंगा सब कुछ, उसमे हम सब संभाल लेंगे लेकिन पब्लिक का इतना शानदार रिएक्शन होगा कभी सोचा नहीं था.
रिपोर्टर – इंडस्ट्री के दोस्तों से क्या रिएक्शन मिला चंकी पांडेय द विलेन के लिए ?
चंकी- क्या है लोग चंकी पांडेय को विलेन के रूप में नहीं देख रहे है ..वो आखरी पास्ता के रूप में विलेन देख रहे है, चंकी पांडेय ने बेगम जान भी की है लेकिन लोग भूल गए हैं । सभी के दिमाग में आखरी पास्ता हमेशा रहता है. जैसे कि 5 साल का बच्चा हमारे दिल में रहता है । किसी ने विश्वास नही किया कि साहो में यह काम आखरी पास्ता ने किया है। वास्तव में यह चंकी पांडेय ही है तो इंडस्ट्री का रिएक्शन बहुत अच्छा था। मुझे शक्ति कपूर जी का कॉल आया उन्होंने पिक्चर देखी ..जाहिर सी बात है श्रद्धा की वजह से देखी होगी मूवी.. थिएटर से निकल के कॉल किया और कहा मेरे करियर की शुरुआत उनके साथ हुई है.. मेरा पहला शूट मेरी ज़िंदगी का मेरा और शक्ति जी की फाइट थी.. यह 1987 की बात है। उन्होंने बोला “चंकी मुझे तुम पर गर्व है मुझे यकीन नहीं हो रहा कि तूने ऐसा काम किया की मै खुद डर गया पिक्चर देखते वक्त और मेरी वाइफ भी डर गयी जब भी तू स्क्रीन पे आता ऐसा लग रहा था मैंने इतने बड़े विलेन को डरा दिया ..मै तो सुपर विलेन बन गया हूं ये सुनकर.. मुझे लगा कि मैंने गंगा नहा लिया ..बेस्ट कॉम्पलिमेंट स्पेशल्ली अगर इंडस्ट्री के लोगो से आये तो पर जो ऑडियंस रिएक्शन मिला है वो यकीन से परे है।
रिपोर्टर –.22 साल बीत गए हैं , आप फिल्मो मेँ कैसे आए और शुरुआत कैसे हुई ?
चंकी- बहुत पुरानी कहानी है जब मुझे पहली फिल्म मिली थी तब मेरी लाइफ चेंज हो गई। कॉलेज के बाद मैंने निर्णय लिया कि चलो कुछ करते हैं जैसे कोई तरय करता है फिल्म के लिए हम भी तब वही करते थे ,एक्टिंग ,डांसिंग ,ऑडिशनिंग,मैंने मॉडलिंग शुरू की थी कमाने के लिए.. बीच में कोई धंधा भी शुरू किया था गाड़ियां बेचता था ..फैमिली को सहारा देने के लिए करना पड़ता था। कॉलेज से निकलने कई बाद कुछ तो काम करना पड़ेगा तो ये सोचने में मुझे तीन साल लगे.. मैंने बीच में ,रामायण ,महाभारत,इन सभी टीवी शो के लिए ऑडिशन दिया था और मूवीज के लिए भी ऑडिशन दिया पर फिल्म नहीं मिल रही थी । ,मॉडलिंग का काम मिल रहा था।एक दिन की बात है कि एक होटल गया था मैं किसी की शादी में.. कुरता पहना था उस दिन.. अमिताभ जी भी चूड़ीदार पहनते थे तौ मेैं भी पहना था । सभी उनके जबरदस्त फैन थे..वहां उस फंक्शन में बीयर पी ली थी ज्यादा..मेरी एक प्रॉब्लम है मैं नाड़ा बांध सकता पर हूं पर खोल नहीं सकता…तो मैं खड़ा चिल्ला रहा था जोर जोर से क्योंकि पी ली थी..सभी मुझे देख रहे थे कि यार क्या क्या बोल रहा है यह आदमी। एक आदमी ने बोला चल मैं तेरी मदद करता हूं.. उन्होंने मेरा नाडा खोला और फिर हमारी बातें शुरू हो गईं.. उनको मैनेे बताया कि मैं मॉडलिंग एक्टिंग करता हूं..उन्होने कहा मैं प्रोडूसर हूं.. मैंने फिल्म बनाई है गोविंदा के साथ ..उन्होंने बोला एक काम कर तू फिल्म करना चाहता है तो दाढ़ी बढ़ा..मैं अमेरिका 1 महीने के लिए जा रहा हूं..आने पर पिक्चर शुरू करूँगा ..फिर वो चले गए..मैने दाढ़ी बड़ी करना स्टार्ट कर दिया.. मेरी माँ सोची क्या हो गया बेटे को..डिप्रेशन हो गया क्या या काम नहीं मिल रहा। फिर अमेरिका से जिस दिन वो पहुंचे मेरी माँ ने मेरे को कहा चंकी तेरा मुहूर्त हैं फिल्म वाले स्टूडियो में.. मैंने बोला हां..चो हासी ऐसा बोल के एक आदमी गया है..फिर मम्मी भड़क गई कि बताया क्यों नहीं.. मै फिर गया सर के पास सर मुहूर्त फिक्स हो गया मैंने बोला था न एक खुशखबरी है.. तेरा नाम चंकी ही रहेगा…..तो ऐसे मेरा करियर शुरू हुआ ..मैं सभी से ये कहना चाहता हूं कि आपको हेल्प कहाँ से मिलती है पता नहीं चलता ..अपनी बेटी तक को बोलता हूं किसी को भी अंडरएस्टिमेट मत करो और न ही ओवरऐस्टीमेट। ओवरऐस्टीमेट बहुत बुरी चीज़ होती हैं.. हम सोचते हैं इसने उसकी लाइफ बनाई है तो मेरी लाइफ भी बनाएगा । लेकिन ऐसा नहीं है.. किसी को क्या पता यह फ्राइडे का ही सबकुछ खेल है.. यह बहुत खूबसूरत इंडस्ट्री है।

रिपोर्टर – सर आप जहा पर हैं, एक अच्छे मुकाम पर हैं और आपने बीच मे बांग्लदेशी फिल्मो में भी काम किया.. क्या लगता है आपको अगर आप वहां नहीं गए होते तो और अच्छे मुकाम पर आज होते ?
चंकी- मेरे साथ क्या हुआ वो बताता हूं.. 1993 में आंखें जैसी इतनी बड़ी हिट देने के बाद भी मेरे पास काम नहीं था ..उसके बाद एक ही फिल्म मिली थी मुझे तीसरा कौन..मैं एक साल घर बैठा मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं.. मैं कभी डिप्रेस नहीं हुआ.. अलग अलग व्यापार खोला , इवेंट मैनजमेंट कम्पनी , रेस्टोरेंट खोला तब मुझे बांग्लादेश में मौका मिला ..वहां की फिल्म की ..सुपरहिट रही फिल्में.. तो मैं वहां बस गया.. पर आप जो बोल रहे हैं सही बोल रहे हैं क्योंकि जब 1998 में मेरी शादी हुई तो मैं अपनी बीवी को बांग्लादेश हनीमून पर लेकर गया ..तब भी मैं काम कर रहा था.. टाइम नहीं था हनीमून का भी.. तो उसने कहा तुम यहां बड़े स्टार बन गए हो लेकिन पहचान बॉलीवुड की है.. तुम्हे लोग बॉलीवुड की वजह से जानते हैं.. तूम अपनी जड़ें भूल रहे हो.. वापस आना होगा तुम्हें..यहां अपनी ज़िन्दगी नहीं बना सकते.. फिर मैं वापस आया ..7 साल हो गया करीबन वनवास के बाद ,लोग भूल गए थे मुझे एक जनरेशन भूल गई थी.. मुझे छोटे बच्चे आकर पूछते थे सुना है आप हीरो हुआ करते थे.. फील होता था तब.. भाई एक जमाना था लोग भागते थे पीछे पीछे ऑफिस में जाकर काम मांगना पड़ा मुझे फिर वो भी दौर देखा है..
रिपोर्टर – अनन्या से कितना इम्प्रेस हैं आप ?
चंकी- उसने तो कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस कर दिया है.. मेरा एक ही डर था जब अनन्या आने वाली थी कि अनन्या एक्सेप्ट होगी की नहीं.. भले वो मेरी बेटी है मग़र यह मुमकिन नहीं है कि वो स्वीकार हो जाए क्योंकि हमारी ऑडियंस हिंदुतानी ऑडियंस वो बहुत ज़रूरी है की वो आपको अपना ले ..यह हमारा हीरो है.. यह हीरोइन है.डर था कि क्या होने वाला है मेरे बच्चे का.. वैसे ही कितना कुछ हो आ रहा था उसके आने के वक्त नेपोटिस्म `और सब दो हीरोइएन सब्जेक्ट दिक्कत होगी ऐसा सबको लगता था..यह लड़की जो मेरी बेटी है २० साल से जानता हूं..फिल्म देखी तो हैरान रह गया कि इसने श्रेया का कैरक्टर ढूंढा कहां से क्योंकि यह अनन्या नहीं है जो मैं देख रहा था तो जो उसने पफॉर्म किया है वो है ही नहीं एैसी और इसने पहली फिल्म की.. फिर मैने अपनी बीवी वो बोला क्या मस्त किया अपनी बेटी ने.. चल जाएगी ये..मस्त किया है मैं इम्प्रेस हो गया था।
