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एक्सट्रैक्शन मूवी रिव्यू : हिंदी गाने, हिंदी एक्टर और ढेर सारा एक्शन

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सबसे पहले थैंक्स!
किसी फिल्म के बारे में लिखते हुए आम तौर पर लोग उसकी खूबियों खामियों के बारे में बहुत सी बातें करते हैं…पर वो चीजें अलग दौर में होती थीं…अब दौर बदल गया है…कोरोना महामारी में दुनिया अपने घरों में सिमट गई है…जिसके चलते कोई नई फिल्म रिलीज नहीं हो रही है…तमाम फिल्मों की रिलीज डेट अगले 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दी गई है….और ऐसे दौर में आपको एक्शन का भरपूर डोज एक्सट्रैक्शन मूवी में मिल रहा है….तो एक थैंक्स तो बनता है जो रुस्सो, एंथनी रुस्सो..क्रिस हेम्सवर्थ (द थॉर) और रणदीप हुडा के लिए…

इतने सारे हिंदी गाने
फिल्म में एक्शन का पहला तड़का जहां लगता है वहीं से एक दिलचस्प वाकया भी शुरू होता है…हिंदी गानों का…जो रुस्सो ने कोई कसर नहीं छोड़ी है भारतीय दर्शकों को खींचने की…लेकिन ये थोड़ा कन्फ्यूजिंग है कि ढाका के कॉक्स बाजार की तंग गलियों में बने अपार्टमेंट में रहने वाले तमाम बांग्लादेशी सिर्फ और सिर्फ हिंदी गाने सुनते हैं…पहला गाना जो सुनाई देता है वो है..’लड़का कमाल…अंखियों से गोली मारे’ इसी के कुछ सेकेंड बाद ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ और कुछ ही मिनट बाद ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ और ‘मेंहदी लगा के रखना’ गाने की एक झलक आप सुन सकते हैं…यकीन मानिए, मैं ‘मेंहदी लगा के रखना’ गाना सुनते ही हंस पड़ा था….सच में ये कुछ ज्यादा हो रहा था…फिर भी अच्छा लगा….फिल्म के ही एक सीन में बाग्ला भाषा में रैप चल रहा था जिसका सब टाइटल ने ये बता रहा था कि ‘हिंदी रैप सॉन्ग प्लेइंग ओवर स्टीरियो’…


क्या कहानी है फिल्म की ?
अब बात फिल्म की कहानी की…कहानी थोड़ी उलझाने वाली है…कि आखिर दो देशों के सबसे बड़े ड्रग माफिया के बीच किस बात की दुश्मनी है…लेकिन फिर भी दुश्मनी तो है ही…भारतीय डॉन का बेटा किडनैप हो जाता है…जो कि ढाका में उसे वापस लाने के लिए टायलर या कि क्रिस हैम्सवर्थ की टीम को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है और दूसरी तरफ रणदीप हुडा को भी बच्चे को वापस लाने का टास्क दिया जाता है….बाकी बातें बताने से फिल्म देखने का मजा किरकिरा हो सकता है…

छा गए रणदीप हुडा
फिल्म देखते वक्त सुकून वाली बात ये थी कि रणदीप हुडा का एक्शन किसी भी मामले में टायलर यानि कि क्रिस हैम्सवर्थ से कम नहीं था…दोनों के बीच हैंड टू हैंड कॉम्बैक्ट भी अच्छे से फिल्माया गया है….दोनों ही एक्टर्स के एक्शन सीन काफी मजेदार हैं…एक सीन के दौरान लड़ते हुए रणदीप हुडा की MP5 की बुलेट्स खत्म हो जाती हैं और बांग्लादेशी स्वाट का एक कमांडो उनसे लड़ता रहता है…उस ऐक्शन सीन में लड़ते हुए गन को रीलोड करना और शूट करता हुए देख कर जॉन विक की याद आ जाती है…फिल्म की अधिकतर गन फाइट जॉन विक से प्रभावित लगती है…पर कॉपी नहीं…बिल्कुल भी कॉपी नहीं…

छोटी-छोटी मगर मोटी बातें…
दिलचस्प बात ये है कि बांग्लादेश की पुलिस बहुत एडवांस दिखाई गई…लेकिन उनकी ट्रेनिंग बहुत घटिया है…स्पेशल फोर्स के सिर्फ दो कमांडों ने बांग्लादेश की स्वाट और मिलिट्री कमांडो को नेस्तनाबूत कर दिया…एक इंट्रेस्टिंग फैक्ट ये भी है कि पहले इस फिल्म का नाम ढाका ही था…लेकिन वो बस एक विकल्प था…बाकी अब फिल्म एक्सट्रैक्शन के नाम से रिलीज हुई है…फिल्म में भारतीय कलाकारों को भरपूर मौका मिला है….पंकज त्रिपाठी को छोड़कर…पंकज त्रिपाठी को आप जितने देर फिल्म के ट्रेलर में देखते हैं उससे कुछ सेकेंड ज्यादा के ही उनके सीन हैं…रणदीप हुडा को पूरा मौका मिला है…क्लाइमेक्स के फाइट सीन में रणदीप में गजब का ऐक्शन दिखाया है….

तो क्या करें…. देख लें फिल्म ?

फिल्म एक्शन के मामले में बेहद मजबूत है…लेकिन कहानी की प्लॉट कन्फ्यूज करता है…फिर भी ऐक्शट्रैक्शन लॉकडाउन के इस दौर में मनोरंजन का भरपूर डोज है…फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है…आपने नहीं देखी तो देख लीजिए…मजा आएगा…और नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन नहीं है तो दोस्त से मांग लो…और करो लॉक डाउन में चिलैक्स…

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