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पंकज त्रिपाठी जिस शख्स की भूमिका कर रहे हैं वो कोई आसान आदमी नहीं है

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खबर पक्की है कि मसान, स्त्री , न्यूटन और हालिया वेबसीरीज़ मिर्जापुर में अपने एक्टिंग से आम दर्शकों की आंखों का तारा बन चुके पंकज त्रिपाठी कबीर खान की फिल्म 83 में मैनेजर मान सिंह की भूमिका निभाने जा रहे हैं। 1983 के एतिहासिक विश्व कप टूर में भारतीय टीम के मैनेजर रहे पीआर मान सिंह ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में उस दौर को याद करते हुए कहा था कि अजीब निराशा भरा माहौल था देश में..यहां तक कि बीसीसीआई भी ये मान बैठी थी कि भारतीय टीम बस हार कर वापस लौटने की औपचारिकता निभाने जा रही है….वो गलत भी नहीं थी 1975 और 1979 के विश्व कप में हमारा प्रदर्शन याद रखने के काबिल नहीं था…..मगर चूंकि भारत आईसीसी का एक सम्मानित सदस्य था तो विश्व कप में हिस्सा लेने की औपचारिकता भी पूरी करनी थी..निराशा इस हद तक थी कि विश्व कप से पहले होने वाला विदाई समारोह तक नहीं किया गया..तब के बीसीसाई चीफ प्रोफेसर चांदघाटकर ने मुझे किट्स, खिलाड़ियों के कपड़े और बाकी जरूरी सामान दिया, हम मुंबई के सांताक्रुज़ एयरपोर्ट पहुंचे और यहां जो हुआ उसने उड़ान से पहले माहौल और उदास कर दिया..एयरपोर्ट स्टाफ़ ने कहा कि हमारा सामान ज्यादा है और इसके पैसे भरने के बाद ही वो हमें इंग्लैंड की फ्लाइट पर चढ़ने देंगे..प्रोफेसर साहब के पास उतने पैसे नहीं थे..बाद में उन्हें लिखित में देना पड़ा कि वो एक दिन में पैसे भिजवा देंगे फिलहाल टीम को रवाना किया जाय तब जाकर हमने उड़ान भरी…अपने देश में ऐसी उपेक्षा के बाद अब बारी थी विदेश वो भी इंग्लैंड में तिरस्कृत होने की..भारतीय मीडिया ने टीम पर कोई खास कवरेज करना जरूरी नहीं समझा था और इंगलिश मीडिया ने तो हद ही पार कर दी…तब विस्डन क्रिकेट मंथली नाम से एक मैगजीन छपती थी, उसके एडिटर थे डेविड फ्रिथ..उन्होने अपनी विवेचना में ये तक लिख दिया था कि भारतीय टीम को विश्व कप में बुलाया ही क्यों जाता है….लेकिन जब हमने विश्व कप जीत लिया तो मैने उन्हें एक पत्र लिखा और कहा..” मैगजीन के जून के अंक में आपने भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में अनाप शनाप लिखा..आज जब हम विश्व विजेता हैं तो मेरे ख्याल में आपको उन शब्दों को चॉकलेट लगाकर बियर के साथ खा जाना चाहिए” ये तो वो घटना है जो मैने आपको भारतीय टीम के इंग्लैंड जाने और विश्व कप जीतने की बतायी..मान सिंह के पास तो पूरा दस्तावेज़ है ..एक एक लम्हा जिये और मरे हैं मान सिंह…फिल्म में इस किरदार और पूरे विश्वकप के दौर को देखने के लिए जबरदस्त उत्साह है मेरे अंदर..और आपके..

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