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Interview Taapsee Pannu : ”दर्शकों के 3 घंटे यादगार बना सकूं तो ही स्टार कहलाने का हक है”

Taapsee Pannu की आने वाली फिल्म गेम ओवर की काफी चर्चाएं हैं..फिल्म और फिल्म के अलावा कई पहलुओं पर तापसी से खास बातचीत की फिल्मसिटी वर्ल्ड संवाददाता शौनक जैन ने…

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रिपोर्टर – Taapsee सबसे पहले बहुत बहुत स्वागत आपका फिल्मसिटी वर्ल्ड के इस खास इंटरव्यू में..जो बात हमने सबसे पहले गौर की इस फिल्म में वो ये कि आपकी पहली सोलो पोस्टर वाली फ़िल्म है। तो इस बारे में बताइये हमे?
तापसी – हाँ, ये बहुत क्रिटिकल है क्योंकि ऐसा बहुत कम होता है कि किसी अभिनेता की फ़िल्म 3 भाषाओं में रिलीज हो। अभी तक तो मैने बड़े मज़े कर लिए ये कह कर कि मैं 3 भाषाओं में अभिनेत्री रही हूँ लेकिन अभी टेस्टिंग का समय आ गया हैं। कभी सोचा तो नही था क्योंकि आज तक तो मैने बस बड़े बड़े एक्टर्स की फ़िल्में देखी हैं डब होते हुए जैसे रजनीकांत और कमल हसन और बाहुबली और ऐसा मेरे साथ होगा मैने सोचा नहीं था लेकिन हाँ फ़िल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी थी तभी लगा नही किसी खास हिस्से की स्क्रिप्ट पढ़ रही हूँ क्योंकि पहले भी साउथ की स्क्रिप्ट पढ़ी है। ऐसा लगा की ये तो कोई क्षेत्र विशेष की फ़िल्म नही है और चाहते हैं तमिल और तेलगु में शूट करें तो करते हैं और जब फ़िल्म आयी फाइनली तैयार होकर तो मुझे लगता है कि हमारे डायरेक्टर काफी क्लियर थे कि वो एक रीजन न्यूट्रल फ़िल्म बना रहे है। क्योंकि जब आप हिंदी में फ़िल्म बनाते हो तो उसका अलग काम होता है तो हमने 2 भाषाओं पर ध्यान दिया और कहा की तीसरी में बन गयी तो बोनस। फिर हमने फाइनल फ़िल्म को रिलायंस और अनुराग कश्यप को दिखाया और उन्होंने कहा कि इसकी राष्ट्रीय अपील है तो हिंदी में भी रिलीज करतें हैं। तो हां, अभी तो काफी दबाव बना हुआ है। अच्छा दबाव क्योंकि मुझे स्क्रिप्ट पसंद है, फ़िल्म पसंद है और मैं जो भी कर सकती थी मैने किया अब आगे दर्शको को कैसी लगती है वो पता चल जाएगा।

रिपोर्टर- लेकिन आपको नहीं लगता कि सलमान की फिल्म भारत जो कि एक हफ्ते पहले ही रिलीज़ हुई है उसका दबाव भी रहेगा.
तापसी- हाँ, कैच 10 दिन पहले का ही है पर मुझे लगता है कि लोगों के पास काफी वक़्त होगा दोनों फिल्मे देखने का और लोग अगर इसके ट्रेलर को देखें और इसे मौका दें तो उन्हे पता चलेगा उन्हें देखनी है या नहीं। मैं उन्हें फ़ोर्स नही कर सकती।ट्रेलर देख लो और फिर खुद समझ लो आपको देखनी है या नहीं.

रिपोर्टर – तापसी ये आपके लिए एक बहुत ही अलग फ़िल्म थी तो जरा मेकिंग और कैरेक्टर में ढलने की प्रक्रिया के बारे में बताइए।
तापसी – इस फिल्म से पहले मैने ऐसी काफी फिल्मे कर लीं थीं जहां मैने खुद को ऐसा विश्वास दिलाया मेरे साथ ऐसी चीज़ें हुईं हैं जो पहले कभी नहीं हुईं। तो अभी मुझे पता है की खुद को कैसे मनाए उस चीज़ के लिए जो मेरे साथ सच में कभी हुई ही नहीं। चाहे आप पिंक को लें या मुल्क या नाम शबाना या मनमर्ज़ियां….ये चीजे सचमुच् नहीं हुई हैं मेरी जिंदगी में , मगर मैने खुद को कन्विंन्स किया किरदार में जाने के लिए तो इसमे भी ऐसा ही किया। बहुत मैंटली थका देता है और अपसेट करता है 35 दिनों तक हर दिन 12 घंटे खुद को ये विश्वास दिलाना कि आप एक ऐसे ट्रामा के शिकार हो जिसका कभी बहुत बार एक्सीडेंट हुआ है एक बार और बिना जाने उसका शरीर और डिमॉग उसको रियेक्ट कर रहा है एक साल बाद जिसे हम एनीवर्सरी इफ़ेक्ट कहते है और ये सच में होता है लोगो के साथ तो मेरे साथ कभी उतना बड़ा हादसा नहीं हुआ है तो मैं जानती ही नहीं थी कि ये एनिवर्सरी इफ़ेक्ट क्या होता है और मैने भी इसी पिक्चर के ज़रिये जाना क्योंकि फ़िल्म की को-राइटर काव्या एक डॉक्टर्स के परिवार से हैं और वो एनजीओ में ऐसे ट्रामा के शिकार लोगों की मदद करतीं हैं। इसी ट्रामा से हर दिन गुज़रना मेरे लिए, एक ऐसी लड़की जिसे कभी फ्रैक्चर भी नही हुआ है और मैं 70% फ़िल्म में व्हीलचेयर पर हूँ तो इतना हैंडीकैप लगा और लोग मुझे ज़्यादातर स्ट्रांग किरदार में देखते है इसके अंदर ऐसा कुछ नही है तो और बहुत मुश्किल था अपने आपको रोज़ वही ट्रॉमा में डालना और 12 घंटे शूट करना ..तो हर फ़िल्म के बाद में व्यक्तित्व रूप से बदल जाती हूँ तो फिर 6-7 दिनों की छुट्टी लेनी पड़ती है और कही छुट्टी पर जाकर और फिर नार्मल लाइफ आए तो फिर भी पूरी तरह से नही जाता है असर लेकिन यही सब तो एक कलाकार होने की कीमत है।

रिपोर्टर- आजकल हम देख रहे है कि दक्षिण की कई फिल्में वो बैरियर तोड़ रहीं हैं मसाला फिल्मों वाला और अच्छा काम हो रहा है वहां भी.. बड़े बड़े शहरों में सबटाइटल्स के साथ फिल्में आ रहीं हैं तो क्या आपको लगता है कि आपकी फ़िल्म डब होकर आने बाद और भी फिल्मो को भी मौका मिलेगा डब होने का?
तापसी- मैं ज़रूर चाहूंगी कि ऐसा हो। अब समय आ गया है कि ये डिवाइड हट जाए क्योंकि अच्छी फ़िल्म और सिनेमा अच्छा ही होता है चाहे वो कोई भी भाषा में हो। लोगो को उस कला को थिएटर में देखने का मौका ज़रूर मिलना चाहिए न की उनके टीवी या लैपटॉप पर बाद में।यही एक फायदा होता है एक ऐसे अभिनेता होने का जो बाकी भाषा की इंडस्ट्री में भी प्रसिद्ध हो, आप अपनी फ़िल्म को एक भाषा से दूसरी भाषा में ला सकते हैं पर ये परीक्षण का भी समय होता है ये देखने का कि आप सच में उतने प्रसिद्ध हैं या नहीं। तो मै खुश हूँ इसी वजह से की पूरे देश में आ रही है फ़िल्म अगर थोड़ा भी ऊपर नीचे होता तो शायद मैं नर्वस होती कि मत रिलीज करो और कोई कर लेंगे।

रिपोर्टर – जब आपने अपना करियर शुरु किया तो कमर्शियल फिल्मों के साथ शुरु किया और डेविड धवन के साथ भी हाल ही में काम किया और आज लोग कहतें है कि तापसी की फ़िल्म होगी तो अच्छी ही होगी। तो दर्शकों के बीच बढ़ते इस भरोसे पर आप क्या कहना चाहेंगी।
तापसी- हाँ ऐसा ही रहा है मेरा करियर गोल। ये तो मेरा गोल है और मै आशा करती हूँ की अगर आज नही तो जल्दी ही मै उसे हासिल कर लूं क्योंकि मै एक डायरेक्टर पर निर्भर रहने वाली अभिनेत्री हूँ और मुझे प्रोड्यूसर फ्रेंडली अभिनेत्री भी बनना है जिस पर रिटर्न्स और प्रॉफिट के लिए भरोसा किया जा सकता है.. तभी मेरे साथ और दूसरे फीमेल लीड के साथ और ज़्यादा फिल्में बनेंगी।आज की डेट में भी सुनना पड़ता है कि क्योंकि एक अलग फ़िल्म है, सारा भार एक लड़की के कंधों पर है तो बजट का दबाव भी होता है जो सभी फिल्मो में होता है लेकिन ऐसी फिल्मो में थोड़ा ज्यादा होता है। तो ये थोड़ा कम हो जाए तो मैं मानूँगी की मैने कुछ छाप छोड़ी है और मेरा ये मानना है कि अगर दर्शक थिएटर में आएं, टिकट खरीदे और पिक्चर देखें तो वो उनके टाइम देने लायक हो और पैसा वसूल हो 300 या 400 जो देंगे वो वसूल लगे उन्हें,.,तो मैं चाहती हूँ कि वो 3 घंटे यादगार हों और देखने लायक हों और तभी मैं मानूँगी कि मैं स्टार हूँ।

रिपोर्टर-हाल ही में अनुराग कश्यप ने कहा कि “तापसी सोचती है कि वो मेरा नज़रिया बदल सकती है एक डार्क फ़िल्म मेकर होने का” तो क्या कहना चाहती हैं आप इस बारे में? आप दोनो तो अच्छे दोस्त भी हैं।
तापसी-जी और ऐसा मुझे इसलिए लगता है क्योंकि क्योंकि मुंझे उनकी डार्क फ़िल्में पसंद नहीं हैं। मुझे डार्क फिल्में वैसे भी नही पसंद। उन्हें मेरी कितनी फ़िल्में नही अच्छी लगतीं और ठीक वैसे ही मुझे कितनी ही उनकी फिल्मे नहीं भातीं.. वो एक इतने कूल और मज़ेदार इंसान है कि मुझे चाहिए कि लोग वो हिस्सा भी उनकी फिल्मों में देखें। उनकी असल ज़िन्दगी उनके फिल्मो से बिलकुल विपरीत है। वो इतनी डार्क फिल्में बनाते हैं और असल में वो काफी मजेदार और कूल हैं। तो मैने यही कहा उनसे और मेरे साथ जो भी फ़िल्म बनायेंगे वो ऐसी ही मज़ेदार फ़िल्म होगी न कि डार्क फ़िल्म ।

रिपोर्टर -गेम ओवर के डायरेक्टर ने कहा कि खुश लडकियां डार्क फिल्मो के लिए परफेक्ट होती हैं.. तो उस बारे में क्या कहना चाहेंगी?
तापसी- हाँ वो पूरी तरह सही हैं।क्योंकि वही तो हो रहा है। मेरा मानना है कि मैं एक बहुत ही हंसमुख और मज़ाकिया व्याक्ति हूँ ..पता नहीं मुझे वो ऐसे रोल्स में क्यों डालते है और हर बार जब फ़िल्म में मुझे रोना होता है ना तो मैं शिकायत करती हूँ कि ऐसा क्यों कर रहे हो क्योंकि मैं असल ज़िन्दगी में इतनी आसानी से कभी नहीं रोती हूँ। और मुझे खुदको इतना टार्चर करना पड़ता है ये करने के लिए और उन्हें ये पता नही कैसे पसंद आता है और वो कहते है “तुम रोती बहुत अच्छा हो”।

रिपोर्टर-आप बहुत कॉमेडी शोज देखतीं हैं हमने सुना है तो आजकल आपका सबसे पसंदीदा कौन सा है?
तापसी- मैं बहुत ज़्यादा स्टैण्ड-अप कॉमेडी देखती हूँ।बाहर के और हिंदुस्तानी दोनों। मैने अभी अभी मेड इन हेवेन खत्म किया और इस फ़िल्म के दौरान भी मैं गॉसिप गर्ल देख रही थी क्योंकि ये फ़िल्म दिमाग पर हॉवी होने वाली थी तो मुझे कॉमेडी शोज़ पर वापस आना पड़ा और मैंने देखी वाइल्ड वाइल्ड वेस्ट और अब में चेर्नोबिल देखूंगी।

रिपोर्टर – मिशन मंगल की कुछ जानकारी अगर आप दे सकें तो बताएं ?
तापसी- हाँ, वो भी 15 अगस्त को आएगी। उसमे मैं साइंटिस्ट हूँ। एक टीम है जिसे अक्षय सर का किरदार लीड कर रहा है। हम सब साइंटिस्ट्स है और कहानी सच्ची है और मुझे बहुत खुशी हुई सभी के साथ काम करके ।

रिपोर्टर -मनमर्ज़ियां को एक अलग ऑडियंस ने पसंद किया और उससे कनेक्ट किया। तो क्या आपको लगता है वो फ़िल्म अपने समय से आगे की फिल्म थी?
तापसी- यार मुझे लगता है कि ये तो बहुत सी फिल्मों के लिए कहा जा सकता है। हाँ हम सब चाहते थे कि ज्यादा लोग देखें फिल्म लेकिन अब जब लोग उसे टीवी और बाकी जगहों पर देखेंगे तो उन्हें समझ आएगा की एक बहुत अच्छी फ़िल्म थियेटर में देखने का मौका गंवाया उन्होंने और हमारी अगली फ़िल्म को मौका देंगे। ऐसा मुल्क के साथ भी हुआ हालांकि हमने अच्छा पैसा बनाया ये देखते हुए कि हमने कितना खर्च किया लेकिन लोगो ने मुझे मैसेज किया कि वो दुखी हैं कि उन्होंने ये फ़िल्म सिनेमाहॉल में मिस कर दी। तो में खुश हूँ, मैं इसे इन्वेस्टमेंट समझती हूँ, इसकी वजह से शायद वो हमारी अगली फ़िल्म मिस न करें।

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