मूवी रिव्यू : देश के सारे अध्यापकों के लिए ट्रिब्यूट है SUPER 30
फिल्म SUPER 30 की समीक्षा की है हमारे संवाददाता शौनक जैन ने.
एजुकेशनिस्ट और मैथमेटिशियन आनंद कुमार की ज़िन्दगी पर आधारित है सुपर 30 की कहानी आनंद कुमार की है जिसमें वो एक गणित जीनियस और एक जादुई अध्यापक है जिन्होंने सुपर 30 जैसी रेवोलुशनरी इंस्टिट्यूट की शुरुआत की। ये उनकीं ज़िन्दगी और उसमे उन्होंने जो कठिनाइयां देखीं और कैसे सभी मुसीबतों के खिलाफ लड़कर अपने इस सुपर 30 के सपने को साकार किया उसकी कहानी है।
आनंद सर के किरदार में ऋतिक रोशन है। उनकी पर्फोर्मेंस की हम अगर बात करे तो वो उससे आपका दिल जीत लेते है। वो इस फ़िल्म को अपने कंधों पर लेकर चलते है और ये फ़िल्म फ़िल्म उनके कैरियर में एक लैंडमार्क ज़रूर साबित होगी। उनकी मेहनत और लगन आपको स्क्रीन पर समझ में आती है। वो पूरी तरह आपने किरदार में ढले हुए दिखते हैं।
उनको सपोर्ट करते हुए हैं मृणाल ठाकुर और हालांकि उनका किरदार बड़ा नही है फिर भी उन्होंने छाप छोड़ी है..आनंद के पिता के रूप में हैं वीरेंद्र सक्सेना जिनकी एक्टिंग बड़ी सुंदर रही है। साथ में पंकज त्रिपाठी इस बार भी ब्रिलियंट रहें है, उनकी खासियत ही है छोटे किरदार में भी इतना भारी और अच्छा काम करना। ओवरआल कास्टिंग और एक्टिंग सभी की बहुत बढिया रही है।
फ़िल्म की कहानी बड़ी स्ट्रांग है। हालांकि इसे और रोचक बनाने के लिए कुछ लिबर्टी ज़रूर ली गयी हैं लेकिन बहुत अच्छे से लिखी हुई और आपको बांध कर रखेगी.. डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले भी उम्दा है। एक बात जो देखने लायक है वो ये कि कैसे किरदार की ग्रोथ होती है और कही ऐसा नही लगता की एकदम से बदलाव आया और हमे यकीन ही न हो। फ़िल्म की एडिटिंग पर भी खास ध्यान दिया गया है। डायलॉग्स बहुत स्ट्रांग हैं जो पक्का आप पर अपना असर छोड़ेंगे।
सुपर 30 एक सुपर फ़िल्म बनी है। इसका मैसेज क्लियर है। जो हक़दार है वही आगे जाएगा। अपने सपनों को पूरा करने की मेहनत करो और सफलता ज़रूर प्राप्त होगी। ये फ़िल्म आपको सीख देने के साथ साथ पूरी तरह एंटरटेन भी करेगी। कुछ बातें ऐसे ज़रूर है जिनके साथ डायरेक्टर ने लिबर्टी ली है मगर इससे फ़िल्म की एंटरटेनमेंट या सीख पर कुछ असर नही पड़ता।
ये एक देखने लायक फ़िल्म है।ऋतिक ने इस पर अपने ढाई साल दिए और वो मेहनत दिख रही है। देश के सारे अध्यापकों के लिए ये ट्रिब्यूट है।
मेरी तरफ से 3.5/5 रेटिंग.
