चेतन आनंद की महान फिल्म हकीकत किसे याद नहीं होगी..फिल्म न भी याद हो तो क्या हुआ फिल्म का अमर गीत तो हर एक ही जुबान पर है. ‘कर चले हम फिदा जानों तन साथियों..अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’. बहुत कम लोग जानते हैं कि जब चीन ने भारत के साथ पहली बार धोखा किया था, तब निर्देशक चेतन आनंद तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री के पास गए इस विश्वासघात पर फिल्म बनाने के लिए आर्थिक मदद और शूटिंग की इजाजत मांगी। उन्हें पैसा और शूटिंग परमिशन दोनों मिलीं और इस तरह फिल्म लद्दाख में शूट होना प्रारंभ हुई.

चेतन आनंद के पास कहानी का मूल विचार तो था मगर स्क्रीनप्ले रेडी नहीं था क्योंकि उन्हे लगा था फिल्म का बजट और संसाधन पाने में समय लगेगा..जब सारा काम तुरंत हो गया तो उन्होने अपने मित्र बलराज साहनी को याद किया और फिल्म लिखने में मदद मांगी.भले ही विकीपीडियो में लेखक का नाम सिर्फ चेतन आनंद है लेकिन दोनों ( चेतन और बलराज ) दिन भर शूटिंग के बाद, रात को अगले दिन शूट किए जाने वाले सीन लोकेशन पर ही लिखते थे। इस तरह हर दिन की पटकथा एक रात पहले लिखी गई थी.

