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MODERN CLASSIC : हर किसी के मुकम्मल जहां पा लेने की ख्वाहिशों और उसके सफर की कहानी ‘तमाशा’

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हर किसी के मुकम्मल जहां पा लेने की ख्वाहिशों और उसके सफर की कहानी ‘तमाशा’
दुनिया में करोड़ों लोग रहते हैं।उनकी हज़ारों ख्वाहिशें, कुछ पा लेने की ज़िद और अपनी औकात से ज्यादा पा लेने की जो ख्वाहिशें है ना बस यही कहानी है फिल्म तमाशा की..ये वेद की कहानी है तारा के साथ उसके सफर की कहानी है।
वेद बचपन से ही जिसे कहानियां सुनना पसंद था।वो एक स्टरीटेलर बनना चाहता था।फिल्म की शुरुवात का कुछ हिस्सा यूं ही चलता है।
फिर अचानक कहानी बदलती है। कहानी वेद और तारा की ओर मुड़ जाती है।वेद को तारा एक टापू पर मिलती है।कोस्टारिका..यही वो जगह है जहां से फिल्म तमाशा अपना रूप धरती है।तारा और वेद निकले हैं अपने घरों से दूर अपनी उलझनों से दूर गए हैं।एक अजनबी सी जगह पर पहली बार वेद और तारा की मुलाक़ात होती है।दोनों खुले मिजाज़ के हैं लिहाजा एक दूसरे से कुछ भी कह पाने में सक्षम हैं।दोनों मिलते ही फैसला करते हैं कि चलो एक वादा करते हैं मै और तुम एक दूसरे से जो कहेंगे झूठ कहेंगे और सच बताएंगे नहीं जबतक यहां हैं और हां सबसे जरूरी बात कभी लाइन नहीं क्रॉस करेंगे।वेद और तारा झूठे अक्स के साथ एक दूसरे को ब्लफ करते रहते हैं, वेद को तारा और तारा को वेद बहुत पसंद आने लगता है।


मज़ाक मस्ती और फन के बीच समय बीत जाता है।एक सुबह तारा चली जाती है वहां से वापस अपनी दुनिया में।जैसा तय हुआ था दोनों एक दूसरे से नहीं मिलते।
लेकिन फिल्म का अगला सीन आपको चौंकाता है।वेद यानी रणबीर कपूर, जो कोस्टारिका में एक बिंदास और कूल वेद था वो तो असल दुनिया में एक सामान्य सा आदमी है। वो एक प्राइवेट नौकरी कर रहा है जिसमें उसकी कोई खास पहचान नहीं है।ना ही कोई रुचि है उसकी।उसका फैशन भी बदल चुका है जो उसकी पह चान था।
अचानक वो एक रोज तारा को मिल जाता है जैसे कि वह उसे खोज रही होती है, उस वेद को जिसे वो वहीं कोस्टारिका में मिली थी। जो तारा को बहुत पसंद था।तारा वेद से मिलकर इतनी खुश है कि उसे तो यकीन नहीं होता कि उसका सपना पूरा हो गया।वो वेद के साथ सपना जीने लगती है जैसे हर लड़की का होता है।बिना ये देखकर और सोचे कि ये वेद तो वो नहीं जिससे वो मिली थी।क्यूंकि अभी ये सपने जैसा है सबकुछ उसके लिए।फिर वो दिन भी आता है, जब सच्चाई से सामना होता है दोनों का।वेद तारा को प्रपोज करता है, तारा उलझन में है वो समझ नहीं पा रही उसे क्या करना चाहिए, वो दो पल का धीरज मांगकर वेद को समझाने बुलाती है। यही वो पल है जब वेद का सच से सामना होता है।तारा को तो इस वेद से कभी प्यार था ही नहीं, उसे ये वेद झूठा खोखला कमजोर लगता है।उसे नहीं चाइए ये वेद अगर इसी पल वो उसे मल भी रहा है तो भी।


फिल्म का अगला हिस्सा सबसे मजबूत है।वेद को अब सफर करना है इस वेद से उस वेद तक का सफर। उसे राह  में कई मुसाफिर मिलते हैं जो बिल्कुल वेद के जैसे है खुद से दूर होकर एक अलग दुनिया में खोखली जिदंगी जी रहे हैं।दरअसल वेद हमेशा से एक स्टोरीटेलर बनना चाहता था, वो भाग भाग के पीयूष मिश्रा के पास जाता था, उससे स्टोरीटेलिंग के गुर सीखने, उसने सीखा भी लेकिन नाइन टू फ़ाइव की  जॉब ने उसको कभी अपना पैशन फ़ॉलो ही नहीं करने दिया।अपने डैड के संस्कारों और जिम्मेदारियों की दुहाई ने वेद के अंदर के कलाकार को कभी बाहर नहीं आने दिया।जिसे मैथ्स नहीं पसंद वो है वेद, लेकिन उसके पापा कहते हैं तुम्हे पढ़ना चाहिए तो वो पढ़ता है। लेकिन वो बस एक एवरेज से जादा और कुछ नहीं बन पाता।उसके बॉस उसे हार्ड वर्किंग नहीं मानता।


फिल्म का एक सीन जिसमें वेद अपने बॉस के मुंह पर उसकी तारीफों का कसीदे पढ़ता है, किसी भी एवरेज इंसान की मुस्किलो को साफ बयां करने वाला दृश्य लगता है।
तारा प्रेम में पागल हो रही थी , उससे वेद की मुश्किल देखी नहीं गयी।वो उससे दूर होकर वेद को एक मुकम्मल इंसान बनाना चाहती थी।वो जानती है असल में वेद कौन है।असल में तारा ही है जो सब जानती है।खुला आसमान दिखाने की जुर्रत कराती है तारा, वो जानती है वेद एक पंछी है खुले आसमान का उसका जहां विशाल है बस उसे एहसास कराना जरूरी है।
ये अंकंडिशनल लव था जिसमें तारा ने सिर्फ़ प्रेमी वेद की  बेहतरी के लिये अपना सबकुछ छोड़ दिया, उसकी  इन्सिक्युरिटी को भी।


वेद अपने इस लंबे सफर में आगे बहुत कुछ देखता समझता है।उसकी नौकरी छूट जाती है।फिल्म के बीच के दृश्य बस देखने और महसूस करने के लिए है। उनपर कुछ लिखा नहीं जा सकता।
फ़िल्म के आख़िर में वेद स्टोरीटेलर बन ही जाता और वेद के लिए तारा भी उसके लिये अपना सबकुछ छोड़ देती है।फिल्म अपने मुकम्मल जहां को पा लेती है।लेकिन अपने सफर का अंत नहीं करती। ये एक ऐसी प्रेम कहानी बनती है जो संघर्ष के साथ त्याग, ज़िम्मेदारी और प्रेम के सही मायनों को समझाती है। तारा के प्रेम और त्याग को देखकर प्रेम के सच्चे स्वरूप से आपका सामना होता है।और वेद को देखकर आप खुद के सपनों को जीने की जुर्रत करने की सोचने लगते हैं।

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