क्या हो गर किसी वेबसीरीज़ को लेकर ढेर सारी बातें हों..ढेर सारा हाइप क्रिएट हो और उसमें क्षमता भी हो मगर दर्शक को पहले ही एपिसोड के बाद किसी बात का कोई फर्क न पड़े..न किसी बड़े खुलासे का, न कहानी में आने वाले ट्विस्ट का और तो और उसे चिढ़ मच जाए वेवजह दी जाने वाली गालियों से..यही होता है जब आप पहले स्टैंडर्ड इतना बढ़ा दें जिसे उसकी अगली किस्त में छू न पाएं..सेक्रेड गेम्स के साथ भी यही हुआ है..यहां हम बता रहें हैं कि आखिर क्या हुआ जो गणेश गायतोंडे के संसार में इस बार दर्शक का दिल नहीं लगा.
– पहले एपिसोड में ही ये किरदार या कहानी को लेकर दर्शक की दिलचस्पी आगे बढ़े इस बात की सारी संभावनाएं खत्म कर देती है…
– मेकर्स को ये पता होना था कि दर्शक हमेशा दूसरे सीजन को पिछले सीजन से तुलना करेगा और इस लिहाज से सेक्रेड गेम्स की राइटिंग में शॉक वैल्यू…कुछ सरप्राइजेज रखने चाहिए थे..लेकिन यहां इसकी जगह आपको मिलता है सिर्फ ढेर सारे किरदार को इंट्रोडक्शन जो शुरु में तो बहुत पावरफुल और इंट्रेस्टिंग लगते हैं लेकिन धीरे धीरे बाकी बड़े किरदारों के आगे उनकी बलि ले ली जाती है…
– फिल्म में इस बार सबसे दिलचस्प किरदार के तौर पर पेश किए गए हैं गुरुजी के रोल में पंकज त्रिपाठी लेकिन उस किरदार का डेवलपमेंट ठीक से नहीं हुआ है..वो किरदार एक तो पंकज को सूट नहीं किया है दूसरा उसके तमाम अजीबोगरीब हरकतें दर्शकों को कोई खास हैरान नहीं करतीं बल्कि मजाक का पात्र बना देती हैं…
महिला पात्रों को लेकर जितनी जिज्ञासा आपको रही होगी वो सारी जिज्ञासा इतने खराब ढंग से शांत की जाती है कि पिछली सीरीज़ में जो बातें रहस्य की लग रहीं थीं उनका खुलासा यहां बचकाना लगता है…मसलन जो जो के रोल में सुरवीन चावला…सबसे बड़ी पहेली उन्ही के किरदार को लेकर थी लेकिन उस किरदार की परतें खुलतीं हैं तो दर्शक को लगता है खोदा पहाड़ निकली चुहिया..
इसी तरह जमीला उर्फ जोया मिर्जा के रोल में दिखीं एलनाज नोरोजी के रोल का रहस्य खुलता है और दर्शक को फर्क नहीं पड़ता है..क्लाईमैक्स में आकर फिल्म जैसे और कई लेयर्स जोड़ने के चक्कर में मूल कहानी से भटक जाती है..सारे किरदार का जस्टिफिकेशन हो जाए बस इसी ताक में रहती है..टेरेरिस्ट की मां वाला एंगल पूरी तरह से इस सीरीज के बदमजा कर जाता है।
कुल मिलाकर सेक्रेड गेम्स सीजन 2 को लाने में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए थी..न तो परफॉर्मैंस के स्तर पर न कहानी के स्तर पर नही उसे पेश करने के तरीके में ये कोई खास प्रभाव छोड़ पाती है।
