आज की हमारी फिल्म है विद्या बालन स्टारर शकुंतला देवी. जो कहानी है ह्यूमन कंप्यूटर के नाम से मशहूर शकुंतला देवी की. तो फिल्म में मुझे क्या अच्छा लगा सबसे पहले ये जान लेते हैं..
– मुझे विद्या बालन की एक्टिंग काफी पसंद आई
– फिल्म का लुक मुझे बहुत शानदार लगा
– फिल्म में ढेर सारे मजेदार लम्हे हैं
– फिल्म के डायलॉग्स बढ़िया हैं
– फिल्म का म्यूजिक फिल्म के हिसाब का था
– सपोर्टिंग कास्ट भी बहुत अच्छी चुनी गई है
अब चलिए बात कर लेते हैं कि फिल्म में मुझे क्या खामी नजर आई..यानि कमजोरियां
– कहानी थोड़ी कच्ची पक्की लगी
– मां- बेटी के रिश्ते पर फोकस ज्यादा था
– बीच में फिल्म खींचती हुई नजर आती है
– ऐतिहासिक मौके वाले सीन कमजोर हैं
तो ये रहा फिल्म की खूबियां और खामियां..अब मेरा फाइनल टेक इस फिल्म पर…शकुंतला देवी की जान है विद्या बालन..उन्होने इस किरदार को इतन एंजॉय किया है कि बतौर दर्शक आप उनकी खुशी, मजाक, दुख गुस्सा सबके साथ हो लेते हैं..जहां तक बात कहानी की है तो इसमें दिक्कत बस इतनी है कि ये सफर शकुंतला देवी की बेटी के नजरिए से दिखाया गया है जिसका ऐलान फिल्म शुरु में कर देती है..तो इस वजह से आपको शकुंतला देवी और उनकी बेटी की कहानी का हिस्सा ज्यादा दिखेगा न कि उनकी करियर वाली यात्रा…हालांकि फिल्म ने हर हिस्से को छूने की कोशिश की है लेकिन जो हिस्टॉरिकल मोमेंट थे..या टर्निंग प्वाइंट था शकुंतला देवी के सफर का वो असर नहीं पैदा कर पाते. बाकी फिल्म टेक्निकली बहुत मजबूत है..बहुत अच्छी लगती है देखने में..और आखिर में एक खास बात जो इस फिल्म के बारे में करनी जरूरी है और इसे सेलिब्रेट करना चाहिए हमें वो ये कि फिल्म का एक बड़ा क्रिएटिव और मेकिंग डिपार्टमेंट होनहार महिलाओं से भरा है…अव्वल तो फिल्म की डायरेक्टर अनु मेनन हैं..फिल्म को लिखा नयनिका महतानी और इशिता मोइत्रा ने है.फिल्म की एग्जेक्टिव प्रोड्यूसर हैं शिवानी शरण और सहर अली लतीफ, फिल्म की को प्रोड्यूसर हैं शिखा शर्मा, सिनेमैटोग्राफी का जिम्मा संभाला है केइको नकहारा ने..विनती बंसल और मीनल अग्रवाल हैं प्रोडक्शन डिजाइनर, कॉस्ट्यूम डिजाइन किए हैं निहारिका भसीन ने, तो फिल्म को एडिट किया है अंतरा लाहिरी ने. और आखिर में फिल्म की लाइन प्रोड्यूसर हैं पर्ल गिल…इन सभी की मेहनत को मेरा सलाम.
मेरी तरफ से फिल्म का 5 में से 3.5 स्टार्स.
