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Interview Vicky Kaushal: ” मेरी परवरिश काफी मिडिल क्लास तरीके से हुई है”

एक्टर Vicky Kaushal तैयार हैं अपनी पहली हॉरर फिल्म भूत द हॉन्टेड शिप के साथ…उनसे खास बातचीत की हमारी संवाददाता पूजा ने..आप भी पढ़िए ये दिलचस्प मुलाकात…

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रिपोर्टर-  Vicky Kaushal आपको भूत की शूटिंग के दौरान चोट भी लगी थी उसके बारे में क्या कहना चाहेंगे?
विकी कौशल- अपने चेहरे की ओर इशारा करते हुए विकी कहते हैं कि यह आपको चोट दिख रही है यहां आंख के नीचे, साल में ऐसे एक दो दरवाजे तो खुद पर गिरा ही लेता हूं मैं। जी यह अप्रैल में हुआ था, और अप्रैल में शिप का कोई दरवाजा गिर गया था चेहरे पर, तो उसमें एक नॉब होती है, शीप के दरवाजे की एक नॉब होती है सेंटर में तो वह मेरे चेहरे के अंदर घुस गया था। तब पहली बार कुछ फील हुआ था की हड्डी पर कुछ लगा है टेक के बीच में। तो मैं हाथ पकड़ कर नीचे गिर गया। मेरे साथ जो को एक्टर थे, उन्हें लगा मैं कुछ इंप्रोवाइज कर रहा हूं। और मैं भाग कर निकल गया। तो वह मेरे पीछे आए और कहने लगे, “ पृथ्वी पृथ्वी भागना है”, और बाद में उन्हें मैंने जब अपना चेहरा दिखाया तो हर जगह खून खून था। उन्होंने डॉक्टर को बुलाने कहा। लकी ली हम भावनगर में शूट कर रहे थे। तो भावनगर से भी डेढ़ घंटे दूर हॉस्पिटल पहुंचने तक मैं अपने चेहरे को पकड़ कर बैठा रहा। लकी ली इंडिया के टॉप तीन प्लास्टिक सर्जन में से एक वहां बैठे हुए थे। मैंने कहा चलो यह तो सही हो गया। चेक किया तो पता चला कि हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ था चीकबोन पर। फिर अंदर 12 स्टिचेस लगे थे और पर स्किन पर 13 स्टिचेस। स्टिचेस लगने के बाद हमने वापस सेट पर आकर 10 घंटे शूटिंग की। और फिर बाद में एडिटिंग के दौरान उन्होंने मेरे चेहरे की सूजन वगैरह वीएफएक्स द्वारा सब मिटाया।

रिपोर्टर- जब भी हम हॉरर फिल्मों के बारे में बात करते हैं तो हर आर्टिस्ट की एक अपनी अलग कहानी होती है इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
विकी –जी सबसे बड़ी कहानी तो यही थी मेरे लिए हॉरर की की इतनी बड़ी चोट लग गई थी। और हुआ यूं था कि जिस दिन मुझे चोट लगी वह शूटिंग का आखिरी दिन था। और उसके चार पांच दिन बाद मुझे उधम सिंह की शूटिंग शुरू करनी थी। तो फिर मैंने सुजीत दा को यह फोटो भेजी। और उन्हें कहा कि यह तो भैया हो गई है प्रॉब्लम। और हमें रशिया में शूटिंग करनी थी। सुजीत दा ने कहा कि तू आजा हम कैरेक्टर को यह मार्क दे देंगे। तो फिर मैंने गुजरात में जो टांके लगाए थे वह मैंने रशिया में जाकर उतारे हैं शूटिंग के 1 दिन पहले और उधम सिंह का जो लुक आया था उसमें जो निशान है वह रियल है। अब एडिटिंग के दौरान हम ढूंढ रहे हैं कि उस निशान को वापस कहां लगाना है।

रिपोर्टर-  भूत की बात की जाए तो यह हॉरर फिल्म है आप पर्सनली कितना हॉरर जोनरा को पसंद करते हो?
विकी- मैं कभी हॉरर फिल्में अकेला देखना नहीं पसंद करता। मैं अकेले देखना कभी पसंद नहीं करता बहुत डर लगता है। पर मैं दोस्तों के साथ देखना बहुत पसंद करता हूं। दोस्तों के साथ वह एक मूवी वाचिंग एक्सपीरियंस होता है ऐसा कई बार होता है ना कि दोस्तों के साथ अब लेट नाइट स्टे करते हैं और पिक्चर देखने का प्लान बन जाता है। तो तब एक्चुली हम हॉरर फिल्में देखते हैं क्योंकि मैं जिस ग्रुप से हूं। उसमें हम सबको बहुत डर लगता है। हम सब साथ मैं होते हैं तो हमें बहुत इच्छा होती है कि हॉरर फिल्में देखी जाए। मुझे लगता है हॉरर ना एक बहुत कम्युनिटी व्यूइंग एक्सपीरियंस है। थिएटर में जाकर डॉल्बी डिजिटल म्यूजिक के साथ जब वह डर लगता है ना पूरे ग्रुप में तो उस में बहुत मजा आता है। थोड़ी हंसी भी निकलती है साथ में कि अरे इतना डर लग गया। तो मैंने पहले बिल्कुल भी नहीं सोचा था कि मैं हॉरर करूंगा। लेकिन जब मुझे बुलाया गया यहां पर और उन्होंने कहा कि ऐसी एक हॉरर फिल्म है। तो उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट दी पढ़ने के लिए। मैंने सोचा कि धर्मा से आ रही है हॉरर फिल्म तो मूवी में रोमांटिक ऐंगल भी होगा ,गाने भी होंगे, कितना हॉरर होगा? कुछ ना कुछ तो होगा ही। लेकिन फिर जब घर जाकर मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे बड़ा डर लगा। और मैं अक्सर रात को पढ़ता हूं स्क्रिप्ट क्योंकि शांति होती है और एक गो में कंप्लीट करता हूं। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मुझे पानी पीना था मैं पानी पीने भी नहीं गया किचन में। मैंने कहा अब तो सुबह ही पानी पिएंगे। तो फिर मैं अगले दिन इनसे आकर मिला था मैंने कहा मुझे बड़ा डर लगता है हॉरर से। फिल्म में बहुत सारे अंडर वाटर सिक्वेंस है। पानी से भी बहुत डरता हूं मैं। स्विमिंग यानी कि समंदर में भी तैरने से पानी में गिरने से मुझे बहुत डर लगता है। इसमें तो दोनों ही थे उन्हें लगा शायद मैं मना कर रहा हूं। तो मुझे डर इतना लग रहा था तो मैंने सोचा कि जब यह फिल्म का रूप लेगी तो वह एक्सपीरियंस और भी बड़ा बन जाएगा। अक्सर लोगों को हमारी बॉलीवुड हॉरर फिल्मों से यह कंप्लेंट रहती है कि उन्हें डर नहीं लगता है हंसी ज्यादा आती है। तो इस फिल्म से हमने यही सोचा कि शायद यह पाथ ब्रेकिंग हो सकती है। और हम जिस दौर में हैं ऐैज अ ऑडियंस हम भी कुछ नया देखना चाहते हैं। चलना नहीं चलना फिल्म की अपनी किस्मत है लेकिन इस फिल्म के लिए अपना टाइम देना रिस्क टेकिंग था। और यह था कि धर्मा जैसी प्रोडक्शन इसे बैकिंग दे रही है और भानु के साथ मैंने मीटिंग की तो वह हॉरर फिल्मों को लेकर काफी उत्साहित है तो मैंने सोचा कि चलो और कोई नहीं तो डायरेक्टर में तो अच्छी एनर्जी आ रही है। तो फिर वहां एक गट फीलिंग आ जाती है और आप अपने मन से हा कहते हैं तो बात बन जाती है।

रिपोर्टर- विकी जब आपने यह स्टोरी सुने और आपको पता चला कि यह धर्मा प्रोडक्शन से है, अगर इसकी जगह कोई और प्रोडक्शन होता तो क्या आप तब भी यह फिल्म करते?
विकी – डिपेंड करता है कौन सा प्रोडक्शन हाउस है? लेकिन हां पूरी तरीके से हां मैं जरूर यह फिल्म करता। लेकिन फिर आपको अंदर से यह भरोसा आना होता है कि यह कितना जर्नी ले पाएगी फिल्म का। फिल्म बनाना यह पूरी फिल्म के जर्नी का सबसे आसान पहलू होता है। फिल्म का प्री प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन सबसे महत्वपूर्ण होता है। उसकी मार्केटिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है कि जो लोगों के लिए हमने फिल्म बनाई है वह उन तक पहुंचे। कई बार ऐसा होता है की फिल्म अच्छी होती है बन भी जाती है लेकिन लोगों तक पहुंचने के जरिए ही नहीं मिलते उस फिल्म को। तो बस बड़ी प्रोडक्शन से यह हो जाता है कि फिल्म लोगों तक अच्छी तरीके से पहुंचेगी। अब एडिटर के लिए तो हम तुम करते नहीं कि भैया अब तुम ही फिल्म देखना तुम ही रिव्यू देना और तुम्हें खुश हो जाना। हम तो लोगों के लिए फिल्में बनाते हैं। चाहे उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं आए लेकिन एक वह होता है की उनके पास पहुंचे तो। और धर्मा जैसे प्रोडक्शन उस काम को आसान बना देती है।

रिपोर्टर-फिल्म  को साइन करने से लेकर तो अभी रिलीज के बीच में ही आप की सुपरहिट फिल्म उरी आई, क्या उसके वजह से आपके कॉन्फिडेंस में  कोई बदलाव आया कि अब मैं यह फिल्म कर सकता हूं अब यह हिट होगी?
विकी- जी अब तो अब बहुत डर लगने लग गया। पहले तो यह था कि चलो देख लेंगे। लेकिन अब ऐसा होता है कि चल जा यार चल जा। तो यह हो जाता है उल्टा रिस्पांसिबिलिटी आ जाती है कंधों पर। फिर लोग आपसे आशा करने लग जाते हैं कि आप अच्छा काम और दिखाओगे। आप अच्छा काम करोगे आप की फिल्में उन्हें और पसंद आएगी। सोच समझकर आप अपनी फिल्में करोगे तो वह वाली अच्छी रिस्पांसिबिलिटी आ जाती है कंधो पर जो आपको उड़ने नहीं देती आपके पैर जमीन पर रखने देती है। और आप रियालिटी चेक करते रहते हो कि आप सही तरीके से काम करो जल्दबाजी ना करो।

रिपोर्टर- विकी जिस तरह से उड़ी सुपर हिट हुई उसने आपको एक तरीके से ब्रांड वैल्यू दे दी। उसी तरह आपके भाई सनी कौशल को   फॉरगॉटेन आर्मी में बहुत सराहा जा रहा है। आपको क्या लगता है कि आपके भाई आपके लिए टफ कंपटीशन हो सकते हैं?
विकी-  जी सनी मुझसे बहुत बेहतर एक्टर है और अभी मुझे इस बात की खुशी है कि उन्हें मौके मिलना शुरू हो गए हैं। वह एक पिक्चर कर रहे हैं शिद्दत दिनेश विजन के साथ, और फिर बाद में उनकी हुड़दंग आएगी जिसमें सब में उन्हें लीड ऑफर हुए हैं। हमारी जर्नी में इतना डिफरेंस नहीं है क्योंकि वह मुझसे सिर्फ 1 साल 4 महीने छोटे हैं। तो वह जो ऑडिशन वाली प्रोसेस है वह हमने साथ में जी है। हमने कई बार बंद कमरों में एक दूसरे की ऑडिशन टेप शूट की है। साथ में कि उसका कोई ऑडिशन है तो मैं उसका वीडियो शूट कर देता हूं। रीटेक पर रीटेक किए हैं। कि ऐसा कर देते हैं वैसा कर देते हैं दूसरे अख्तर के क्यू मैं दे देता हूं। तो हमने यह सब साथ में किया है तो अब जब सनी को मौके मिलने लगे हैं तो एक भाई होने के नाते मुझे भी बहुत खुशी मिलती है। और हमारी जर्नी की सबसे अच्छी बात यह है कि सब कुछ ऑर्गेनिक तरीके से हुआ है। हमें कोई भी चीज तुरंत नहीं मिली है। चाहे वह मौके हो या सक्सेस हो। हमने उस जर्नी के एक-एक लेवल को पार कर के इस सक्सेस को हासिल किया है तो हमें इसकी अहमियत है। हम उसको ग्रांटेड नहीं ले रहे हैं।

रिपोर्टर- विकी पहले भी बॉलीवुड में हॉरर सेंट्रिक फिल्में आ चुकी है, जैसे भूत , राज, हंटेड, तो आपको क्या लगता है कि यह फिल्म लोगों को कितना डर आएगी?
विकी- जी इसमें मुझे लग रहा है कि फिल्म की जोग्राफी बहुत अलग है। अक्सर हम जो हॉरर फिल्में देखते हैं वह जनरली घर में होती है या पुराने किले में होती है। या कोई घर होता है जो बहुत सालों से बंद पड़ा हो और वहां कोई भूत होता है या कोई पैरानॉर्मल एक्टिविटी दिखाई जाती है। यह कहानी शिप पर है और यह बहुत ज्यादा इमैजिनेशन भी नहीं है। क्योंकि 2011 में वाकई में एक जहाज जुहू बीच पर पहुंच गया था जिसमें सच में कोई इंसान नहीं था। हालांकि उसमें कोई हॉन्टेड या पैरा नॉर्मल चीज नहीं थी। लेकिन यह हुआ था तो बात यह है कि यह रियलिटी से जुड़ी हुई है। तो अब उसमें यह इमैजिनेशन डाली गई है कि वहां अगर कोई हाउंटेड चीज हो या पैरानॉर्मल एक्टिविटी हो तो शिप जैसी जोग्राफी में जहाजहा कंटेनर शिप होती है उसमें 10 10 माले होते हैं। इंजन रूम पंप, रूम यह रूम फलाना रूम उसमें जाकर एक आदमी फस जाए। वह बंदा अंदर कितना भी चिल्लये, मदद करो हेल्प करो बाहर किसी को भी पता नहीं लगने वाला है। तू मेरे लिए वह जो ग्राफी इंटरेस्टिंग है। और यह भी इंटरेस्ट की बात है कि अगर वह दसवीं माले पर चले जाए और उसे वहा से ऊपर आना हो तो वह किन किन कमरों से ऊपर आएगा हर एक कमरे में अलग पैरानॉर्मल एक्टिविटी हो रही है। और मुझे लगता है कि उसे स्क्रिप्ट में अच्छे से नीचोडा भी गया है।

रिपोर्टर- विकी क्या आप खुद भूत-प्रेत में विश्वास रखते हैं या शूटिंग के दौरान आपको कोई एक्सपीरियंस हुआ हो जो ठीक ना लगा हो या आपके लाइफ में कभी भी कोई ऐसा एक्सपीरियंस हुआ हो जो नॉर्मल ना हो?
विकी- मेरे साथ ना वैसा कुछ पैरा नॉर्मल नहीं हुआ है। लेकिन अगर आपको पता हो तो एक चीज होती है स्लीप पैरालिसिस। वह मुझे भी एक दो बार होने के बाद जब मैंने इंटरनेट पर पता किया कि यह क्या मामला है यार? होता क्या है कि आप सो रहे होते हो और आपकी आंखें खुल जाती है लेकिन आपकी बॉडी मूव नहीं कर पाती। आप हिल नहीं पाते हो आपकी आवाज भी नहीं निकलती है। मुझे जब हुआ तो मुझे सच में लगा कि भूत है कमरे में। तो मैंने कहा कि यह क्या हो रहा है? मेरे साथ मैं प्रोफाइल क्यों नहीं पा रहा हूं? लेकिन फिर जब मैंने इंटरनेट पर बता किया कि इसके लिए एक साइंटिफिक नाम है स्लीप पैरालिसिस। अरे फिर उसने मैंने एक बात नोटिस की की यह तभी होता है जिस दिन आप बहुत थक चुके होते हो कि आपका दिमाग जाग उठता है लेकिन आपकी बॉडी सोई हुई होती है। तो जब आप उठते हो तब आप सब देख रहे होते हो कि नहीं मैं सपना नहीं देख रहा हूं सब कुछ रियल है। लेकिन आपका बॉडी सो ही रहा होता है वह इतना थका हुआ होता है। आप कुछ कर नहीं पाते हो और वह जो 10:15 मिनट होते हैं। चाहे आपको कितना भी साइंस क्यों नहीं पढ़ा लिया जाए आपको सच में ऐसा लगता है कि अंदर आपके कोई बैठा हुआ है। किसी ने आप को दबा कर रखा हुआ है क्योंकि आपको आदत नहीं है ना यह फीलिंग कि आपकी आवाज नहीं निकल रही है। आपका हाथ नहीं हिल रहा तो फिर डर लगता है कि यह कुछ हॉरर चल रहा है। पर दोस्तों से कहानियां जरूर सुनी है। घरवालों से ऐसा कुछ सुना तो नहीं लेकिन पंजाब में जो मेरा घर है ना जहां आंगन वाले घर होते हैं वह एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ हुआ करता था। भाई बचपन में ना मैं उस पीपल के झाड़ से बहुत नफरत करता था। रात को अगर बाथरूम आ जाए तो वह जो बाथरूम था ना वह गेट के बगल में था तो पीपल के झाड़ को पार करके बाथरूम करने जाना होता था। और पैदल चलकर जाना होता था और जब पैदल चलकर जाते थे तो पीपल का झाड़ आता था। जिसे देख कर ऐसा लगता था कि भाई अब तो यह खा ही जाएगा। तुम्हें मम्मी को उठा उठा कर लेकर जाता था और जिस दिन मम्मी का मूड खराब हो उस दिन तो बस हो गया फिर तो यह सोच कर सोना पड़ता था कि चलो भैया अब सुबह ही बाथरूम जाएंगे।

रिपोर्टर- विकी जैसा के भानु प्रताप ने बताया कि यह पिक्चर आपको उरी के पहले ऑफर हुई थी और करण जौहर ने कहा था कि  इस बच्चे को मैंने जब से देखा है उसके कोई भी नखरे नहीं बड़े हैं और यह बात बिल्कुल भी फिल्मी नहीं है तो आप किस हद तक इस बात को मानते हैं और क्या इसका श्रेय आप अपने घर वालों को देना चाहेंगे?

विकी- बिल्कुल बिल्कुल आई थिंक इंसान जैसा भी होता है इसका उसकी परवरिश से काफी लेना-देना होता है। वह की सोसाइटी में पैदा हुआ है कैसे पला बढ़ा है उससे काफी लेना-देना होता है। मेरी परवरिश काफी मिडिल क्लास तरीके से हुई है। अभी भी मुझे लगता है कि बतौर ऐक्टर में आफ्टर तभी हूं जब एक्शन और कट के बीच में मेरा काम चल रहा होता है। उससे पहले मैं एक ऑडियंस हूं जो पिक्चर्स देखना पसंद करता है और उसमें काम करना पसंद करता है। तो मैं ज्यादातर अपने आपको एक्टर होना सीरियसली नहीं लेता। मैं वैसे ही काम करता हूं जैसे आप लोग करते हैं। मेरा काम यह है कि मुझे सिर्फ दर्शकों तक पहुंचना वह काम का हिस्सा है। मेरा चेहरा दर्शकों तक पहुंचना वह काम का हिस्सा है। इसके अलावा मैं हूं ही क्या? उसके अलावा क्योंकि मैं एक टेक्नीशियन का लड़का हूं। तो मुझे पता है की पिक्चर सिर्फ एक एक्टर के वजह से ना बनती है ना चलती है। पिक्चर में 300 लोग और काम करते हैं तब जाकर पिक्चर बनती है और चलती है। तो मैं जिस पिक्चरों का हिस्सा हूं वह पिक्चर का मैं सिर्फ एक हिस्सा हूं। उसमें और भी लोग हैं जिनकी वजह से वह पिक्चर बनी है। बाकी हम एक कलेक्टिव एफर्ट होता है। टेक्नीशियन पर हम कितना डिपेंड करते हैं। वह दूर खड़ा लाइटमैन भी है जो झाड़ पर चढ़कर मेरे चेहरे पर लाइट मार रहा है जिस वजह से मैं देख रहा हूं ऑडियंस को उसका भी उतना ही हाथ है पिक्चर में जितना मेरा हाथ है। तो उल्टा तो वह मेरे लिए प्लेटफार्म बनाते हैं कि तू अच्छी एक्टिंग कर। तेरे लिए सब कुछ अवेलेबल है। तुम्हें जानता हूं कि यह मेरा एफर्ट नहीं है टीम का एफर्ट है। तो पता नहीं वह वह कभी आया ही नहीं। की पिक्चर मैंने हिट करा दी ऐसा कुछ नहीं है।

रिपोर्टर- विकी लेकिन प्रेशर तो होता ही होगा फिल्म का?
विकी- जी देखिए यह अच्छे तरीके का प्रेशर है। एक तो मैंने बहुत मेहनत की है इस तरीके से प्रेशर को अपने आप पर लेने के लिए। मैं तो चाह रहा था कि कब कोई ऐसा प्रेशर दे मुझे। और यह ऐसा प्रेशर है जो आपके अंदर से अच्छा काम निकल जाता है। या अच्छा काम करने की कोशिश करवाता है। आप पास हो फेल हो यह तो आप की जरनी है। बट अट लीस्ट आपसे मेहनत करवाती है आपको कंप्लीसंट नहीं होने देती है। कि यार आप रिलैक्स हो कर बैठी जाओ। वह प्रेशर आप को जिंदा रखता है।

रिपोर्टर – विकी पृथ्वी का कैरेक्टर आपके लिए कितना चैलेंजिंग था?
विकी- इतना मुश्किल नहीं था जितना जैसे कि मुझे कोई नई भाषा सीखनी हो नया कल्चर सीखना हो वैसा कुछ नहीं था। या कैरेक्टर बहुत अलग था जैसे रमन राघव में है कोई डार्क स्पेस हो गया मेथड एक्टिंग करनी हो ऐसा कुछ नहीं था कि मुझे कैरेक्टर को बहुत समझ ना पड़े। हालांकि इस फिल्म में ऐसा था कि मुझे टेक्निकली बहुत चीजें समझनी पड़ी। जब मैंने फिल्म को हा कहा था जब मैं सेट पर पहुंचा तब तक मैं प्रिपेयर्ड नहीं था। यह सब भी मुझे समझना होगा कि काफी सीन में काफी शार्ट में भूत क्रिएट किया जाएगा। वह भाग कर मुझ पर आ रहा है तो वह तो मुझे दिख भी नहीं रहा। वह तो शूटिंग वाले दिन पर है भी नहीं वह तो मुझे समझना होगा कि वह आ रहा है। तू वहां कैसे आएगा? कहां से आएगा किस डायरेक्शन से आएगा उसे वह रिएक्शन देना। उसकी टाइमिंग उसकी इंटेंसिटी को मैच करते हुए मेरा एक्सप्रेशन आना चाहिए। कहीं यह ना हो कि चीजें डरावनी हो और मेरा एक्सप्रेशन कम हो। कि लोगों को विश्वास ही ना हो और इतनी ओवरएक्टिंग हो जाए। तो वह कहीं भी जा रही है अक्सर में मॉनिटर पर अपनी परफॉर्मेंस चेक नहीं करता हूं। के डायरेक्टर ने हां बोल दिया ओके बोल दिया तो मैं आगे बढ़ जाता हूं लेकिन इसमें मुझे चेक करना पड़ रहा था। कि यार वह कितना रजिस्टर हो रहा है? कि वह बहुत सटल जा रहा है या बहुत ओवर जा रहा है। इसमें मुझे पूछना पड़ रहा था कि बैकग्राउंड म्यूजिक कैसा होगा कि अगर सीन साइलेंट हो या लाउड म्यूजिक हो तो उसके हिसाब से मेरा एक्सप्रेशन अलग जाएगा। उसका ग्राफ कैसे जाएगा कि भूत कब-कब कितना कितना दिख रहा है? कितना रिवील होगा फिल्म में तो यह सब कुछ समझ ना इतनी टेक्निकलीटी के साथ यह बिल्कुल मेरे लिए एक नया ग्रामर था। क्योंकि बतौर ऐक्टर मुझे पसंद आता है कि हमारे को एक्टर के साथ ड्रामा सीन करके देखें कॉमेडी सीन करके देखें कि आखिर आता क्या है? तुम मुझे टेक्निकल नॉलेज के साथ सारी चीजें नाप तोल कर करनी पड़ रही थी।

रिपोर्टर-  विकी नेशनल अवार्ड मिलने के बाद आपके कॉन्फिडेंस में क्या बदलाव आया है या आप खुद में क्या बदलाव महसूस करते हैं?
विकी- मुझे तो पहले जब नेशनल अवार्ड की अनाउंसमेंट हुई तब यकीन ही नहीं हुआ। क्योंकि लोगों को ऐसे सपने देखने के लिए भी साल लग जाते हैं। क्योंकि कुछ सालों बाद आप सपना देखना शुरू करते हो कि आपको नेशनल अवार्ड मिलेगा। तो मुझे तो अभी लग रहा था कि अभी सपना देखना शुरू हुआ ही है कि वह खबर आई कि मुझे मिल गया। तो मैंने कहा यार यह क्या हो गया? मुझे रिएक्शन ही नहीं पता लगा। लेकिन बहुत खुशी हुई थी बहुत अच्छा लगा था। अच्छा लगता है यह जानकर कि आपको नेशनल अवार्ड मिला है। कई आर्टिकल तो ऐसे होते हैं जिसमें इंट्रोडक्शन ही ऐसा होता है कि नेशनल अवॉर्ड विनर, तो मैं कहता हूं यार सच्ची। तो अच्छा लगता है और बिल्कुल कॉन्फिडेंस बढ़ता है। तो आप जिस रास्ते चलते हो और एक्टिंग का ऐसा है कि आप एक्टिंग करते जाओ एक्टिंग एक कांस्टेंट स्ट्रगल है। जिसमें आप देखते हो कि अगला काम क्या है? मैं अगला काम क्या कर रहा हूं? क्योंकि आपको पिछले काम से ही जाना जाता है। और ऐसे मोड़ पर आपको एक नेशनल अवार्ड जैसी चीज मिले तो आपकी पीठ पर एक शाबाशी महसूस होती है कि आगे बढ़ते रहना है। एक अच्छा मोटिवेशन मिलता है तो वह एक बहुत अच्छी फीलिंग है। बड़ा अच्छा लगता है।।

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