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Interview Prabhas : ‘हिंदी फिल्म की स्क्रिप्ट देवनागरी हिंदी में पढ़ता हूं’

वेंकटा सत्यनारायणा प्रभास राजू उप्पलापटी उर्फ प्रभास की आने वाली फ़िल्म ‘Saaho’ को लेकर जबरदस्त उत्साह है.. 30 अगस्त को बड़ी ओपनिंग की पूरी उम्मीद है..हाल ही में फिल्मसिटी वर्ल्ड ने उनसे खास बातचीत की..बातचीत का ब्यौरा पेश कर रहीं हैं हमारी सीनियर राइटर वर्षा दीक्षित.

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प्रभास आप मानते हैं कि बाहुबली ने फिल्मों का बैरियर तोड़ा है जैसे आप हिंदी में Saaho लेकर आ रहे हैं।
लोग कहते हैं कि पैन इंडिया फिल्मों की शुरुआत बाहुबली से हुई लेकिन इससे मैं थोड़ा कम इत्तेफाक रखता हूं क्योंकि दक्षिण भारत में मेरी मां के गांव विजयवाड़ा में सलमान खान की फिल्म मैने प्यार किया 100 दिनों तक चलती रही और आज भी मेरे नाना नानी उस फिल्म के फैन हैं । मेरे दादा ने वो फिल्म रिलीज़ के वक्त 10 बार थियेटर में देखी थी तो सोचिए ये तो बहुत पहले से है , कहानियां जो हर किसी को छू जाएं वही हर जगह स्वीकार होती हैं। मैं ये कह सकता हूं कि बाहुबली ने बड़ी पहचान दे दी और इससे हम लोगों को रिस्क लेने की हिम्मत आ गई ।

साहो किस तरह की फिल्म है और इसके बाद क्या करने का इरादा है ?
साहो एक ऐक्शन एडवेंचर फिल्म है और मैं कहूंगा कि ये स्टोरी वाली नही बल्कि स्क्रीनप्ले वाली फिल्म ज्यादा है..जो कुछ होगा परदे पर होगा न कि कोई बहुत मजबूत कहानी के लिहाज से होगा..आपको परदे पर ढेर सारा ऐक्शन मसाला मिलेगा जो आपने पहले देखा नहीं होगा।

इस फिल्म में आपके किरदार में एक ग्रे शेड है तो आपको नहीं लगता कि महेंद्र बाहुबली जिसकी लोगों ने पूजा की उस हीरो को ग्रे शेड में देख लोग स्वीकार करेंगे या नहीं

देखिए मेरे लिए यही बेहतर था कि जो बाहुबली में किया और जो उस फिल्म ने स्थापित किया उसे छूने की हिमाकत न करूं क्योंकि अगर किरदार या मूड या बैकड्राप उसके आसपास भी रहा तो लोग तुरंत तुलना करेंगे जो नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि बाहुबली जैसा प्यार दुबारा पाना बहुत मुश्किल काम है। रही बात ग्रे शेड की तो ज्यादा कुछ न बोलकर यही कहूंगा कि हां उसमें ग्रे शेड है और वो आपको हैरान भी करेगा।

बाहुबली के बाद जो बेहिसाब दीवानगी आपको लेकर दिखी उसे आप कैसे डील करते हैं।
मैं बहुत पब्लिक पर्सन नहीं हूं..यहां तक कि फिल्म की रिलीज वाले दिन मैं फैंस के रिएक्शन जानने की जगह पूरा दिन घर पर सोना या दोस्तों परिवार के साथ बिताना पसंद करता हूं। फिल्म खत्म होने के बाद भी मुझे दोस्त और परिवार के साथ रहना पसंद है । मगर हां बाहुबली के बाद एक जिम्मेदारी बढ़ गई है लेकिन मैं किसी तरह का दबाव लेकर चलने वालों में से नहीं हूं। अपने काम लगन और मेहनत से करता हूं बाकी ऑडियंस का प्यार और रिजेक्शन दोनों की कद्र करता हूं। मैं बस ये कोशिश करता हूं कि सफलता मेरे सिर पर न चढ़े और इस बात की प्रेरणा मुझे राजामौलि से मिलती है..वो बाहुबली के पहले भी कामयाब फिल्में बनाते रहे हैं जिन्हे काफी प्यार मिला है मगर वो इंसान हमेशा विनम्र और ग्राउंडेड रहता है तो मैं भी वही प्रैक्टिस करता हूं।


आपने बाहुबली के बाद ये कहा था कि अब आप ऐसी कोई फिल्म नहीं करेंगे जिसमें टाइम ज्यादा लगे लेकिन साहो ने भी तो काफी समय लिया?
जब साहो स्टार्ट हुई तो हमें लगा था कि ये फिल्म जल्द खत्म हो जाएगी लेकिन फिल्म के एक्शन पर बहुत समय लगा..एक सीक्वेंस है जिसका अकेले का बजट 70 करोड़ का है जिसके लिए विदेशों से एक्शन डायरेक्टर आए तो कुछ चीजों के परफेक्शन के लिए न चाहते हुए भी टाइम लग ही जाता है। साहो’ के एक्शन को डिजाइन करने के लिए 50 लोग हॉलीवुड से आये थे, अबू धाबी में एक लंबा शूट चला जिसमें एक्शन काफी शार्प रखा गया..इसके अलावा बाकी फिल्म को बनाने में भी ज़्यादा समय लगा और 2 साल बीत गए लेकिन मैं सच में इतना समय किसी फिल्म के लिए नहीं खर्च करना चाहता हूं

प्रभास हिंदी फिल्मों में अपनी पारी को कैसे प्लान कर रहे हैं आप।
– देखिए सब कुछ तय होगा जैसा साहो का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन होगा..व्यक्तिगत तौर पर मैं चाहता हूं कि मैं ज्यादा से ज्यादा हिंदी फिल्में करूं क्योंकि मुझे हिंदी पढ़नी भी आती है और हिंदी लिखनी भी..बस बोलने में अभ्यास की जरूरत पड़ती है क्योंकि एक लंबे वक्त से मैं तेलुगु भाषा में अपना काम कर रहा हूं लेकिन पहली बार साहो में मैने अपने डायलॉग्स खुद डब भी किए हैं और पूरी फिल्म हिंदी में बनी है। तो दुआ करिए की साहो धमाल मचाए क्योंकि ये फिल्म हिंदी फिल्मों में मेरी भविष्य की प्लानिंग तय करेगी।

 

आगे आने वाले वक्त में कौन कौन सी फिल्मों में हम आपको देखेंगे।
देखिए साहो के तुरंत बाद मै दो फिल्में कर रहा हूं..दोनों ही फिल्में रोमांटिक हैं और होम प्रोडक्शन हैं । पहली फिल्म में मेरे साथ पूजा हेगड़े नजर आएंगी..दूसरी फिल्म की डिटेल भी जल्दी ही बाहर आएगी।

बॉलीवुड में आपके पसंदीदा एक्टर कौन कौन से हैं ?
– वैसे तो अमिताभ बच्चन, शाहरुख ख़ान और सलमान मुझे बहुत पसंद हैं लेकिन आमिर खान के काम ने बतौर एक्टर मुझे कई बार हैरान किया है। खासतौर पर अगर आप याद करें तो लगान और दिल चाहता एक ही साल 2001 में रिलीज़ हुई थी। एक ऐक्टर के लिए बहुत मुश्किल है कि वो दो बिलकुल अलग फिल्मों में दो बिलकुल अलग किरदार में एक वक्त पर अपना हंड्रेड परसेंट दे सके लेकिन ये आमिर की एक्टिंग स्किल की बात है कि उन्होने ये कर दिखाया जिसका मैं बहुत मुरीद हूं और इससे आपको सीखने को मिलता है।

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