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सिनेमा की सोच और उसका सच
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2.0…साल की सबसे यादगार फ़िल्म

रजनीकांत -अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म 2.0 साल की यादगार फिल्मों में एक थी । फिल्म को लेकर दर्शकों में बेहद उत्साह था । रिलीज़ के उजाले के बाद यह सच साबित होता दिखा। अक्षय कुमार की साउथ फिल्मों में इंट्री छाप छोड़ती है । अक्षय का

FCW FLASHBACK : वो फिल्में जो बनी 2018 की शान

साल 2018 बस कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है....लेकिन ये साल बॉलीवुड के लिए बेहद रोमांचक रहा.... हमारी सीनियर राइटर प्राची बता रहीं हैं बॉलीवुड की उन टॉप टेन मूवीज़ के बारे में जिन्होने जीता दर्शकों का दिल...

युवाओं की मुहब्बत को केंद्र में लाने वाली फिल्म ‘ae dil hai mushkil’

क्या लड़का-लड़की सिर्फ दोस्त नहीं हो सकते! करण जौहर की फ़िल्म 'ae dil hai mushkil' इस सवाल को केन्द में रख एक रोचक संघर्ष रचने वाली मुश्किल फिल्मों में है। बहुत हद तक कामयाब भी हो जाती है। अलीजेह (अनुष्का शर्मा), आयान (रणबीर कपूर) सबा

मुहब्बत के पड़ावों का डॉक्यूमेंटेशन करती शॉर्ट फिल्म Humsafar

रिश्तों के ताने-बाने पर खड़ी ‘हमसफ़र’ कह गई कि दूरियों के बाद भी अगर खुदा फ़िर कभी दो बिछडो को मिलने का अवसर दे तो सभी को उसे मौका देना चाहिए।

खेल आधारित फिल्मों में BADLAPUR BOYS

बॉलीवुड की खेलों पर आधारित फिल्मों में badlapur boys का अपना स्थान होना चाहिए. जो जीता वही सिकंदर एवम हिप हिप हुर्रे फिर अव्वल नंबर से खेलों पर बन रही फिल्मों में लगान व चक दे इंडिया एवं भाग मिलखा भाग तथा मेरिकाम के बाद सिलसिले में बदलापुर

जीवन की सच्चाइयों पर केंद्रित बेहतरीन फिल्म ‘मसान’

नीरज घेवान की 'मसान' जीवन - मृत्यु के पाटों की मर्मस्पर्शी कथा कहती फ़िल्म थी । मुक्ति मार्ग के इस आध्यात्मिक शहर में ज़िंदा लोगों की एक भी कहानी है।

गरीबों के यथार्थ का सुध लेनी वाली फिल्म ‘फुटपाथ’

दिलीप कुमार की यादगार फ़िल्मों में 'फुटपाथ' व्यापार, मुनाफा एवम भ्रष्टाचार से बढ़कर गम्भीर कालाबाजारी की अमानवीय,अत्याचारी,मर्मविहीन समस्या पर सामयिक विमर्श थी ।पचास दशक में बनी यह फ़िल्म अपने विषय एवम प्रभाव में समकालीन समय एवम