बैटमैन सीरीज से अब बेन अफलेक की विदाई का समय आ चुका है।अब फिल्म बैटमैन को एक युवा किरदार की जरूरत आन पड़ी है। डायरेक्टर मैट रीव्ज के बैटमैन बनने वाले बेन अफलेक ने इस सिनेमाई सुपरहीरो के किरदार को एक अलग ढंग से जिया, बिना इसकी परवाह किए बगैर की उनकी तुलना की जाएगी अपने समकालीन बैटमैन के किरदारों से, इस मायने में बेन अफलेक बाज़ी हारकर भी अपने किले के सिकंदर बन जाते हैं।बैटमैन से विदाई लेने से पहले बेन बैटमैन vs सुपरमैन के जरिए लोगों तक एक नए बैटमैन को पहुंचा चुके हैं।
पता नहीं आप में से कितने लोगों ने वैसो को देखा है, जो खुद में हमेशा कुछ अलग करने की सोचते हैं, वो किसी किरदार के पूर्वाग्रहों को पीछे छोड़कर अपना एक नया आयाम पा लेते हैं।वो नहीं चाहते किसी किरदार की तरह रहना या उसमें ढलना, वो गढ़ जाते हैं एक नया किरदार एक अलग छाप भले ही वो उतनी लोकप्रियता हासिल ना कर पाए, पर कुछ नई तो हो।
बैटमैन के किरदार का चोगा पहनकर बेन अफलेक ने कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की थी, जिसमें मेरी नजर में वो कामयाब रहे।
साल था अगस्त,२०१३ जब बेन अफलेक को फिल्म बैटमैन ऑफर हुई।ये एक चुनौती की तरह था, क्यूंकि क्रिश्चियन बेल ने बैटमैन की पिछली किश्त निर्देशक क्रिसटोफर नोलन की बैटमैन द डार्क राइजेस में अपनी अभिनय कला का ऐसा जौहर दिखाया था कि सभी अचंभित थे।क्रिश्चियन बेल ने बैटमैन के किरदार के लिए इतने ऊंचे मानक तय कर दिए थे कि सबको लग रहा था कि क्या बेन उसी सफल किरदार को दोहरा पाएंगे, ये चुनौती भी थी।
लेकिन बेन भी ऑस्कर में एर्गो के लिए बेस्ट फिल्म का खिताब लेकर मैदान में उतरे थे, हौसला ऊंचा था।
इस बैटमैन सीरीज के डायरेक्टर मैट रीव्ज ने भी दांव खेला था, क्यूंकि बैटमैन की अगली किश्त बैटमैन vs सुपरमैन: डॉन ऑफ जस्टिस के लिए उन्हें ठीक ऐसे ही किरदार की जरूरत थी, जो थोड़ा बूढ़ा हो, जिसके पास अनुभव है जिंदगी का, जो उसकी बातों में झलके, वो कम बोलता हो लेकिन जब बोलता हो तो प्रभावशाली लगे।
बेन अफलेक का स्वभाव इस किरदार को निभाने में काम आया।बैटमैन vs सुपरमैन: डॉन ऑफ जस्टिस में जब वो सुपरमैन के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए सीन में दिखाए देते हैं तो असल में वो पर्दे पर एक नए बैटमैन को गढ़ रहे होते हैं।बैटमैन की सुपरमैन से हद से ज्यादा नफरत दिखती है जब आप फिल्म देख रहे होते है।यही वो वक़्त होता है जब बेन, बैटमैन के नोलन वर्जन को पीछे छोड़ अपना ही एक नया वर्जन पेश कर रहे होते हैं।वो किसी की कॉपी करते नहीं बल्कि अपनी सीमाओं के भीतर ही किरदारी रूप धर रहे होते हैं।ये एक कलाकार के तौर पर बेन की पहचान को और निखारता है।
मेरी नजर में बेन अफलेक ने बैटमैन के किरदार को यूं ही जाया नहीं जाने दिया बल्कि अपने अभिनय कौशल से ये दिखा दिया की क्यूं वो दूसरों से अलग है और क्यूं उन्हें बैटमैन के तौर पर याद किया जाना चाहिए।
बेन ने बैटमैन का चोगा तो उतार दिया है, लेकिन अब ये टॉर्च जिसके पास भी जाएगी, वो क्या इसी ईमानदारी से बैटमैन को पेश कर पाएगा और क्या डायरेक्टर मैट रीव्ज को फिर ऐसा ही कोई ईमानदार कलाकार मिल पाएगा जो फिर से बैटमैन के किरदार को नई पोशाक पहना सके।
