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सिनेमा की सोच और उसका सच

हिंदी सिनेमा के पहले स्टार गायक अभिनेता कुंदन लाल सहगल

गम दिए मुस्तक़िल एवं ‘बाबुल मोरा नईहर छूटो जाए’ जैसे अमर गीतों के प्रतिनिधि कुंदन लाल सहगल का जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवांशहर में हुआ था। बचपन के दिनों से ही सहगल को संगीत ने काफी प्रभावित किया। स्कूल जाने की उम्र में रामलीला के

रोमांचक फिल्मों में अगली कड़ी हो सकती थी ‘बदला’

स्पैनिश फिल्म 'द इनविज़िबल गेस्ट' की आधिकारिक रिमेक 'बदला' एक रोमांचक फॉर्म की अच्छी कोशिश है। फ़िल्म मुख्यत किरदारों नैना सेठी (तापसी पन्नू) और बादल गुप्ता (अमिताभ बच्चन) की कहानी है। नैना सेठी पर आरोप है कि उसने होटल के एक कमरे में अपने

अपने क़िरदारों में रचा बसा कलाकार ‘बलराज साहनी’

बलराज साहनी  सिनेमा की एक अविस्मरणीय शख्सियत रहे हैं। अभिनय में आज भी बलराज को बडा आदर्श माना जाता है । बलराज साहेब लीक से हटकर काम करने के लिए जाने जाते थे। वह एक जुझारू एवं समर्पित कलाकार थे । बलराज साहनी व  प्रेमचंद के

पांच फिल्मफेयर अवार्ड जीतने वाली फिल्म ‘राज़ी’

मेघना गुलज़ार की 'राज़ी' आलिया भट्ट के अभिनय से सजी बेहतरीन फ़िल्म है। आलिया ने अपने किरदार को ज़ोरदार तरीके से निभाया भी है। उनकी सादगीभरी खूबसूरती ने भी मन मोह लेती है। शुरू-शुरू में मासूम लड़की के रोल में आलिया लड़खड़ाती सी प्रतीत होती हैं ।

बेबाक लड़कियों की बेबाक कहानी ‘वीरे दी वेडिंग’

नए ज़माने की फ़िल्म 'वीरे दी वेडिंग’ के केंद्र में एक लड़की की शादी है। और उसकी तीन सहेलियां इस शादी के लिए आई हुई हैं। चारों लड़कियां पुरानी दोस्त हैं और एक-दूसरे को वीरे कहती हैं। इन चारों में से एक वकील है। तलाक विशेषज्ञ। अपनी मां के कहने

मिर्ज़िया ने लिखी अनदेखी कहानी

गुलज़ार की लिखी राकेश ओमप्रकाश मेहरा जैसे बड़े नामों से जुड़ी 'मिर्जिया' दो कहानियां दिखाती है। एक छोर पर पंजाब की लोककथा मिर्जा-साहिबा का युग है। दूसरी कहानी आज के राजस्‍थान के आदिल-सुचि की है। दोनों कहानियों की तक़दीर एक सी है। अफ़सोस

Ranbir Kapoor को फ़िल्मफेयर अवार्ड दिलाने वाला किरदार ‘संजू’

Ranbir Kapoor के अभिनय से सजी संजू आधिकारिक रूप से संजय दत्त के जीवन पर बनी थी। लेकिन यह उनकी पूरी जीवनी नहीं। क्योंकि फिल्म मुख्य रूप उनके जीवन के दो घटनाक्रमों पर केंद्रित रही । पहला संजू के नशे की लत में फंसने और उससे उबरने का संघर्ष।

तहज़ीब की मिसाल बनने वाले अभिनेता ‘फ़ारुख शेख’

फारुख शेख की पहचान शहर-ए-सिनेमा में अकीदत व तहज़ीब का किरदार की थी। फारुख ने बदतमीज़ होने के चलन को बेहतरीन तरह से मात दी थी। ऐसा नहीं कि फिल्म इंडस्ट्री में तहज़ीब का सारथी बाकी नहीं, लेकिन फारुख साहब एक अलग मिसाल थे। कहना होगा कि बहुत