रिपोर्टर- अनिल सर फिल्म ‘मलंग’ में आप जो किरदार निभा रहे है उसको लेकर फिल्म के डायरेक्टर मोहित सूरी ने कहा था कि इस रोल के लिए उन्हे ऐसा एक्टर चाहिए जिसको लोग हीरो जैसा देखना पसंद करें । ऐसेमें आपको लिए कितनी बड़ी चुनौती थी ?
अनिल कपूर – फिल्म में मेरा किरदार बहुत गुस्से वाला है और साथ ही साथ थोड़ा सा वायलेंस भी…दरअसल उसके अंदर गुस्सा विभाग की कार्य प्रणाली को लेकर है…फिल्म में मैं गोवा में रह रहे एक पुलिस ऑफिसर का किरदार निभा रहा हूं .. जिसको लगता है कि ये वो गोवा नहीं रहा जो पहले था । जिसको लेकर वो हमेशा गुस्से और उलझन में रहता है । मैंने पहले भी ऐसे बहुत सारे ‘गुस्से वाले’ किरदार निभाए हैं पर ये किरदार थोड़ा अलग है…. इस किरदार में जो अलग बात है वो ये है कि .. मेरा किरदार अपने गुस्से को भूलने के लिए गलत चीजों में पड़ जाता है… उसको लगता है अगर वो शराब पीने लगेगा तो वो अपना गुस्सा भूल जाएंगा…फिर धीरे धीरे वो और भी नशे करने लगता है ….गलत चीजों में पड़ जाता है… ड्रग्स लेने लगता है…उसको कुछ समझ नहीं आता कि आखिर वो कर क्या रहा है । पहली बार जब मैंने अपने रोल के बारे में सुना तब मुझे लगा कि मैं ये किरदार कैसे निभाऊंगा क्योंकि मैंने इससे पहले इतना डार्क रोल नहीं किया था..पर हां ये किरदार देखने में लोगों को बहुत मजा आएंगा …लोग इस किरदार को बहुत एंजॉय करेंगे । मुझे इस रोल को समझने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी । मेरा मोटिव बस ये रहता है कि मैं अपने काम से फिल्म को निखार सकूं ।
रिपोर्टर- पुलिस के किरदार की बात की जाए तो आपने अब तक ऐसे बहुत सारे किरदार निभाएं हैं जिसमें आप पुलिस के रोल में दिखे हैं जैसे राम लखन, शूट आउट एट वडाला, गुरुदेव और भी कई सारी फिल्में…तो जैसा की आपने अभी कहा कि ये किरदार थोड़ा अलग है…तो …. ऐसा किरदार निभाना आपके लिए आसान था या मुश्किल ?
अनिल कपूर- अब देखिए हर चीज़ आसान भी होती है हर चीज़ मुश्किल भी होती है आप उसको कैसे देखते हो आप के उपर है… कभी कभी क्या होता है आपका कोलेबरेशन इतना अच्छा होता है कि वो आपका काम आसान कर देता है और कई बार चीजें अलग हो जाती है…वैसे मेरा तो हमेशा से रहा है कि डायरेक्टर की बात मानो….मैं डायरेक्टर की सुनता हुं…. फिर भी होमवर्क के तौर पर थोड़ा वर्कशाप, रिसर्च की । कुछ फ़िल्में देखी उस से रिलेटेड कौन सी विदेशी अंतरराष्ट्रीय फ़िल्में बनी हैं…. मेरे बेटे हर्ष ने एक, दो फ़िल्मों के बारे में बोला की पापा यह फ़िल्में देखो । एक फिल्म देखने के बाद मुझे लगा कि ये किरदार तो मेरे किरदार से मिलता जुलता है…जैसे मेरा रोल है वैसा ही वो रोल था ….एक और फ़िल्म थी वो भी देखी …. तो वहीं मैने कुछ अलग करने के लिए मोहित से बोला की मुझे अपने रोल में थोड़ी मैडनेस चाहिए… उसकी हंसी अलग हो …किरदार ऐसा ना लगे कि पहले कहीं देखा हो टाइप…लोगों को मेरा किरदार देखने में मजा आए …मुझे ऐसी हंसी चाहिए थी जो बनावटी ना लगे… रियल के साथ साथ एंटरटेनमेंट भी होना चाहिए था । वहीं गोवा पुलिस के स्टाइल और पर्सनैलिटी को मैच करने के लिए वहां के सिस्टम को जानने के लिए ..मैंने वहां के पुलिस टीम से जाकर बात की जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है उनसे बातचीत की …तो ये सब चीज़ें थी…फिर जैसे जैसे सीन थे ऐसे परफॉर्म किया ।
रिपोर्टर- सर इस साल 11 फरवरी को आपकी फिल्म ‘पुकार’ को 20 साल पूरे होने वाले है …इस फिल्म के लिए आपको नेशनल अवार्ड भी मिला है … क्या कहेंगें ?
अनिल कपूर – अरे क्या बात कर रहे हो 20 साल हो गये पुकार को (हसंते हुए)…. पुकार फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है ..पर हां अगर मुझे उसके क्लाइमेक्स को बदलने को कोई कहता तो मैं बदल देता …बहुत मेहनत की थी लेकिन फल नहीं मिला, थोड़ी गड़बड़ थी फिल्म में जैसे फिल्म में माधुरी मर जाती है इससे फिल्म को नुकसान हुआ..
रिपोर्टर- आप खुद को इतना अच्छा मेनटेन करते हैं, एनर्जी ,हंगर, हर चीज़ को संभाले रखना सालों से कैसे कर लेते हैं?
अनिल कपूर – मेरे लिए मज़ा करना किसी के लिए पार्टी मे जाना, पैसा कमाना,या हॉलीडेज पर जाना , नई प्रॉपर्टी खरीदना,गाड़ी खरीदना , ड्रिंकिंग और सोना और बहुत सारी चीज़ें है मेरे लिए जो मेरे काम से अलग हैं.. जब मैं काम करता हूं तो मैं ज्यादा खुश रहता हूं.. बस यही सब है जो बरकरार रखा है।
