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रोमन पोलांस्की वाली द घोस्ट राइटर

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      ये वो फिल्म है जिसे रोमन पोलांस्की ने बनाया है,,क्या नाम नहीं बताया मैने..वो मैने हेडर में लिख रखा है..”THE GHOST WRITER” साल 2010 में आयी थी शायद, अब साल के लिए मैं जाके गूगल नहीं करना चाहता बस देखना चाहता हूं कि मुझे याद है कि नहीं,,ये गणना कुछ ऐसे सही लगती है मुझे कि 2011 में मतलब इस फिल्म के रिलीज़ होने के एक साल बाद एक फिल्म आयी थी, रोमन पोलांस्की साहब की ही, जिसका नाम मुझे नहीं याद…चूंकि मैने 2011 वाली फिल्म उनकी मिस कर दी और अबतक वो देखी नहीं गई इसलिए याद है कि द घोस्ट राइटर साल 2010 में परदे पर आयी थी। ग़लत भी अगर ये जानकारी है तो आप दुरूस्त कर लें मुझे कोई आपत्ति नही..रोमन पोलांस्की..नाम तो सुना होगा? सिनेमा के स्टूडेंट से लेकर सिने हिस्टोरियन्स तक के लिए बड़े अदब के विषय हैं रोमन पोलांस्की ज़ाहिर है सिर्फ फिल्मों में उनके बेहतरीन काम के लिए मगर रील से जुदा रियल लाइफ में उनपर कुछ दाग हैं जिनपर रोमन पोलांस्की भी शर्मिंदा होते रहते हैं। खैर हम यहां उनकी रियल नहीं, रील लाइफ भी नहीं बल्कि उनकी एक फिल्म जो कि उस लंबी रील लाइफ का बेहतर हिस्सा है उसका ज़िक्र करने बैठे हैं..

द घोस्ट राइटर एक नॉवेल जो कि “द घोस्ट” नाम से आया था उसी पर लिखी गई फिल्म है, बज़ाहिर किताब के राइटर भी स्टोरी-स्क्रीनप्ले क्रेडिट में अपना नाम देखने के ख्वाहिशमंद रहे तो सभी की तरह उन्होने भी फिल्म को राइटिंग डिपार्टमेंट में डेवलप किया है…नाम भी आता है उनका..रूकिये इसके लिए मुझे गूगल देखना होगा..रॉबर्ट हैरिस है उनका नाम..फिल्म एक फ्रेंच-जर्मन-ब्रिटिश कोवेंचर है और ये बात भी मुझे गूगल ने बताई..

चलिए अब फिल्म पर पूरी तरह से आते हैं तो कथानक कुछ ऐसा है कि फॉर्मर ब्रिटिश प्राइममिनिस्टर एडम लैंग(पियर्स ब्रासनेन) की ऑटोबायोग्राफी लिखने के लिए घोस्ट राइटर की तलाश जारी है, गौरतलब है कि घोस्ट राइटर माने वो आदमी होते हैं जो बगैर पहचान या क्रेडिट के बड़े लोगों के लिए लिखते है जबकि बतौर राइटर नाम उन बड़े लोगों का जाता है जो सौ दो सौ शब्द से ज्यादा उस दस्तावेज़ में सहयोग नही देते। हां कहानी उन बड़े लोगों या उनके ज़रिए आने वाले काम या कॉन्सेप्ट की होती है। वैसे लैंग की ये बॉयग्राफी पहले से ही माइक मैकेरा नाम के उनके पुराने भरोसेमंद घोस्ट राइटर ने बहुत हद तक पूरी करने की कोशिश की मगर वो एक रहस्यमयी हादसे में मारा गया। इन सारी परिस्थितियों और पॉलिटिकल मिज़ाज के मद्देनज़र मिस्टर लैंग की बॉयग्राफी पूरी करने का ज़िम्मा अब नये घोस्ट राइटर जिसका किरदार इवान मैकग्रेगर ने निभाया है उस पर है।

पूरे दस्तावेज़ को पब्लिश होने से पहले बेहद गोपनीय रखना चुनौती है और जल्दी से जल्दी इसे पूरा करने की एवज़ में नये घोस्ट राइटर को मोटी रकम और तमाम खर्चों के वहन की ज़िम्मेदारी के प्रस्ताव के साथ अमरीका के किसी अनजान टापू पर काम करने के लिए रखा जाता है। इस लगभग निर्जन जगह पर शानदार ऑफिस है मिस्टर लैंग का जिसे संभालती हैं उनकी निजी सहयोगी एमेलिया(किम कैटरल) जिसका हर बात में प्रभाव है मगर वो किसी बात से जल्दी प्रभावित नहीं दिखती,, वैसे यहां लैंग की वाइफ रूथ(ओलिविया विलियम्स) भी रहती है। नये काम में शुरूआती कुछ दिन घोस्ट राइटर के लिए सामान्य रहते हैं लेकिन इन सबके बीच कुछ ना कुछ ऐसा होता है जो एक घोस्ट राइटर को जासूस बनाने लगता है। बहुत सी साज़िशें और कई लेयर के किरदार आपको रोमांचित करते हैं लेकिन रोमन पोलांसकी अपनी फिल्ममेकिंग से कुछ ऐसे दृश्य रचते हैं जिन्हे बार बार देखने का दिल करता है।

ये पॉलिटिकल थ्रिलर तो है ही साथ ही ये आपको सोचने के लिए मजबूर कर देती है कि राजनीति के राज में नीतियां किस तरह वक्त के हिसाब से बदलती रहती है। रत्तीभर भी उन ज़िदगियों की परवाह करने का उन कद्दावरों के पास वक्त नहीं है जो पॉवर या उनके प्लान के हिसाब स पर्फेक्ट नहीं है। जी हां पर्फेक्ट,,कहने को तो दुनिया में कुछ भी परफेक्ट नहीं है लेकिन यहां तख्त और ताज ना भी हो तो भी बहुत कुछ परफेक्ट चाहिए। इस फिल्म को देखते वक्त मेरे ज़हन में ख्याल आया कि क्यों कोई अच्छा हिंदी राइटर ऐसी कंक्रीट कहानी को एडॉप्ट नहीं करता है..ऐसी चुस्त कहानियां भारतीय परिदृश्य में तमाम मसालों के साथ बनायी जा सकती है। ज़रूर देखिए द घोस्ट राइटर..

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