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Ford v Ferrari : दो लोग जो सही मायने में एक टीम थे

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डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर एक फिल्म है समय निकालकर देख लीजिएगा. फिल्म का नाम है फोर्ड वर्सेज फरारी (Ford v Ferrari)  2 घंटे 34 मिनट की इस फिल्म की कहानी सिर्फ फोर्ड और फरारी की रेसिंग की दुनिया में वर्चस्व की जंग नहीं है बल्कि ये कहानी है उम्मीद की, कुछ पीड़ादायक हार्टब्रेक की, कॉर्पोरेट्स की दुनिया में उन लोगों के चेहरे साफ साफ दिखाने की जिनको सबसे ज्यादा खतरा योग्य लोगों से महसूस होता है और कैसे ये मीडियॉकर लोग किसी टैलेंट का आत्मविश्वास गिराने की हर संभव कोशिश करते हैं और अक्सर कामयाब भी हो जाते हैं। ये कहानी है उस दोस्ती की जिसमें दो लोगों के सपने एक जैसे थे, जबकि वो दो लोग बिलकुल जुदा थे। कैसे अपना ईगो, अपने मतभेद, अपना बैकग्राउंड सबकुछ पीछे छोड़ दो लोग एक सपने को साकार होता देखने के लिए जी जान लगा देते हैं फोर्ड वर्सेज फरारी की कहानी का सबसे खास हिस्सा यही है।

ये 60 का दौर है…दो मोटर निर्माता कंपनी रेसिंग की दुनिया में अपने नाम के किसी जादू की तरह छा जाने के लिए बेकरार हैं…फोर्ड मोटर कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट ली हेनरी फोर्ड -2 को कैश की किल्लत से जूझ रही फेरारी को खरीदने का प्रस्ताव देता है ताकि वो अपने कार सेल्स को बढ़ा सकें..बातचीत की मेज पर डील की बात शुरु होती है लेकिन इन सबके बीच फेरारी डील में झोल करती है और चूंकि उसे फिएट से ज्यादा अच्छा प्रस्ताव मिल रहा होता है इसलिए वो फोर्ड को उलझाकर धोखा देती है…फोर्ड को ये अपमान बर्दाश्त नहीं होता और हेनरी फोर्ड मैनेजमेंट को आदेश देते हैं कि अगली बड़ी रेसिंग से पहले फोर्ड एक ऐसी कार और रेसर के साथ उतरे की फरारी का घमंड चूर चूर हो जाए…इस काम के लिए पहले शेलबाय यानि मैट डैमन को बोर्ड पर लाया जाता है जो 1959 में मशहूर रेस को जीत चुका होता है लेकिन दिल की बीमारी की वजह से रेस ट्रैक पर नहीं जा सकता लेकिन उसे इस गेम और कार की दुनिया की बारीकी से जानकारी है, शेलबाय अपने साथ जोड़ता है केन माइल्स को जो युद्ध के दौरान ड्राइवर था और आजकल मामूली मैकेनिक है लेकिन कमाल का ड्राइवर है। कहानी इन दो लोगों की जोड़ी के नामुमकिन को मुमकिन कर देने की कहानी है ।

फोर्ड वर्सेज फरारी देखते वक्त आप जो बात बहुत अंदर तक महसूस करते हैं वो है कि कैसे अच्छे हुनरमंद लोगों को इस दुनिया ने अकेला कर रखा है। लेकिन कितना जरूरी है सपनो पर यकीन करना..सपने देखने वाले लोगों का साथ देना और किसी भी कंपनी को ये समझना कि उसकी बड़ी जीत और उपलब्धि में  हेरारकी में शामिल उसके चापलूस चमचों का नहीं माइल्स और शेलबॉय जैसे ड्रीमर्स का योगदान होता है लेकिन योग्यता को हमेशा नकारना तो प्रतिभाविहिनों का अस्र है बस यहां भी यही होता है। फोर्ड वर्सेज फरारी की सिनेमैटोग्राफी और इसका बैकग्राउंड स्कोर इस फिल्म की जान है। मगर इस फिल्म की रूह हैं क्रिश्चियन बेल..इस किरदार को देखकर आपको बहुत से अल्हड़ , जिद्दी और अपनी बात के पक्के लोगों की याद आएगी जिन्होने किसी काम को लिया तो उसको अंजाम तक पहुंचाया भले कुछ भी हो जाए। बेल ने इस किरदार को जैसे दिल खोल कर जिया हो..मुझे ऐसा लगता है कि जिस असल व्यक्ति का किरदार निभाया है उन्होने वो इंसान भी क्रिश्चियन पर फिदा हो जाता । मैट डैमन कमाल रहे है, उनकी बॉडी लैग्वेज, बैचेनी, सब कुछ बहुत स्वाभाविक है। तो कुल मिलाकर अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको इंसप्यार करे अच्छा इंसान अच्छा एसोसिएट होने की और साथ में आपको सपने पर भरोसा बढ़ाये तो जरूर देखिए।

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