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Movie Review Karnan : झकझोर कर रख देने वाली फिल्म है कर्णन

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साउथ सुपरस्टार धनुष की हाल ही में आई तमिल फिल्म कर्नन को लेकर मेरी पहली राय. ये रियल है, ये काफी रॉ है..सही मायनों में ये उस भारत की असली तस्वीर पेश करती है जो गांवों में बसता है और जहां अभी भी कुछ बदला नहीं हैं…हालांकि भले ही ये खास समय के बैकड्रॉप पर पेश की गई कहानी है….लेकिन सच्ची और बेचैन कर देने वाली फिल्म है..सबसे खास बात है अरसे बाद किसी फिल्म में ढेर सारे प्रतीकों का इस्तेमाल हुआ है..इन मेटाफॉर और सिम्बोलिज्म के जरिए ये दर्शकों को चैलेंज भी करती है कि वो इनके पीछे छुपी हुई गहरी बात को समझें…

कहानी दक्षिण भारत के एक गांव की है जहां आज भी कोई बस नहीं रुकती …गांव की बेटी को कॉलेज जाने के लिए उस इलाके से बस लेनी है जहां उपरी तबका रहता है जो इस गांव के लोगों को हमेशा से अपने पैरों तले रौंदता आया है…गांव का लड़का कर्णन यानि धनुष जो बुद्धि बल सभी में उनसे बेहतर है वो भी सिर झुका के रहता है..इस गांव ने उच्च वर्ग के आगे सिर झुकाकर रहने को अपनी नियती मान लिया है …लेकिन जब एक दिन पानी सर से उपर चला जाता है तो विद्रोह होता है जिसका अगुवा है कर्णन..जो भयानक खूनी संघर्ष में बदल जाता है..सरकार. सिस्टम सभी मिलकर कैसे दमन पर उतारु हो जाते हैं फिल्म में दिखाया जाता है..

कर्णन के शुरुआती 1 घंटे गांव के रहन सहन, वहां के समाज, लोगों , बच्चे बूढ़े जवान, लड़कियां वृद्ध महिलाएं इन सभी की जीवनशैली को दिखाने रंग ढंग, व्यवहार को बारीकी से दिखाते हैं..इसके बाद फिल्म अपने कोर इश्यू पर आती है..हो सकता है कि बहुत से लोगों को ये शुरुआती 1 घंटे ऐसा लगें कि फिल्म खींची गई है..लेकिन यही शुरुआती 1 घंटे हमें उस परिवेश से रिश्ता बनाने में मदद करते हैं…मेरे लिए फिल्म का सबसे उम्दा पहलु यही है..छप्पर से खोंसकर रखे गए चप्पल को पहनने का सीन हो..गांव की पंचायत लगी हो…किसी की मृत्यु पर होने वाले संस्कार हों..सभी बहुत डिटेलिंग के साथ दिखाए गए हैं..

फिल्म का सबसे मजबूत पहलु है इसकी कहानी जो बहुत इंटेंस है..ये आपको डिस्टर्ब कर देने वाली कहानी जरूरी कहानी है..खासकर हिंसा वाले सीन झकझोर कर रख देंगे..फिल्म की सिनेमैटोग्राफी आला दर्जे की है..कोई खास लोकेशन नहीं बस एक गांव लेकिन उसे फिल्माने में कैमरे से कमाल का करतब दिखाया गया है..थनि इश्वर का कैमरा वर्क बेजोड़ है..इस फिल्म को लिखा और डायरेक्ट दोनों मारी सेल्वाराज ने है..और उनकी तारीफ करना मतलब सूरज को दिया दिखाना..वो अपनी फिल्म का टाइटल कर्णन यानि कर्ण देते हैं..और महाभारत के उस पात्र के साथ हुए अन्याय को फिल्म का मूल बनाकर नया महाभारत रचते हैं..वैसे तो ये कहानी मिड नाइंटीज में हुए एक असल घटना पर आधारित है लेकिन मारी सेल्वाराज ने इस बात का ख्याल रखा है कि ये रियल होते हुए भी फिल्म सी लगे जिसमें दर्शक इन्वेस्टेड हों..

एक्टिंग की बात करें तो धनुष अव्वल हैं..जब जब वो गंवई किरदार निभाते हैं तो अलग की स्तर का काम नजर आता है..ये किरदार हीरोइक भी है और रियल भी.. और इसका बैलेंस कमाल का पेश करते हैं धनुष,,बाकी के किरदार में रजिशा वियजन, एम पी माइकल उर्फ लाल हों या योगी बाबू समेत बाकी किरदार..दमदार हैं…फिल्म का म्यूजिक भी फिल्म के साथ जाता है..फिल्म में जो कमी मुझे नजर आई वो बस इतनी कि कई बार ये रियलिटी का दामन छोड़ काफी फिल्मी भी हो जा रही थी..जो मुझ जैसे दर्शक को खटकता है..बाकी मेरी तरफ से फिल्म को 5 में से 4 स्टार्स..जरूर देखिए…ये मास्टपीस है..

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