MOVIE REVIEW ‘ARTICLE 15 : ‘”फ़र्क बहुत कर लिया..अब फ़र्क लाएंगे”
ARTICLE 15 को मुल्क के बाद अनुभव सिन्हा ने अपनी नई कहानी के तौर पर चुना और एक बार फिर वो अच्छे नंबरों से पास हुए हैं..फिल्म का पूरा रिव्यू कर रहे हैं शौनक जैन..
फिल्म – आर्टिकल 15 (ARTICLE 15)
रेटिंग -4/5
अनुभव सिन्हा की फ़िल्म ARTICLE 15 एक बहुत ही ज़रूरी फ़िल्म है। ये फ़िल्म समाज के आईने का काम करती है। आज हम शहरों में रहकर कहते हैं कि कोई भेद भाव नहीं है मगर ये हमे रियल इंडिया की गांव में जो बसता है वहां कि सच्चाई सामने रख कर बहुत कुछ दिखाती है। बाबा अम्बेडकर ने इतने सालो पहले हमारा संविधान बनाया था और हम आज भी उसे पूरी तरह नही मानते है।
कैसे भेद भाव हमारे आसपास होता है और हम खुद उसे सिर्फ नज़रअंदाज़ ही नहीं करते बल्कि उसका हिस्सा भी बन गए हैं। अपने घर पर काम करने वालों के बर्तन अलग रखना, जो सफाई करते हैं उनके साथ बुरा सलूक करना..और भी ऐसे कई और पहलू है जो हमें देखने को मिलते है।

कहानी अयान रंजन (आयुष्मान खुर्राना) की है जो एक विदेश में पला बढ़ा युवक है जिसने अभी अभी पुलिस की नौकरी ली है। उसकी पहली पोस्टिंग होती है यूपी के एक छोटे गाँव में जिसका नाम है लालगांव। ये एक आउटसाइडर का नज़रिया है जात-पात से संबंधित घटनाओ से जो उसके आस पास होती है। बहुत ही अच्छे से लिखी गयी और बनाई हुई ये एक बढिया कहानी है।
फ़िल्म हार्ड हिटिंग है और असल घटनाओ पर आधारित है। ऐसे कई सीन्स है जो आपको असहज भी करेंगे। एक सीन में एक आदमी गंदी मेनहोल में घुस कर उसे साफ करता है और पूरा गंदगी से लदा बाहर निकलता है। बहुत ही बारीकी से अनुभव सिन्हा ने हमारे आस पास होते इस भेद भाव को सामने लाया है।
अयान को दो नाबालिक लड़कियों के बलात्कार और हत्या का केस सुलझाना है। ये करते करते उसके सामने और अयान के ज़रिये दर्शकों के सामने बहुत से कड़वे सच उजागर होते हैं। कैसे पुलिसवाले भी इस भेद भाव में शामिल हैं..और उनकी एक नजरअंदाजी की वजह से इतने गुनाह हर रोज होते हैं।
आयुष्मान के साथ साथ फ़िल्म में और भी ज़बर्दस्त और बेहतरीन अभिनेता है। स्योनी गुप्ता और ज़ीशान अयूब बहुत बखूबी अपना किरदार निभाते हैं। हालांकि ऐसा ज़रूर लगता है की ज़ीशान के किरदार का और ज़्यादा उपयोग किया जा सकता था मगर फिर भी बहुत अच्छा काम किया है। कुमुद मिश्रा और मनोज पाहवा ने भी पुलिस वालो के रूप में उम्दा पर्फोर्मेंसेस दी है। बड़े ही अच्छे तरीके से उनके ज़रिये पोलिस के नज़रिए को दर्शाया गया है और कैसे काम में भी जात बीच में आ जाती है ये मजबूती के साथ पेश किया गया है.. ईशा तलवार अयान यानी आयुष्मान की प्रेमिका की भूमिका निभा रही है। वो उनकी मोरल कंपास है हर बड़े ही खूबसूरती से आपने किरदार को निभाती हैं। देखा जाए तो फ़िल्म की कास्टिंग भी इसकी सबसे बड़ी मजबूत कड़ी है.
अनुभव सिन्हा का निर्देशन बहुत स्ट्रॉंग है..गौरव सोलंकी की कहानी और स्क्रीनप्ले बहुत सटीक है। कहीं भी फ़िल्म बोरिंग या स्लो नही लगी है। उन्होंने ध्यान रखा है की वो हर चीज़ रीयलिस्टिक ही बतायें और किसी भी चीज़ को बढ़ाचढ़ा कर न दिखाएं और इस बात में वे सफल भी रहे हैं। मुल्क के बाद ये उनकी अगली फ़िल्म है और साफ दिख रहा है कि अनुभव एक बड़े ही अनुभवी और मास्टर डायरेक्टर है। डॉयलोग्स भी जबरदस्त और स्ट्रांग है जो सही से बाते बताते है।
फ़िल्म में वैसे तो कोई गाने है नही क्योंकि गानों की जगह नही है मगर फ़िल्म का जो बैकग्राउंड म्यूजिक है वो आपको पकड़ में रखता है। वो हर सीन को और हिटिंग बनाता है और मूड सेट करने में मदद करता है। फ़िल्म के आखिरी में एक गाना है जो पूरे फ़िल्म के मैसेज को कह जाता है..
आर्टिकल 15 एक ऐसी फ़िल्म है जो हर नागरिक को देखनी चाहिए और समझनी चाहिए। ये जनजागृति का काम करती है और आपको सोचने पर मजबूर करेगी। खास कर कि आज के हालातो में। फ़िल्म में सही कहा है “यही तो लड़ाई है। उस किताब की चलानी पड़ेगी। उसी से चलेगा देश”।
इस फ़िल्म को में 4/5 देना चाहूंगा।
