FilmCity World
सिनेमा की सोच और उसका सच

Interview Shahid Kapoor : ”पिता के साथ अपने रिश्ते पर पूरी किताब लिख सकता हूं”

0 828

रिपोर्टर –Shahid Kapoor फ़िल्म के गानों पर पहले तो आपको बधाइयां देना चाहेंगे। काफी तारीफ हुई है उनकी। क्या खयाल है आपका फिल्म के म्यूजिक पर ?

Shahid Kapoor – जी हाँ, मुझे लगता है काफी वक़्त से ऐसी एक सोलफुल गानो की एल्बम आई नहीं है जिसमे आइटम सांग्स नहीं हैं। फ़िल्म की कहानी को नज़र में रखते हुए ओरिजिनल गाने बनाए गए हैं। बहुत सारे नए आर्टिस्ट्स हैं इसमे चाहे वो सचेत–परंपरा हो जिन्होंने बेखयाली और सोणेया किया है या फिर विशाल का कैसे हुआ और और एक गाना है पहला पहला प्यार। तो एक नयापन है फ़िल्म में, जब ये फ़िल्म पहले भी बनी थी तब भी उन अभिनेताओ में बहुत फिल्मे नहीं की थीं तो वो फ्रेशनेस है।कभी कभी मुझे ऐसा लगता था कि क्या मैं कबीर का किरदार निभा पाऊंगा क्योंकि लोग मुझे काफी सालों से देख रहें हैं। तो हमने म्यूजिक में भी वही फ्रेशनेस और नयापन रखने की कोशिश की है और बेखयाली जो गाना है वो कबीर सिंह के अंदर के दर्द और अग्रेशन को दिखता है तो मेरे लिए वो पूरी एल्बम का चेहरा है गाना।कुछ फिल्में कहानी और प्लाट से चलती है आगे और कुछ से जैसे मेरी फ़िल्म कमीने आई थी जिसमे वो बैकग्राउंड ट्रैक था जिससे फील आया। तो इसमे भी वो बैकग्राउंड और बेखयाली का अहम भाग था फ़िल्म के मूड को बनाना और मैे बहुत खुश हूँ कि ऐसा हुआ है और लोगो को वो पसंद आया है। 

रिपोर्टर –खासकर जब भी ऐसे सीरियस और इंटेंस किरदारों की बात आती है तब आप एक अलग लेवल पर चले जाते हैं। तो ऐसा करने के लिए क्या कुछ अलग तैयारी होती है या फिर जैसा डायरेक्टर बोले वैसा आप करते हो?

शाहिद- मुझे नहीं पता सच में आप किसी भी अभिनेता से पूछिए, हम अपनी हर फ़िल्म में उतनी ही मेहनत करते हैं और कभी कभी वो बस एक कनेक्ट बन जाता है और फिल्में बड़ी अनप्रेडिक्टेबल चीज़ें होती हैं तो आप कुछ कह नहीं सकते और देखिए ऐसे किरदार मुझे और गहराई में जाने देते है और कंप्लेसिटी बनाने में मदद करते है और ये एक दर्शक के तौर पर जब मैं भी फिल्में देखता हूँ तो मुझे भी अच्छा लगता है। बहुत मज़ा आता है कुछ ऐसा करने में जिसकी आपको खुद से भी आशा न हो और ये किरदार यही करने का मौका देते है।

रिपोर्टर –मुश्किलों की बात करें तो हमने अर्जुन रेड्डी देखी है। तो ये फ़िल्म और उस फ़िल्म का प्लॉट एक होते हुए भी जो नयापन और फ्रेशनेस है वो बरकरार रखना, कितना मुश्किल था?

शाहिद- तो सबसे पहले ये कह दूं कि मैने अर्जुन रेड्डी देखी है, मुझे बहुत अच्छी लगी है और मैं उसका फैन हूँ मगर जब मैं एक अभिनेता के रूप में कबीर सिंह के किरदार के निर्माण में हिस्सा लेता हूँ .. उसे निभाता हूँ तो मेरे लिए अर्जुन रेड्डी होता ही नही है। ये बहुत महत्वपूर्ण है कि मैं अर्जुन रेड्डी को अपने दिमाग से पूरी तरह बाहर फेंक दूं ताकि मैं वो नयापन ला सकूं अपने साथ। तो वही मेरा माइंडसेट था। मैं अर्जुन रेड्डी का फैन हूँ मगर कबीर सिंह की बात आती है तो अर्जुन रेड्डी मेरे लिए एक्सिस्ट ही नही करता।

रिपोर्टर –क्या आपको नहीं लगता कि आपकी पिछली फिल्मों को देखते हुए और इसे भी देखते हुए कि आप हिंसक किरदारों की तरफ बढ़ रहें हैं? 

शाहिद- देखिए हैदर तो बिल्कुल हिंसक नही था।उसे तो बदला लेने का मौका मिला तो वो बेचारा वो भी ठीक से नही कर पाया। तो हैदर बिलकुल पेचीदा किरदार था। रही बात उडता पंजाब में जो टॉमी सिंह था वो एक ड्रग एडिक्ट था और ये एक अल्कोहलिक है तो शायद वो समानता आपको दिखे। लेकिन टॉमी सिंह बहुत सेल्फिश बंदा था जो अपने बारे में ही सोचता था सिर्फ लेकिन यहां ये बंदा प्यार में इतना खो गया है कि अपने बारे में सोचता ही नहीं है। तो उन दोनो की परेशानियां पूरी तरह अलग हैं।

रिपोर्टर –अगर आप कबीर सिंह नही होते तो कौन हो सकता था?

Shahid kapoor- मुझे ऐसा लगता है कि एक अच्छा अभिनेता वही होता है जिसे लोग कहें कि तुम ये नही कर सकते हो और फिर वो उन्हे गलत साबित करके दिखाए.. तो कोई भी हो सकता है जिसमे हूनर हो।

रिपोर्टर –वेब सीरीज़ की दुनिया पर आपका क्या नज़रिया है और क्या कुछ आपके प्लान्स हैं?

शाहिद- हाँ मुझे कुछ ऑफर्स आए हैं और मुझे लगता है कि ये एक बहुत अच्छा मंच है, मैं खुद भी बहुत वेब कंटेंट देखता हूँ। वो अभी भारत में नया है, अभी अभी आ रहा है और अपने दर्शकों को पहचान रहा है। मुझे लगता है कि ये आगे जाकर और भी लोकप्रिय होगा और ये हमें कहानियां बताने की आज़ादी देता है बिना किसी वक़्त की पाबंदी के। मैं भी इस नयी दुनिया में  कुछ करने को तैयार हूँ बस मुझे उसमें एक एक्साइटमेंट महसूस होनी चाहिए, तो अगर कुछ ऐसा आता है तो मैं ज़रूर करूँगा।

रिपोर्टर –शाहिद इस फ़िल्म के एक भाग में हमें कबीर और उसके पिता की रिलेशनशिप के बारे में भी दिखाया जाता है। तो आपकी अपने पिटा के साथ जो रिलेशनशिप है वो कैसे इन सालों में बदली और बनी है उस बारे में कुछ बताइये?

शाहिद- आपने जो पूछा उस पर तो मैं पूरी किताब लिख सकता हूँ। बहुत मुहब्बत और इज़्ज़त है पापा के लिए। हमारी रिलेशनशिप एक एडल्ट रिलेशनशिप है हम दोस्त जैसे हैं और हमने शायद अन्य पिता बेटों जैसे बहुत समय नहीं बिताया हो एक दूसरे के साथ क्योंकि मेरे माता–पिता अलग हो गए  लेकिन इसके बावजूद हमारी काफी अच्छी बॉन्डिंग रही है।मैं खुशकिस्मत हूँ कि मैं उनका काम देखते हुए बड़ा हुआ हूँ। उनकी बहुत सी अच्छी बातें हैं जो मैं खुद में लाने की कोशिश करता हूं और मेरा सबसे यादगार समय वो होता है जब पापा और माँ मिलकर मेरे बच्चों के साथ खेलते हैं।

रिपोर्टर –हमने आपको शुरुआत में  “चॉकलेट ब्वॉय” के अवतार में देखा फिर कमीने आयी और आपकी पूरी इमेज बदल गई। क्या वो आपके कैरियर में एक टर्निंग पॉइंट था?

शाहिद- बिलकुल 100% क्योंकि कमीने ने मुझे उस चॉक्लेट बॉय वाले जाल से बाहर आने का मौका दिया। लोगो ने मुझे इस जाल में डाल दिया था और मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगता था इमेज में बंधना। मुझे कमीने ने उससे बाहर आने का मौका दिया। तो वो टर्निंग पॉइंट ज़रूर थी।

रिपोर्टर –आपको किसके गुस्से से सबसे ज़्यादा डर लगता है?

शाहिद- अपनी बीवी के गुस्से से..सच में उसका गुस्सा नहीं सहन होता क्योंकि फिर हमारे बीच के रिश्ते में एक तनाव आ जाता है जो समय लेता है सामान्य होने में। 

रिपोर्टर- लेकिन आप वैसे तो बड़े शांत स्वभाव के लगते हैं। तो ये गुस्सा रोल के लिए लाते कहां से हैं?

शाहिद– (मुस्कुराते हुए) डोंट जज ए बुक बाय इट्स कवर…

रिपोर्टर –आप हमें उस किस्से के बारे में बता सकते हैं जो बेल्जियम में हुआ था?

शाहिद- मैं और मेरी मां बेल्जियम में थे और वो बहुत खूबसूरत और यंग थी जब उन्होंने मुंझे जन्म दिया और फिर वहां एक लड़का आया उनसे बात करने और कहा कि क्या हम बाहर जा सकते हैं और तभी मैं आया और उसकी पैंट पकड़ी क्योंकि कॉलर तो मैं पकड़ नहीं सकता था और कहा “शी इस माय मदर यु लीव फ्रॉम हियर नाउ“। तो हाँ, मैने कुछ ऐसा कहा, तो देखा जाए तो मैं हमेशा से ही कबीर सिंह जैसा था।

रिपोर्टर –शाहिद जब आप प्यार की बात करते हैं तो क्या ये सच नहीं की प्रोटेक्टिव रहने में और फ़ोर्स करने में एक फाइन लाईन है? और दूसरा सवाल कि इस फ़िल्म में बहुत ज़्यादा एब्यूज दिखाया गया है क्यों?

शाहिद- देखिए आप सिर्फ वही चीज़ें नही दिखा सकते हैं जो सही और परफेक्ट हो फिर कोई भी फ़िल्म देखने क्यों जाएगा? हमने पहले ही दिखाया है की उसमे एक एग्रेसिव क्वालिटी है जो अच्छी नहीं है। हम सभी में होती है। इतनी सारी कोल्ड ड्रिंक है जो हमारे लिए अच्छी नहीं होती है, हम पीते हैं फिर भी, प्रमोट भी करते हैं। सिगरेट स्मोकिंग हानिकारक है, ऐसा वो पैक पर भी लिखा होता है, फिर भी कितने लोग करते हैं वो। हम इंसान है, हम परफेक्ट नहीं हो सकते। ये अच्छी बात है कि हम हमारी प्रोब्लम के बारे में बात करें ये कहने कि बजाए कि प्रॉब्लम है ही नहीॆ। अगर आप अपने छोटे भाई या बच्चे से बात करोगे और वो कहेगा की कोई प्रॉब्लम नही है तो आप उससे कहोगे न की पहले बात करो प्रॉब्लम के बारे में। तो ये इश्यू हमारे सोसाइटी में है , ऐसे लोग होते हैं, तो उन्हें भी रिप्रेजेंट करना ज़रूरी है।

रिपोर्टर –कियारा के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?

शाहिद– कियारा का किरदार बहुत ही महत्वपूर्ण और उतना ही मुश्किल है। मैने भी कई बार ऐसे किरदार किए  हैं चाहे वो जब वी मेट हो या पद्मावत हो और इन्हें कभी उतनी तारीफ मिलती नहीं है जितनी मिलनी चाहिए। वैसे हमेशा जो लाऊड किरीदार होता है वो सब क्रेडिट लेता है। और इसमे वो मैं हूँ मगर आप जब फ़िल्म देखेंगे तब आपको पता चलेगा कि अगर प्रीति अपना रोल नही निभाती तो कबीर भी कुछ नही होता तो जिस तरह कियारा ने काम किया है मुझे उनके लिये बहुत सम्मान है। अगर वो अच्छा काम करके आपको यकीन न दिला पाएं कि उसके लिए कोई ऐसा कर सकता है तो कबीर का फायदा नहीं। तो में पक्का कह सकता हूँ कि ये उसके कैरियर का बेस्ट पर्फोर्मेंस रहा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.