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Interview Nusrat Bharucha : ‘मैं अब ज़्यादा ज़िम्मेदार हो गई हूं’

Nushrat Bharucha की फिल्म ड्रीम गर्ल रिलीज हो गई है..फिल्म को दर्शकों का ढेर सारा प्यार मिल रहा है..उनसे रिलीज के पहले खास बातचीत की हमारे संवाददाता शौनक जैन ने। पेश है बातचीत के खास अंश..

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रिपोर्टर – Nushrat क्या आपको ऐसा लग रहा है कि आप फाइनली कह सकती हैं कि आप पंचनामा को पीछे छोड़ चुकी हैं?
Nushrat – नहीं ऐसा नहीं सोचती मैं.. पंचनामा मेरे दिल के बेहद करीब है तो मैं पीछे छोड़ना नहीं चाहती हूँ उसे.. जैसे अगर आज भी कोई उसके बारे में बात करना चाहे तो बहुत खुश होकर बात करूंगी ।

रिपोर्टर -पंचनामा गर्ल से ड्रीम गर्ल बनने का सफर कैसा रहा?
नुशरत –सही मायनों में मैं ड्रीम गर्ल हूँ नही, फ़िल्म है मेरी और पंचनामा गर्ल भी मैं  नही थी, वो फ़िल्म लड़कों की थी। मगर सफर काफी दिलचस्प रहा है। यार पंचनामा कोई करना नहीं चाहता था उस वक़्त और ड्रीम गर्ल भी मुझे लगता है अगर आप किसी और अभिनेत्री को देते तो वो कहती की ड्रीम गर्ल मेैं हूँ नही तो करके करूं क्या। मगर मुझे लगता है कि कुछ कहनियां ऐसी होती हैं जो बननी चाहिए और लोगो तक पहुंचनी चाहिए और अगर हम एक्टर्स उन्हें बनने नहीं देंगे तो कैसे चलेगा और अगर मुझे मज़ा आ रहा है उसमे काम करके, तो भले ही मैं ड्रीम गर्ल नही हूँ तो मैं खुशी से कर लुंगी क्योंकि इंडस्ट्री में अपनी एक पहचान बनाना बहुत मुश्किल काम है, खासकर कि मेरे लिए जहां मेरा कोई कनेक्ट नही है। ना मेरी फैमिली का कोई कनेक्ट है या किसी से दोस्ती है तो जो है वो सब खुद से ही बनाया है और खुद से ही करती आयी हूँ तो बस उसी वजह से की सब खुद किया है मुझे हर चीज़ बहुत स्पेशल लगती है। तो मुझे अपनी जर्नी बहुत दिलचस्प लगती है और मैने हर पिक्चर में कुछ अलग किया है जो लोग देख कर कहेंगे कि ये कैसे किया, ये क्यों किया। तो मुझे वो अच्छा लगता है।

रिपोर्टर-क्या आपको आपका हैप्पी स्पेस मिल गया है?
नुशरत – हाँ मैं अभी अपने हैप्पी स्पेस में हूँ। मुझे लगता है कि जब मैने फिल्मेें करना शुरू किया था तब मुझे नही पता था या लगता था कि मैं फुल-टाइम फिल्में करूँगी। फिल्में बस मेरे साथ हो गईं.. कुछ ऐसा ही हुआ की मेरी किस्तम इसके साथ जुड़ी हुई थी..कई फिल्मों के लिए ऐसा हुऐ कि और कोई एक्ट्रेस नहीं कर रही रोल तो  नुशरत से पूछ लो। मैने पंचनामा को मना किया था पहले। वो इसीलिए था क्योंकि मैने तभी लव सेक्स और धोखा की थी और उसके ठीक बाद कमर्शियल फिल्म मुझे नहीं समझ आयी। मगर मैने भी किसी पर भरोसा किया, किसी ने मुझ पर भरोसा किया और मैने कहा कि मैं भी उतने ही एफर्ट्स डालती हूँ जितने उन्होने डाले। तो वो हो गया और मैं यहां हूँ आज।

रिपोर्टर -आपका पहले ऐसा था कि पिक्चर आ गयी तो आपने कर ली। क्या अभी नही ये सोच?
नुशरत- बिल्कुल नहीं यार।पीकेपी-1 के बाद ही बदल गया। क्योंकि जब बो सक्सेसफुल हुई तो मुझे खुद एक ज़िम्मेदारी महसूस हुई कि अगर आप एक फ़िल्म से इतने लोगों को प्रभावित कर सकते हो तो ये एक पावर है और इसको आप अच्छे से इस्तेमाल करें तो आप इतने लोगों तक पहुंच सकते हैं और इतना कुछ कर सकते है। तो वो पहली बात थी और दूसरी ये कि मुझे लगा कि मुझे अपनी कॉलिंग मिल गयी है। वो पीकेपी 1 के बाद हुआ था। LSD में मुझे लगा कf मैने कुछ तो किया मगर वो क्या था मुझे उसकी समझ नहीं थी तभी। फिर पीकेपी-1 के बाद मुझे समझ आया, मैने ट्रेनिंग की और अपने आपको ग्रूम किया और फिर वहां से शुरुआत हुई। तो उसके बाद ऐसा नही था की आ गयी तो कर लो कोई भी पिक्चर।

रिपोर्टर -आप बहुत ही अच्छी डांसर हैं तो आपको उसके लिए किनसे प्रेरणा मिली?
नुशरत- मेरी प्रेरणा हमेशा से ही माधुरी दीक्षित जी रहीं ,वहीं मधुबाला जी और उनके हाव भाव मुझे बहुत प्रभावित करते रहे..बाद में मुझे उर्मिला बहुत पसंद थीं। मुझे ममता कुलकर्णी, करिश्मा और रवीना बहुत पसन्द हैं। मतलब गोविंदा के सामने आप उन लोगो को देखते हो तब आपको पता चलता है।

रिपोर्टर- आप और किस तरह की फिल्में करना चाहती हैं ?
नुशरत-  यार पहले से तो सोचा नहीं है कि मुझे ऐसी फिल्में करनी है। मगर ये ज़रूर सोचती हूँ कि फ़िल्म कितनी इंटरेस्टिंग है। ड्रीम गर्ल मुझे की नैरेशन एक घंटे की थी , उसमे पहले 15 मिनट में ही मैने हां बोल दिया था। और मैं हँसना नहीं रोक पा रही थी..और इसके आखिरी में आपने लोगो को एक महत्वपूर्ण बात भी कही है। तो मेरे लिए इसका हिस्सा बनना नो-ब्रेनर था। मुझे ऐसी फ़िल्म का हिस्सा रहना है जो लोगों तक कोई बात पहुंचाती है। सोनी की टीटू में भी लड़की गलत नहीं थी आप देखो तो। अब मुझे पर्दे चाहिए तो तुम्हे ही कहूंगी न लाने। मम्मी-पापा को थोड़ी कहूंगी तो तुम्हारे साथ ज़िन्दगी क्यों बिताने चली हूँ? ये मेरा पर्सनल ज़िन्दगी में भी सोच है कि अगर मैं कहीं जा रही हूँ तो तुम्हारे साथ चलूं न, कोई दोस्त या भाई-बहन को क्यों लेकर जाऊं, फिर तुम्हारे साथ ज़िन्दगी क्यों जी रही हूँ? बराबरी की पार्टनरशिप है। अगर यही आप लड़कियों के नज़रिए से फ़िल्म दिखाओ तो सही है मगर फ़िल्म लड़को के नज़रिये से है। तो मुझे कोई फ़िल्म आती है, वो इंटरेस्टिंग लगती है तो मैं कर लेती हूँ। कोई फ़िल्म जो मुझे पकड़े रहे शुरू से अंत तक मुझे बहुत इंटरेस्टिंग लागती है। वहां जहां हमने दर्शकों का ध्यान खो दिया मैं खुद बोर हो जाती हूँ। तो अगर मैं बोर हो गई तो आप भी होंगे ही न। सिंपल बात हैं।

रिपोर्टर-आपकी अगली फ़िल्म में आप राजकुमार राव के साथ  हैं। आयुष्मान और राजकुमार दोनो ऐसे एक्टर्स है जिन्होंने ट्रेंड सेट किया है। तो कैसा रहा है उनके साथ काम करना?
नुशरत- मुझे पता है कि हम हर फ़िल्म ज़्यादातर अभिनेताओं के नाम को क्रेडिट करते है। क्योंकि वो फ़िल्म कर रहे हैं लेकिन आप ये इस बात को इग्नोर नहीं कर सकते हो कि वो फ़िल्म किसी ने लिखी है। कोई डायरेक्ट कर रहा है और कोई प्रोड्यूसर अपनी जैब से पैसे दे रहा है पिक्चर बनाने के लिए।  राज और आयुष्मान हमेशा से ही ऐसे अभिनेता रहे हैं कि उनकी फिल्में अलग थीं। मेरे साथ भी यही है, ये फिल्में बन रहीं हैं तभी मेैं कर रही हूँ नहीं तो मैं भी वही नार्मल कमर्शियल फिल्में करतीं रहती।

रिपोर्टर -बॉक्स ऑफिस सक्सेस कितना मायने रखती है ?
नुशरत- बॉक्स आफिस  डेफिनेटली बहुत महत्वपूर्ण है। आज के ज़माने में इंडस्ट्री में सब गणित है। इतने पैसे में पिक्चर बनेगी, इतने रिकवर हो गए और सब। पूरी चीज़े आखिर में एक अभिनेता के ऊपर आती हैं कि इसकी लास्ट पिक्चर ने इतना बिज़नेस किया था इसका ये ये रिजल्ट आता है। तो बॉक्स आफिस इंडस्ट्री को फाइनेंसियल पॉइंट से काम करता है और आपकी परफॉरमेंस आपके लिए आर्टिस्ट पॉइंट से काम करती है। तो दोनो होने चाहिए। एक दूसरे के बिना काम नही कर सकता।

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