हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है …बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा..अल्लामा इकबाल की ये शायरी रुस्तम ए हिंद दारा सिंह (Dara Singh) पर सटीक बैठती है. आज दारा सिंह की जयंती है. उनका जन्म 19 नवंबर को 1928 को अमृतसर पंजाब में हुआ था. दारा सिंह ने एक्टिंग और पहलवानी दोनों में पहचान बनाई. उनके आगे दुनिया के बड़े-बड़े पहलवान टिक नहीं पाते थे. दारा सिंह ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऑस्ट्रेलिया के 200 किलो के किंग कॉन्ग जैसे पहलवान को धूल चटा कर इतिहास रचा था. दारा सिंह को साल 1966 में ‘रुस्तम-ए-पंजा’ और 1978 में ‘रुस्तम-ए-हिंद’ के खिताब से नवाजा गया था…

दारा सिंह (Dara Singh) ठेठ पंजाबी थे और उन्हें अपनी मिट्टी और भाषा से इतना लगाव था कि उन्होंने नुकसान सहते हुए भी पंजाबी भाषा में फिल्में बनाईं. उनसे जुड़ा बहुत ही दिलचस्प वाकया फिल्मसिटी वर्ल्ड आपको बताने जा रहा है. दरअसल महान फिल्मकार शो मैन राज कपूर ने अपनी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में दारा सिंह को रिंगमास्टर की भूमिका दी थी.उन दिनों रूसी जिमनास्ट एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत फिल्म से जुड़े थे इसलिए दिन रात शूटिंग चलती ताकि समय पर फिल्म पूरी हो सके और रूसी जिमनास्ट की अतिरिक्त सेवा से बचा जा सके.एक दिन राज कपूर ने दारा सिंह को सुबह सबसे पहले सेट पर मौजूद पाकर हैरानी से पूछा कि पिछली रात देर तक शूटिंग करने के बावजूद वो इतनी जल्दी कैसे सेट पर आ गए. दारा सिंह ने कहा कि वो शूट से घर जाते तो रात के 3 बज जाते और फिर सुबह शूट पर आना मुश्किल हो जाता इसलिए वो रात स्टूडियो में ही सो गए. राज जी ने उनसे पूछा कि मगर सोए कहां तो उन्होंने कहा कि इतनी देर से लौटने पर पत्नी का सामना करने से कम खतरनाक था पिछली रात शेरों के साथ सोना. मतलब ये कि वो शेर के पिंजरे के पास ही सो गए. कुछ ऐसे जांबाज थे दारा सिंह साहब.


