अबरार..साहिर..गुरूदत्त और प्यासा..
गुरूदत्त जो प्यासा जैसा काम हमेशा से करना चाह रहे थे वो पहले स्थापित होना चाहते थे क्योंकि इंडस्ट्री का तब भी यही उसूल थी कि आपको आपकी हिट फिल्म के ज़रिए ही पहचान मिलती थी। हुआ भी ऐसा..दोनो ही फिल्मे (बाज़ी और मिस्टर एंड मिसेस ५५) कामयाब…