“कीचड़ बहुत है? लोग भी बहुत हैं।” : Article 15 पर डॉ. श्रीश पाठक की राय
तुम बिन की ताजी बयार वाले रोमानी निर्देशक में सहसा यह साहस आ जाना कि कला हस्तक्षेप का भी पुरजोर माध्यम है और ऐसा करते हुए मनोरंजन भी संजोया जा सकता है; एक बेहद ही राहत देने वाली बात है। पढ़िए Article15 पर डॉ. श्रीश पाठक की राय