एक्सेल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ने गर्व के साथ की भारतीय गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह पर आधारित बायोपिक की घोषणा!
आज पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक्सेल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ने अपनी अगली फिल्म की घोषणा कर दी है, जो नीरज पाठक द्वारा निर्देशित महान भारतीय गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन पर आधारित एक बायोपिक है।
नीरज पाठक ने इस बारे बात करते हुए कहा: वशिष्ठ नारायण सिंह जी के बारे में जब मैंने पढ़ा और सुना था में उनसे मिलने और उनके बारे में अधिक जानना चाहता था l जब में उनसे पहले बार मिला तब उन्होंने सबसे पहले मुझे पुछा ” बउआ कुछ खाएगा ?” वह अपने सेंसेस में नहीं थे l जब में उनके घर गया तब में उनके परिवार से मिला उनकी नेम प्लेट देखकर नहीं बल्कि उनके घर की दीवारों पर मैथमेटिक्स के फार्मूला लिखे हुए देखकर मुझे पता चला की ये वशिष्ठ नारायण जी का घर हैl मुझे ऐसा दिल से लगा की वशिष्ठ नारायण जी की अद्भुत कहानी दुनिया के सामने कहनी चाहिए, और मुझे बेहद ख़ुशी है की एक्सेल एंटरटेनमेंट रितेश सिद्वनि, फरहान अख्तर और में हम सब यह कहानी दुनिया के सामने लाने के लिए एकजुट हुए है l
आगे उन्होंने साझा किया : मुझे बेहद दुःख है के इनका हालही में दिहांत हुआ में चाहता था की इनके रहते ही हम यह फिल्म बनाये पर अब यह फिल्म उनके लिए एक श्रद्धांजलि के तौर पर हो सकती है क्युकी हालही में सोशल मीडिया पर उनके बारे में कई बातें की गयी थी l उनका जीवन बेहद उतार चढ़ाव भरा हुआ था और हर कोई इनके ज़िन्दगी की मोटी मोटी कहानी जानता है l हम इनके ज़िन्दगी की अनकही कहानी लोगो के सामने लाना चाहते है l यह एक देशभक्त की कहानी एक एडुकेशनिस्ट की एक कमाल की कहानी .. जो इंसान अपने परिवार से बेहद प्यार करते थे और जिसने देश प्रेम चुना ना की नासा में प्रोग्रेस l और कैसे इस देश को प्यार करने वाला गुमनामी के अँधेरे में खो गया l मुझे लगता है की यह कहानी बेहद अपीलिंग होगी हमने इस बारे में उनके परिवार से भी सारे कॉपीराइट्स बहुत ही जल्द हम इसकी स्टारकास्ट अनांउस करेंगे और जल्दी ही भी शुरू की जाएगी l
इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्देशक नीरज पाठक के साथ-साथ वशिष्ठ नारायण सिंह के परिवार से हरिश्चंद्र सिंह, मुकेश सिंह, शिव मंगल जी, राकेश सिंह और मिथिलेश सिंह शरीक हुए थे।
महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह अपने अजूबों के लिए जाने जाते हैं जिन्होंने आइंस्टीन की ‘थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी’ को चुनौती दी थी। वशिष्ठ नारायण को किताबें पढ़ने का बेहद शौक था और वह अपना अधिकतम समय पढ़ने में गुज़ारते थे।
हाल ही में, लंबी बीमारी के कारण 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
