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सपनों के लड़ाई की “भोर” होगी गोवा में

फिल्म का 80 प्रतिशत शूट बिहार के नालंदा ज़िले में हुआ है

बिहार के एक छोटे गांव में शूट हुई फिल्म “भोर” ने 49वे International Film Festival Of India के पैनोरमा सेगमेंट में अपनी जगह बना ली है

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IFFI (International Film Festival Of India) देश का सबसे बड़ा फिल्म फेस्टिवल। इस फिल्म फेस्टीवल में अगर किसी नए फिल्म मेकर की मूवी स्क्रीन हो जाए तो ये, किसी उप्लब्धी से कम नहीं होता।ऐसा ही हुआ बिहटा के कामाख्या नारायण सिंह के साथ। बिहार के एक छोटे गांव में शूट हुई फिल्म “भोर” ने 49वे International Film Festival Of India के पैनोरमा सेगमेंट में बना ली है। हिन्दी भाषा की ये फिल्म जिन मैनस्ट्रीम फिल्मों के साथ चयनित हुईं है, वो हैं, सुजीत सरकार की October,अली अब्बास की Tiger ZindaHai, संजय लीला भंसाली की Padmawat, मेघना गुलज़ार की Raazi

इस फिल्म का 80 प्रतिशत शूट बिहार के नालंदा ज़िले में हुआ है। जहां फिल्म के कलाकारों के लिए एक भिन्न तरह का वर्कशॉप लगाया गया था। चूंकि डायरेक्टर कामाख्या नारायण चाहते थे कि उनके कलाकार बिल्कुल मुसहरों की तरह दिखें तो उन्हें पैंगरी गांव में रखा गया। रोज़ उनकी ट्रैनिंग बड़ी अद्भुत होती थी। जिसमें सूअर चराना, उनके खाने का बन्दोबस्त करना, खेत में भैंस ले जाना, गोबर का गोएठा बनाना शामिल था। कलाकार कैरेक्टर को समझ लें इसके लिए उन्हें मुसहरों के घरों में रखा गया, वो वहीं सोते, खाते और उन्ही के कपड़े पहनते।

कॉस्ट्यूम डिज़िन का काम भी बड़े रोचक ढंग से किया गया। डायरेक्टर को जो कपड़े अपने कैरेक्टर के लिए ठीक लगते वो गांव वालों से मांग लेते थे। इसके एवज़ में उन्हें नए कपड़े दे देते जिससे खुश होकर गांव के लोगों ने फिल्म को फिल्माने में काफी मदद की।

 

इस छोटे बजट ती फिल्म में बड़ी चतुराई से सामाजिक ताने बाने और सपनों की लड़ाई को दिखाया गया है। एक मुसहर समाज की लड़की जिसके घर वालों को उसकी सही उम्र तक नहीं पता, सिर्फ अपने सपनों और इच्छा शक्ति के बूते पूरे देश में आंदोलन खड़ा कर देती है।

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