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INTERVIEW ALI ABBAS ZAFAR : “टाइगर की अगले पार्ट की कहानी तैयार है”

सुल्तान और टाइगर जिंदा है के बाद अली अब्बास ज़फर और सलमान की जोड़ी ने भारत के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्मों की हैट्रिक लगा दी है। पेश है फिल्मसिटी वर्ल्ड संवाददाता शौनक जैन के साथ अली की खास बातचीत

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रिपोर्टर – Ali Abaas Zafar फिल्मसिटी वर्ल्ड में आपका स्वागत है ..सबसे पहला सवाल ये है कि आपने इतनी सारी फिल्मे की हैं सलमान के साथ, कैसा रहा है अबतक का आपका सफर? आपने उनके साथ काम करना काफी छोटी उम्र में ही शुरू कर दिया था।
अली अब्बास ज़फ़र –  उम्र तो अभी भी छोटी ही है यार। थोड़ी उनकी उम्र हो रही है ढाढ़ी में सफेद बाल दिख रहे हैं लेकिन सच कहूं तो वो बिल्कुल नही बदले, वैसे ही मूडी मगर मुझे उनके साथ काम करना पसंद है क्योंकि वो ईमानदार हैं…ये ईमानदारी जो वो काम करते हैं और जैसे दिखते हैं उन सभी में नजर आती है। उन्हें अब इंडस्ट्री में 30 साल हो गए हैं और मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे इतनी जल्दी अपने करियर में उनके साथ काम करने का मौका मिला क्योंकि वो इतने बड़े सुपरस्टार है और मैं कोशिश करता हूँ कि मैं उनमे कुछ नया लेकर आउं और ऐसा किरदार लिखूं जिसमे उन्हें अलग चीज़ें करने का मौका मिले।

रिपोर्टर – आपके लिए ये फ़िल्म बनाना बाकी फिल्मो के मुकाबले कितना मुश्किल था? क्योंकि इस फिल्म का सफर अलग है और आप इतना लंबा समय इसमे दिखा रहें हैं?
अली- मुश्किल तो बहुत था क्योंकि फ़िल्म में उनकी ज़िन्दगी को 6 अलग हिस्सों में बांटा गया है और हर हिस्सा या चैप्टर एक मिनी फ़िल्म जैसा है। तो आप जब उन्हें बचपन में देखते हैं तो वो एक हिस्सा है फिर सर्कस में दिशा के साथ फिर कटरीना के साथ तो हर भाग एक फेज है उनकी ज़िन्दगी का ..जिसकी अपनी एक शुरुआत, बीच और अन्त है। ये एक बहुत ही भावुक फ़िल्म है और जो ट्रेलर में लाइन है “देश लोगो से बनता है और लोगो की पहचान उनके परिवार से होती है। तुझ में पूरा देश है भारत।” तो फ़िल्म का जो आइडिया है कि आपके लिए देश क्या होता है? देश परिवार होता है और अगर आप आपने परिवार को साथ रख सकते हो तो पूरे देश को साथ रख सकते हो।

रिपोर्टर -क्या आपको लगता है कि ये जो आज कल का राष्ट्रवाद और देशभक्ति की जो बात है वो एक फ़िल्म के लिए काम करती है और उसे कामयाब होने में मदद करती है?
अली-  ये तो उस पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे दिखाओ। अब मेरी फ़िल्म में ये बहुत ही आसान तरीके से दिखाया गया है, वो बात करती है उस बारे में जिससे हमारा देश बनता है। हर देश एक तरह के परंपरागत मूल्यों से से बनता है और दुनिया हमारे इन वैल्यूज़ से सीखने के लिए इन्हें देखती है। ये फ़िल्म हमारी उन्हीं मान्यताओं और मूल्यों के बारे में बताती है।

रिपोर्टर -क्या ये बात हम मान सकते है कि अली अब्बास ज़फर और सलमान खान जब मिलते हैं तो फ़िल्म हिट होती है? इस बार क्या लग रहा है आपको?
अली – यार अगर ऐसा कुछ है तो बड़ी खुशी की बात है।मैं हमेशा ये बोलता हूँ कि जब पिक्चर निकल जाती है और हिट हो जाती है की इस बार बच गए। तो जब तक बचे रहे तो अच्छी बात है और इस बार की बात करें तो बहुत अच्छा लग रहा है।

रिपोर्टर -सलमान सर की फैन फॉलोविंग तो बहुत ज़्यादा है लेकिन पिछली दो फिल्मों से थोड़ी आलोचना भी बढ़ी है उनकी , तो क्या आपको लगता है कि इस फिल्म से वो आलोचकों को जवाब देंगे। 
अली – हाँ ज़रूर। क्योंकि मुझे लगता है कि वजह ये है कि आज जब आप इतने बड़े सुपरस्टार हैं तो आपके प्रशंसक आप से बहुत कुछ उमीदें रखतें है और जब भी आपका काम या फिल्में उन उम्मीदों के नीचे रहेंगी तो आपके काम की आलोचना होगी।तो जब इसका ट्रेलर भी आया तब लोगो ने मुझे कहा कि ये एक अच्छी सलमान खान फ़िल्म लग रही है। मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि मैं कहानी और किरदार इतना बड़ा लिखूं कि वो सलमान से भी उपर हो। ऐसा ही सुल्तान में हुआ था, ऐसा ही टाइगर में था और ऐसा ही भारत में है।

रिपोर्टर -आपने जिस कोरियन फ़िल्म से इसका रीमेक बनाया है उस कहानी से कितना भारत में है और क्या जैसा आपने सोचा था वैसा आया है आपके पास रिजल्ट?

अली – हम बहुत ही खुश हैं फाइनल फिल्म से। मुझे लगता है कि फ़िल्म स्क्रिप्ट से भी बेहतर है और ये हमेशा एक मुश्किल चीज़ होती है क्योंकि लिखना आसान होता है लेकिन जब आप सच में जाकर उसे शूट करते हैं तो बहुत बहुत मुश्किल हो जाता है। खासकर कि इस दर्जे की फ़िल्म जो पार्टीशन से लेकर देश में बदलाव दिखा रही हो और उसके बाहर भी जा रही हो तो चुनौती तो थी । रही बात कोरियान फ़िल्म की तो  इसमे या उस फिल्म में दोनो की कहानी तो एक ही है लेकिन फर्क देखने मिलेगा कि ये फ़िल्म हिंदुस्तान में बसी है तो यहां का सोशियो-पोलिटिकल सिनेरियो है और यहां का कल्चर और ज़बान अलग है और फ़िल्म जो मिडिल-क्लास में सेट हैं तो उसका अपना अलग रंग भी दिखेगा। तो जो आपको एक सलमान खान की फ़िल्म से आशा है वो तो मिलेगा ही लेकिन 4-5 चीज़े ऐसी भी हैं जो इससे बढ़कर आपको महसूस होंगी।

रिपोर्टर – -क्या आपको लगता है की ये सही समय है इतनी बड़ी फ़िल्म बनाने का? क्योंकि देखा जाए तो कई बड़ी फिल्में ऐसी हैं जो बॉक्स आफिस पर चली नहीं इस साल और छोटी फिल्में चली।

अली – देखिए आज जिस तरह की फिल्में हम बना रहें हैं वो बदल रहा है। आज और बल्कि हमेशा से ही एक फ़िल्म की सबसे बड़ी ताक़त उसकी कहानी और स्क्रिप्ट है।ये हमेशा से ही रहा है और अगर आप सलमान की पिछली बड़ी हिट्स देखेंगे जैसे बजरंगी भाईजान, सुल्तान और बाकी सब तो पता चलेगा की उन सभी में एक बहुत एक अच्छी कहानी थी जिससे दर्शक कनेक्ट कर पाए। एक अच्छी स्क्रिप्ट के साथ जब वो आये तो उन्होंने उससे बस और आगे और उपर बढ़ाया है। तो आज हर निर्देशक और फ़िल्म बनाने वाले के लिए ये सबसे बड़ी सीख है कि फ़िल्म में सबसे बड़ी स्टार आपकी स्क्रिप्ट है। आज अगर कोई छोटी फ़िल्म बनाये जिसमे बहुत बड़ा स्टार ना हो, वो भी अच्छा कर सकती है क्योंकि उसकी कहानी बढिया होनी चाहिए । तो अब सबसे ज़्यादा दिक्कत जो है वो राइटर्स के लिए। मैं तो कह रहा हूँ कि जो राइटर बनना चाहता है वो पहले से ही कॉम्प्लान पीकर आये ( हंसते हुए)।

रिपोर्टर -आपकी जो पहली फ़िल्म थी वो कटरीना के साथ थी। तो आपने उन्हें तब से अबतक कैसे बढ़ते देखा है?
अली – जब हमने ब्रदर की दुल्हन बनाई तभी वो पहले से ही बहुत बड़ी अभिनेत्री थीं और मेरे ख्याल से बहुत लोगों को उन्होंने जिस तरह वो किरदार निभाया बहुत अच्छा लगा। जब मैने उनके साथ टाइगर में काम किया तो मैने एक पूरी नई अभिनेत्री को देखा उनमे। क्योंकि मुझे लगता है कि आप एक क्रिएटिव फील्ड में वो ही एक्सपीरियेंस डालते हैं जो आपकी निजी ज़िन्दगी में होता है।  अगर आप किसी भी अभिनेता की फ़िल्म देखे पुरानी और फिर नई तो आपको यही दिखेगा। हर फ़िल्म में और जो आपके निनी ज़िन्दगी में हो रहा है उससे एक विकास देखने को मिलता है और आज जिस तरह के किरदार कटरीना ले रही हैं, मुझे लगता है कि  जीरो में वो बहुत ही बेहतरीन थीं।  भारत में भी मैने कुछ नही बदला उनके लिए, मैने कहा कि प्रियंका नहीं है तो भी तुम्हारे लिए कुछ नही बदलेगा, तुम्हे यही पूरा किरदार निभाना है जैसा लिखा है। फिर हमने इतनी वर्कशॉप्स कीं, उनके भाषा और डायलेक्ट पर काम किया, इतने सारे असल ज़िन्दगी के किस्से सुने उस दौर की औरतों के, मैने उन्हें अपने माता पिता के पुराने फोटोज दिखाए और हमने बॉडी लैंग्वेज पर काम किया और मुझे लगता है कि जब किसी कलाकार को ये सब पेपर पर लिखा हुआ मिल जाता है तो वो अभिनेता भी अपनी सारी जान लगा देगा किरदार में और अगर तुम आओगे बस 2 गाने करके निकल जाओगे तो अभिनेता भी वैसा ही समझेगा।

रिपोर्टर -आपने इसमे सलमान के इतने अलग अलग रूप बताए, तो इनमें से सलमान के लिए सबसे मुश्किल कौन सा रहा और एक निर्देशक के रूप में, आपके लिए सबसे मुश्किल कौन सा रहा?
अली – देखो जवान तो वो अभी भी हैं। वो तो अभी भी खुदको 27 साल का कहते हैं। तो जवानी आसान थी…मुश्किल था बुढ़ापा क्योंकि वो कहते थे कि यार मुझे बहुत कैरैक्टर में घुसना पड़ता है और ये सब लगाना पड़ता है।तो बुढापा सबसे मुश्किल था लेकिन आप देखोगे तो फ़िल्म में सबसे अच्छा वही दिख रहा है क्योंकि उन्होंने वो भाग बड़े ही खूबसूरती से निभाया है। और वो लुक क्रैक करने में ही हमारी बैंड बज गयी थी। मुझे जो सबसे ज़्यादा पसंद है किरीदार वो वही है, वो बूढ़ा और उसके पहले वाला जब वो 50-60 के आस पास है।

रिपोर्टर -अभी हाल ही में टाइगर सीरीज़ के पार्ट- 3 की बातें चलीं.. तो कितनी सच्चाई है उनमें और क्या काम शुरू हुआ है?
अली- नहीं, काम तो कुछ शुरु नहीं हुआ है मगर सच्चाई ये है कि मुझे कहानी शायद मिल गयी है  और ये मैने सलमान सर और प्रोड्यूसर दोनो के साथ शेयर कर ली है और मुझे लगता है की इसमे एक पागलपन और जादू है, तो एक बार भारत का काम खत्म हो जाए तो मैं उसपर ध्यान देना शुरु करूँगा।

 

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