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हैकसॉ रिज पर जब जीती गयी बिन बंदूक एक जंग

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फिल्मः हैकसॉ रिज

निर्देशकः मेल गिब्सन

कलाकारः एंड्रयू गारफील्ड, सैम वर्थिंग्टन , ल्यूक ब्रेसी

       अपने प्रिय शगल को हर साल की तरह इस साल जारी रख रहा हूं..एकेडमी अवार्ड्स (ज्यादा प्रचलित ऑस्कर अवार्ड्स) में बेस्ट पिक्चर के साथ साथ अन्य श्रेणियों में दावेदार अपने पसंद की फिल्मों पर कोशिश करूंगा कि पुरस्कारों के ऐलान से पहले ज्यादा से ज्यादा बात कर पाउं..हालांकि चर्चाएं ज्यादा ला ला लैण्ड की हैं और उसके बारे में बहुत कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका है इसलिए ला ला लैंड पर में थोड़ी देरी से आउंगा..आज बात हैकसॉ रिज की..

      पहली बात तो ये कि हैकसॉ रिज काल्पनिक नहीं बल्कि असल घटना पर बनी फिल्म है। फिल्म को मेल गिब्सन ने निर्देशित किया है और लाजवाब अभिनेता होने के साथ पैशन ऑफ द क्राइस्ट जैसी दर्दनाक फिल्म के वो निर्देशक भी हैं.. हैकसॉ रिज डेसमॉन्ड डॉस नाम के एक ऐसे सैनिक की कहानी है जिन्होने सेना में रहते हुए कभी बंदूक नहीं छूयी..लेकिन ऐसे नियम का पालन करते हुए भी उन्होने हैकसॉ रिज नाम के उंचे दुर्लभ युद्धस्थल पर 75 जिन्दगियां बचायीं..वो कई युद्धों में शामिल रहे और ऐसे ही जिन्दगियों को कंधे पर लादे एक अलग तरह की जंग जीतते रहे। फिल्म की कहानी सिर्फ हैकसॉ रिज वाले युद्ध के बारे में ही नहीं है..बल्कि ये प्राइवेट डॉस के सेना में शामिल होने..पारिवारिक मोर्चे पर उनके द्वंद्व..बंदूक न उठाने के उनके हठ के प्रति सैन्य अधिकारियों और साथियों के व्यवहार के साथ ही बाइबिल की शिक्षा में उनके अटूट विश्वास.. इन सभी पहलुओं को पेश करती है।

       प्राइवेट डॉस सेना में जाकर भी बंदूक नहीं चलाता इसके पीछे फिल्म कमाल का डेवलपमेंट देती है..हमें शुरुआती दृश्यों में युद्ध के विनाशक भीषण वीभत्स बर्दाश्त से बाहर कई सीन्स दिखाये जाते हैं..अगले पल डॉस के पिता पूर्व सैनिक को शहीद सैनिकों की कब्र पर शराब डालते दिखाया जाता है..डॉस का बचपन युद्ध से टूट चुके पिता की हताशा देख गुजर रहा है..वहीं दूसरी ओर बचपन की एक और घटना प्राइवेट डॉस को अहिंसा की ओर मोड़ती है..बाइबिल को साथ लिये वो दुनिया में खुशियां ढूंढ रहा है…खुशी उसे एक नर्स के रूप में मिलती है..वो सेना में चिकित्सकीय सहयोग के लिए दाखिल हो जाता है…फिल्म हैकसॉ रिज में एंड्रूयू गारफील्ड आपको प्राइवेट डॉस के उस अटूट विश्वास के बिलकुल करीब ले जाते हेैं जिससे आपका सामना फिल्म के खत्म होते होते होगा..हैकसॉ रिज मानों प्राइवेट डॉस के जरिेए आपसे संवाद करती है…क्योंं अहिंसा..सच्चाई…ईमानदारी..कुछ अच्छा करने वालों को मरने की हद तक साबित करना पड़ता है..ये फिल्म आपसे ये सवाल करती है।

 

 

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