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कास्टिंग और कहानी दोनों में दमदार है ‘Criminal Justice’

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क्रिमिनल जस्टिस( Criminal Justice) को जो बात सबसे खास बनाती है वो है इसका हर किरदार को पूरा वक्त देना..मुझ पर इस सीरीज़ की ये विशेषता बहुत प्रभावी लगी..मसलन बहन अवनी के रोल में रुचा ईनामदार हों या फिर वकील के किरदार में मिता वशिष्ठ…फिर इंस्पेक्टर सैलियन के रोल में पंकज सारस्वत हों..सभी किरदारों को पूरा वक्त दिया गया जिससे दर्शक का रिश्ता बनता है इनसे और एक पर्सनल फील आता इस कहानी में..कुछ किरदारों की यात्रा भी है..जैसे जैकी श्रॉफ के किरदार की ।

लंदन के लेखक और निर्देशक पीटर मोफट की इसी नाम से आई ब्रिटिश सीरीज़ पर बनी क्रिमिनल जस्टिस कहानी है आदित्य शर्मा नाम के एक ऐसे लड़के की जिस पर एक लड़की की हत्या का आरोप लगा है..आदित्य का किरदार विक्रांत मैसी ने निभाया है..मुश्किल ये है कि आदित्य हत्या के वक्त उस लड़की के साथ होता है..दोनों नशे में भी होते हैं लेकिन एक वक्त के बाद आदित्य को उस घटना के बारे में कुछ भी याद नहीं..परिवार में मां हैं.. पिता हैं, शादीशुदा बहन है जिसका पति आदित्य को कुछ खास पसंद नहीं करता और आदित्य के केस में अपने घर से जा रहे पैसों पर चिढ़ा हुआ है क्योंकि उसे लगता है कि इस केस की वजह से उसका परिवार बर्बाद हो रहा है..परिवार के सभी सदस्यों को लगता है कि आदित्य कुछ भी कर सकता है लेकिन खून नहीं कर सकता..इस केस पर कैब चलाने वाली कंपनी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है जिनके लिए कंपनी की कॉर्पोरेट वकील मंदिरा माथुर यानि मिता वशिष्ठ ये केस लड़ रहीं हैं..मिता की एक असिस्टैंट है निखत हुसैन यानि अनुप्रिया गोयनका और एक्सीडेंटली इस केस से जुड़ जाते हैं माधव मिश्रा नाम के सामान्य वकील जो इस केस में निखत की पूरी मदद करते हैं..माधव मिश्रा का किरदार निभाया है पंकज त्रिपाठी ने। दूसरी ओर जांच अधिकारी इंसपेक्टर सैलियन ये शुरु से माने बैठे हैं कि आदित्य गुनहगार है और उसे तो वो फांसी के फंदे तक लेकर ही जाएंगे…माधव मिश्रा का भी एक पास्ट है और उनका किरदार सामान्य होते हुए भी जिंदगी में ढेर सारी पेचीदगियां समेटे हुए है। केस आदित्य की तरफ से लगातार कमजोर होता जाता है क्योंकि आदित्य वकील के हिसाब से एडजस्ट करने को तैयार नहीं है..वो सच ही बोलना चाहता है और बार बार यही बोलता है कि उस लड़की के साथ वो था..दोनों बहुत इंटिमेट भी हुए..नशा भी किया..कुछ जानलेवा हरकतें भी कीं लेकिन एक वक्त के बाद क्या हुआ उसे जरा भी पता नहीं..जेल में बंद आदित्य की मुलाकात जेल के दादा मुस्तफा से होती है जो उसको प्रोटेक्ट करते हैं लेकिन एक खास शर्त पर..यहां से आदित्य की एक अलग यात्रा शुरु होती है..जेल में एक और किरदार है लायक नाम के निहायत ही खतरनाक, बदतमीज और घिनौने शख्स का जिसे बहुत ही बेहतरीन ढंग से जिया है दिब्येंदू भट्टाचार्य ने। इस सीरीज की सबेस बड़ी खासियत ये है कि ये कैरेक्टर ग्राफ पर बहुत ध्यान देती है..हर किरदार की डेवलपमेंट बहुत ही शानदार है। जरूर देखिए ऐसी मेरी राय है।

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