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INTERVIEW KATRINA KAIF: बबीता का किरदार जैसा बाहर से दिखता है वैसा है नहीं

कैटरीना कैफ फिल्म जीरो को लेकर काफी उस्ताहित हैं..इस इंटरव्यू में कैट ने किये कई दावे..

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शाहरूख खान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा की much awaited film ‘ZERO’ रिलीज़ हो गयी है..रिलीज के पहले ही फिल्म के हर किरदार को दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है…और इसी को लेकर फिल्म में सुपरस्टार बनी और असल जिंदगी में भी बॉलीवुड की heartthrob Katrina Kaif ने फिल्मसिटी वर्ल्ड से की खास बातचीत…उनसे हुई बातचीत का ब्यौरा पेश कर रहीं हैं हमारी सीनियर राइटर प्राची उपाध्याय

 REPORTER-  कैटरीना आपने शाहरूख  में बतौर एक्टर  जब तक है जान से लेकर जीरो तक कितना बदलाव देखा है ?

KATRINA-  मुझे नहीं लगता कि मैं सही इंसान हुं इस सवाल का जवाब देने के लिए…शाहरूख का एक्सपीरियंस इस इंडस्ट्री में इतना एक्सटेनसिव है, इतना बड़ा है….मेरे हिसाब आनंद सर इसका जवाब देने के लिए सही व्यक्ति होंगे…हां लेकिन इंसान के तौर पर शाहरूख के अंदर अपने काम को लेकर एक अलग ही passion, enthusiasm दिखता है जो कि बहुत ही amazing है, मतलब उनको इस इंडस्ट्री में बहुत वक्त हो चुका है बावजूद इसके उनको हमेशा ही कुछ अलग, कुछ नया करने की उत्सुकता रहती है…He wants everything at par…शाहरूख के लिए काम की क्वालिटी काफी मेटर करती है…

REPORTER-  इस फिल्म में आपका किरदार इमोशनली चैलेंज्ड है…तो उस बारे में आप क्या कहना चाहेंगी ?

KATRINA-  देखिए इस फिल्म के जरिए आनंद सर ये दिखाना चाहते है कि जरूरी नहीं कि चीजें वैसी ही हो जैसी बाहर से दिखती हो…क्योंकि अगर आप बाहर से देखो तो अनुष्का का कैरेक्टर आफिया को देखकर लगेगा कि उनको कुछ भी अचीव करने में दिक्कत होगी, क्योंकि वो फिजिकली डिसेबल है…वहीं बउआ को वर्टिकल डिएबलिटी है तो कई लोग उसे वो रिस्पेक्ट नहीं देंगे जो उसे मिलनी चाहिए…फिर वहीं एक कैरेक्टर है जो एक सुपरस्टार है जिसे सब प्यार करते है लेकिन उसे वो प्यार नहीं मिल पा रहा जो उसे चाहिए…आ देखों, बहुत से लोग कहीं ना कहीं अपने अंदर ये फील करते है कि वो कुछ अधूरे हैं…उन्हें समझ नहीं आता क्या है वो, लेकिन कुछ तो है जो missing है…तो आनंद सर फिल्म के जरिए ये ही बताना चाहते है कि खुद को अधूरा या पूरा फील करने का emotion आपके अपने अंदर से आता है…उसका फिजिकल डिस्बेलिटी से कोई लेना देना नहीं है…और बबीता का रोल मेरे लिए बहुत intense रहा है….तो अगर लोगों को बबीता का ये कैरेक्टर पंसद आता है तो वो मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात होगी…

REPORTER-  कैटरीना आनंद सर के मुताबिक ये बतौर एक्टर अबतक का बेस्ट रोल है जो किसी ने आपको ऑफर किया है…क्योंकि किसी ने भी आपके एक्टर साइड को ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया…तो क्या इस रोल के लिए आपने किसी तरह का कोई मेथड फॉलो किया ?

KATRINA-  हां मैंने रोल के लिए कुछ references लिए थे…लेकिन अगर मैं मैथेड की बात करूं तो मेरे लिए फिल्मों में मेरे instincts  काफी मददगार होते है…और अबतक मैं उनके according ही खुद को तैयार करती रही हुं…मेरे लिए कैरेक्टर का माइंडसेट काफी मैटर करता है…वो कैसे सोचती है, क्या चाहती है, उसका डर क्या है….मैं उसका माइंडसेट समझने की कोशिश करती हुं…जिससे उससे जुड़ा कोई भी सीन करने में आसानी होती है क्योंकि माइंससेट जानने के बाद आप समझने लगते हो कि किस सिचुएशन में वो कैसे बिहेव करेगी…तो उससे वो सीन और भी ज्यादा  true, ज्यादा real लगने लगाता है…   

REPORTER-  कैटरीना आपने इंडस्ट्री में 15 साल पूरे कर लिए हैं…जिसमें आपने कई अलग-अलग तरह के रोल किए और उनसे बहुत कुछ सीखा…तो आपने ‘ZERO’  की जर्नी के दौरान क्या सीखा ?

KATRINA-  देखिए, कभी-कभी ये जरूरी होता कि आपको कुछ चीजों को पीछे छोड़ते हुए वो कहना चाहिए जो आप कहना चाहते हो…भले शायद आप बाद में वैसा फील ना करो…क्योंकि बतौर इंसान मेरा नेचर ऐसा है कि मैं आप से कई कुछ नहीं कहूंगी…मतलब में आपके साथ सालों तक रहुंगी लेकिन आपसे कहुंगी कुछ नहीं…Even अगर वो फिलिंग मुझे vulnerable बना रही है लेकिन उसको कहने से मेरे इमोशन एक्सपोज हो जाएंगे तो मैं नहीं बोलुंगी…तो वो मेरा नेचर है as a person… बबीता कुमारी के कैरक्टर की बात मुझे बेहद अच्छी लगी, क्योंकि वो बोल देती है, एक्सप्रेस कर देती है…तो मैं भी चाहुंगी कि कभी अपने नेचर को चेंज कर पाऊ और कि जो फील करती हुं उसे कह पाऊ, एक्सप्रेस कर पाऊ…

REPORTER-  कैटरीना आप लंबी है और शाहरूख ने बौने की किरदार निभाया है…तो क्या आप दोनों के बीच कोई फनी मोमेंट था ?

KATRINA-  फनी नहीं था…क्योंकि मेरे और शाहरूख के बीच के सारे सीन्स काफी intense है…तो as such कोई फनी मोमेंट था नहीं…

REPORTER- आपने इतने सारे डायरेक्टरों के साथ काम किया है और आनंद सर के साथ ये आपकी पहली फिल्म थी…तो क्या आपको कोई difference नजर आया ?

KATRINA-  आनंद सर की एक बहुत बड़ी खासियत है कि वो आपको सीन का बर्डन फील नहीं करने देते…सीन कितना भी इंटेंस हो, कितना थी बड़ा और डीप हो, वो आपके साथ बैठकर बातें करेंगे, आपको लाइट और रिलेक्स फील कराएंगे….तो वो आपको बहुत ही ज्यादा comfortable कर देता है…जिससे आप बहुत ही ईज के साथ सीन कर ले जाते हो…

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