शुभ मंगल ज़्यादा सावधान ज़्यादा वक़्त तक अपनी कॉमेडी पर डिपेंड है जिसके जरिए वो इस टैबू सब्जेक्ट पर अपने ह्यूमर में ज़्यादा बात करती है लेकिन ये कॉमेडी कहीं असर करती है तो कहीं बोर। लेकिन इस फ़िल्म के अपने कई मैजिकल मोमेंट्स हैं खासकर क्लाइमेक्स में । वैसे तो इस फ़िल्म को आयुष्मान खुराना और जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू की फ़िल्म बताकर बेचा गया है लेकिन फ़िल्म में आपका दिल जीत ले जातें हैं गजराज राव, नीना गुप्ता, मनु ऋषि और मानवी गगरु। 2 घंटे की ये फ़िल्म एक टाइमपास फ़िल्म है लेकिन ये समलैंगिकता के विषय पर बस सेफली निकल जाने वाली साबित हुई। या शायद मेरी उम्मीदें ज़्यादा थीं।
फ़िल्म की कहानी त्रिपाठी परिवार की है जिसमें घर के मुखिया हैं शंकर त्रिपाठी यानी गजराज राव, पत्नी नीना गुप्ता, भाई चमन यनि मनु ऋषि, उसकी पत्नी चंपा, उनकी बेटी गोगल यानि मानवी गगगरु। एक दिन इस परिवार के मुखिया को पता चलता है कि उनका बेटा गे है जोकि कार्तिक यानि आयुष्मान खुराना को पसंद करता है। बस अब यहीं से परिवार की जद्दोजहद शुरू हो जाती है दोनों को अलग करने की। इसी में ढेर सारे पेंच कॉमेडी सीन पिरोए गए हैं। फ़िल्म की कहनीं को सुविधा के हिसाब से मोड़ दिए गए हैं जिस वजह से ये कम असर कर पाती है जबकि एंटरटेनमेंट पूरा है। डायलॉग्स बढ़िया है जिसमे हिंदी का शानदार प्रोयोग अच्छा लगता है लेकिन ये कहानी आउटस्टैंडिंग नहीं है।
ऐक्टिंग की बात करें तो जैसा मैंने पहले ही कहा कि गजराज राव, मनु ऋषि, नीना गुप्ता, मानवी गगरु। ये सभी लीड ऐक्टर से ज़्यादा बेहतरीन हैं क्योंकि इनके एक दूसरे पर जो रिएक्शन है वो किसी मे नहीं। आयुष्मान खुराना को इस बात के लिए दाद देनी होगी कि उन्होने ये साहसी किरदार चुना लेकिन फ़िल्म के लेखक और डायरेक्टर ने उनके लिए अच्के से इसे नहीं बना। जितेंद्र कुमार का शानदार डेब्यू रहा उन्होंने एक बार नाइ उम्मीद जताई।
फ़िल्म का म्यूजिक कमज़ोर था..शुभ मंगल सावधान के मुकाबले ज़्यादा सावधान कमतर लगी। फ़िल्म को मेरी तरफ से 2.5 स्टार्स।
