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Movie Review Batla House सच्चाई के करीब मेनस्ट्रीम सिनेमा का मज़ा

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फिल्म – बाटला हाउस
रेटिंग – 3.5/ 5
कलाकार – जॉन अब्राहम, मृणाल ठाकुर, रवि किशन, मनीष चौधरी, राजेश शर्मा, क्रांति प्रकाश झा आदि।
निर्देशक – निखिल आडवाणी

पहली राय – बाटला हाउस को लेकर मेरी पहली राय.. Batla House शुरू से आखिर तक आपको बांधे रखेगी..2013 के चर्चित एनकाउंटर पर आधारित इस फ़िल्म में वो सब कुछ है जो एक इंटेंस फ़िल्म में होना चाहिए ..कुछ लिबर्टी भी ली गई है मगर एक पॉवरफुल फ़िल्म होने के साथ साथ ये संतुलित भी है।

कहानी – साल 2013 में दिल्ली में हुए चर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर केस पर बनी इस फिल्म की कहानी उस केस के इनवेस्टिगेशन, पुलिस की भूमिका उस वक्त के राजनीतिक टेंपरेचर और कई और फैक्टर्स को लेकर लिखी गई है। फिल्म खुलती ही एनकाउंटर सीन से है जहां एक पुलिसवाले के के वर्मा यानि रवि किशन को गोली लगी है और वो बुरी तरह घायल है..सीनियर पुलिस ऑफिसर संजीव कुमार यानि जॉन अब्राहम चार्ज लेता है…दो स्टू़डेंट जिन पर इंडियन मुजाहिद्दीन टेरर ग्रुप के लिए काम करने का आरोप है मारे जाते हैं..दो भाग जाते हैं..एक सरेंडर कर देता है..इसके बाद शुरु होता है असल खेल..घटनास्थल पर जो कुछ हुआ उसे लेकर संजीव कुमार परेशान है उसकी पत्नी नंदिता कुमार यानि मृणाल ठाकुर एक न्यूज एंकर है जिसके चैनल में पुलिस की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं..दूसरी तरफ पॉलिटिकल प्रेशर और बाकी दबाव भी पुलिस और सिस्टम पर बनते हैं क्योंकि बहुत से लोगों का मानना होता है कि ये एनकाउंटर फर्जी था और मारे गए लड़के निर्दोष स्टूडेंट थे..ये फिल्म इसी केस की पड़ताल और पुलिस पर लगे आरोपों की जांच के दस्तावेज को सिनेमा की शक्ल में ढालने की बढ़िया कोशिश है..लेखक रितेश शाह और डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने इस रियल कहानी को मेनस्ट्रीम फिल्म जैसा बनाया है..जिसमें आपको थ्रिल मिलेगा..सीक्रेसी मिलेगी और साथ ही फुल ड्रामा भी मिलेगा..लेकिन सेकंड हाफ में फिल्म कुछ ज्यादा ही मेनस्ट्रीम हो जाती है जिससे आइटम नंबर और कुछ ड्रामेटिक सीन जोड़कर और मसाला परोसा जाता है जो फिल्म का मूड बिगाड़ने का काम करते हैं क्योंकि आप सस्पेंस और थ्रिल में ज्यादा इनवेस्ट होना चाहते हैं न कि ड्रामा और स्किन शो में। लेकिन डॉयलॉग्स अच्छे हैं..फिल्म कसी हुई है।

एक्टिंग – फिल्म में आपको बिलकुल नए जॉन अब्राहम नजर आएंगे..मद्रास कैफे के बाद ये उनके करियर की बढ़िया नपी तुली परफॉर्मैंस वाली फिल्म है..खासतौर पर जहां वो कुछ बोल नहीं रहे सिर्फ बॉडीलैंग्वेज से बाते कर रहे हैं वो उनकी रेज बताता है। बाकी कलाकारों में मृणाल ने अच्छा काम किया है..लड़कों की कास्टिंग बढ़िया रही है..वकील के रोल में राजेश शर्मा प्रभावित करते हैं तो मनीष चौधरी टाइपकास्ट हैं । नोरा फतेही स्किन शो के लिए आती हैं लेकिन उसी बहाने उनका कुछ काम भी है फिल्म में जो थोड़ा कम पचता है।

डायरेक्शन और वर्डिक्ट – निखिल आडवाणी का डायरेक्शन फिल्म की जान है..वो डी डे वाले मोड में लौटे हैं और जान रहे हैं कि इन्टेंसिटी किस लेवल तक बढ़ानी है..उनके कैमरामैन सौमिक मुखर्जी ने उनके विजन को जबरदस्त स्केल दिया है..खासकर रियल लोकेशन के शूट और कुछ शॉट्स तो कमाल के हैं। कुल मिलाकर बाटला हाउस लोगों को पसंद आएगी ..फिल्म ने जो प्रॉमिस अपने ट्रेलर से किया था उससे कहीं ज्यादा डिलिवर करती नजर आती है।

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